
संवाददाता अखिलेश विश्वकर्मा ✅ श्री बंशीधर नगर (गढ़वा): अनुमंडल मुख्यालय स्थित ऐतिहासिक राजा पहाड़ी शिव मंदिर में 30 जुलाई से शुरू होने वाले सावनी मेले की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं।
सावन माह के दौरान यहां झारखंड ही नहीं, बल्कि सीमावर्ती उत्तर प्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक और भगवान भोलेनाथ के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इस वर्ष भी लाखों श्रद्धालुओं के आने की संभावना जताई जा रही है।
करीब 100 वर्षों से अधिक समय से राजा पहाड़ी शिव मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है। श्रावण मास में यहां का धार्मिक वातावरण भक्तिमय हो उठता है और पूरा क्षेत्र ‘बोल बम’ के जयघोष से गूंजने लगता है।
मंदिर का गौरवशाली इतिहास
गोविंद कुमार पाठक पिता मुख्य पुजारी रामचन्द्र पाठक के अनुसार, पुरनानगर निवासी स्वर्गीय कन्हाई साव ने वर्ष 1917 में राजा पहाड़ी की चोटी पर भगवान रुद्र की स्थापना कर पूजा-अर्चना प्रारंभ की थी। समय के साथ यह स्थान श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया। वर्ष 1988 में शिवलिंग की स्थापना के साथ पुराने छोटे मंदिर के स्थान पर विशाल मंदिर निर्माण की आधारशिला रखी गई। इसके बाद वर्ष 2013 में नर्मदेश्वर शिवलिंग की स्थापना की गई। वर्तमान में यह मंदिर पूरे क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है, जहां हर वर्ष हजारों कांवरिये जलाभिषेक करने पहुंचते हैं।

मंदिर की एक विशेषता यह भी है कि शिव मंदिर के गर्भगृह के नीचे स्थित गुफा में मां दुर्गा का मंदिर है, जहां श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के बाद माता के दर्शन कर स्वयं को धन्य मानते हैं। मंदिर परिसर के सामने पहाड़ी पर हनुमान मंदिर तथा मार्ग में भगवान गणेश का मंदिर भी स्थित है। वहीं शिव मंदिर के ठीक सामने पूर्व दिशा की पहाड़ी पर माता पार्वती के मंदिर के निर्माण का प्रस्ताव भी है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए महिला एवं पुरुषों के लिए अलग-अलग सीढ़ियों की व्यवस्था की गई है।
मेले को लेकर व्यापक तैयारियां
श्रावणी मेले को लेकर मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन संयुक्त रूप से तैयारियों में जुटे हुए हैं। मंदिर परिसर की साफ-सफाई, रंग-रोगन, आकर्षक सजावट, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पहाड़ी मार्ग की मरम्मत, जलाभिषेक की सुचारु व्यवस्था तथा सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है।
प्रशासन और मंदिर समिति ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित व्यवस्था का पालन करते हुए शांतिपूर्ण एवं श्रद्धापूर्वक भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करें।



