‘क्रीमी लेयर’ मानदंड बरकरार; फैसले को लागू करने के लिए समयसीमा बढ़ाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

समीर वानखेड़े ब्यूरो चीफ:
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अपने मार्च 2026 के आदेश को दोहराते हुए स्पष्ट किया है कि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के उम्मीदवारों के लिए 'क्रीमी लेयर' का निर्धारण करते समय माता-पिता के वेतन या आय के साथ-साथ उनके पद और उसके दर्जे (स्टेटस) पर भी विचार करना होगा। इस फैसले को लागू करने के लिए दो साल का समय देने और इन मानदंडों को केवल भविष्य की नियुक्तियों पर लागू करने की केंद्र सरकार की मांग को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
केंद्र सरकार ने 2004 में एक परिपत्र जारी किया था। इसके अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, बैंकों और संस्थानों (जिनके पदों की सरकारी पदों से समानता तय नहीं हुई है) के कर्मचारियों का वेतन लगातार तीन साल तक एक निश्चित सीमा से अधिक होने पर उनके बच्चों को क्रीमी लेयर में शामिल करने का प्रावधान था।
इस पर मार्च 2026 में फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 'केवल माता-पिता की आय ही क्रीमी लेयर का मानदंड नहीं हो सकती। माता-पिता किस पद पर कार्यरत हैं और उस पद का दर्जा क्या है, इस पर भी विचार करना आवश्यक है।' अदालत ने केंद्र सरकार को इन मानदंडों को छह महीने के भीतर लागू करने का आदेश दिया था।
हालांकि, केंद्र ने इस आदेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट से स्पष्टीकरण की मांग की थी। जस्टिस पी.एस.
नरसिम्हा और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने शुक्रवार को केंद्र की मांगों पर अपना फैसला सुनाया।
केंद्र सरकार ने आशंका जताई थी कि मार्च के फैसले का असर पहले हो चुकी भर्तियों, नियुक्तियों, पदोन्नति (प्रमोशन) और शैक्षणिक प्रवेशों पर पड़ेगा। इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि, "11 मार्च के फैसले के आधार पर, इससे पहले पूरी हो चुकी चयन प्रक्रियाओं और नियुक्तियों के मामलों पर यह मानदंड लागू नहीं होगा।
साथ ही, पिछली वरिष्ठता और पदोन्नति पर भी इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। लंबित मामलों का फैसला संबंधित अदालतें उनकी मेरिट के आधार पर करेंगी।"
केंद्र ने विभिन्न संस्थानों के पदों की सरकारी पदों से समानता तय कर एक समान मानदंड तैयार करने के लिए दो साल का समय मांगा था और यह भी मांग की थी कि यह फैसला केवल भविष्य की भर्ती प्रक्रियाओं पर लागू किया जाए।
पीठ ने इन दोनों ही मांगों को खारिज कर दिया। हालांकि, मूल फैसले को लागू करने के लिए अदालत ने केंद्र सरकार को आठ सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया है।
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