भाई मध्य प्रदेश में और भतीजा बस्ती में गिरफ्तार, अब गांजा माफिया दुर्गेश तक कब पहुंचेगी पुलिस?

अजीत मिश्रा (खोजी)
भाई एमपी में, भतीजा बस्ती में गिरफ्तार—आखिर कब शिकंजे में आएगा गांजा माफिया दुर्गेश?
- दुर्गेश, सुभाष और दीपक का कई राज्यों में फैला हुआ है गांजा तस्करी का बड़ा नेटवर्क
- कप्तानगंज थाना क्षेत्र के रानीपुर निवासी राजेश चौधरी के कथित गांजा नेटवर्क और फोन से डीलिंग की चर्चा
- गांजा तस्करी पर एसओजी बस्ती (विकास यादव की टीम) की चुप्पी और मुखबिरी तंत्र पर खड़े हुए गंभीर सवाल
- एसपी बस्ती के कड़े निर्देशों के बाद हर्रैया-छावनी पुलिस ने 8 किलो गांजे के साथ तीन आरोपियों को किया गिरफ्तार
बस्ती न्यूज़ विशेष रिपोर्ट बस्ती जनपद में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ भले ही प्रशासनिक स्तर पर सख्ती के दावे किए जा रहे हों, लेकिन अंतर-राज्यीय गांजा तस्करों का जाल किस हद तक फैल चुका है, यह हालिया खुलासे साफ बयां कर रहे हैं। एक तरफ मध्य प्रदेश में हुई बड़ी कार्रवाई में गांजा माफिया दुर्गेश के सगे भाई को तीन कुंतल गांजा, पिस्तौल और वाहन के साथ गिरफ्तार किया गया है, वहीं बस्ती में उसके भतीजे की गिरफ्तारी ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अंतर-राज्यीय तस्करी का जाल और माफियाओं के हौसले
दुर्गेश, सुभाष और दीपक का यह गिरोह कई राज्यों में गांजा तस्करी का एक विशाल नेटवर्क संचालित कर रहा है। मध्य प्रदेश की कार्रवाई में दुर्गेश के भाई की गिरफ्तारी और बस्ती में उसके भतीजे के पकड़े जाने से यह जगजाहिर हो गया है कि इस अवैध धंधे के तार दूर-दूर तक जुड़े हैं। इसके बावजूद मुख्य सरगनाओं तक पुलिस की सुस्त पहुंच जांच के दायरे में है।
कप्तानगंज से हर्रैया तक सक्रिय है सिंडिकेट?
कप्तानगंज थाना क्षेत्र के रानीपुर निवासी राजेश चौधरी के कथित गांजा नेटवर्क की चर्चा जोरों पर है, जो फोन के माध्यम से डीलिंग कर बस्ती तक सप्लाई करने में संलिप्त बताया जा रहा है (हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है)।
हाल ही में हर्रैया-छावनी पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सनी (निवासी मधुघाट), सौरभ वर्मा (निवासी जगदोषपुर) और सुरेश (निवासी अजगरा बासगांव) को 8 किलो गांजे, दो मोटरसाइकिल, तीन मोबाइल फोन और अन्य दस्तावेजों के साथ दबोचा है।
इनमें से आरोपी सुरेश का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है, जिसे पहले ओडिशा पुलिस भी गांजा तस्करी के मामले में गिरफ्तार कर चुकी है।
एसओजी बस्ती की चुप्पी और मुखबिरी तंत्र पर गंभीर सवाल
- जब दूसरे राज्यों और स्थानीय स्तर पर इतना बड़ा नेटवर्क बेखौफ फल-फूल रहा है, तब एसओजी बस्ती (विकास यादव की टीम) और खुफिया तंत्र की खामोशी बेहद संदिग्ध है।
- आखिर तस्करों की गतिविधियों की भनक स्थानीय एसओजी को क्यों नहीं लग पा रही है? क्या जिले में निगरानी व्यवस्था कमजोर पड़ गई है या मुखबिरी तंत्र पूरी तरह फेल हो चुका है?
पुलिस प्रशासन का पक्ष और सख्त कार्रवाई का दावा
हर्रैया की क्षेत्राधिकारी स्वर्णिमा सिंह का कहना है कि पुलिस लगातार नेटवर्क को खंगाल रही है और अन्य जनपदों की पुलिस से समन्वय स्थापित कर कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। जांच में जो भी संलिप्त पाया जाएगा, उसके खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर कठोर कार्रवाई होगी। पुलिस के उच्चाधिकारियों के कड़े निर्देशों के बाद यह साफ कर दिया गया है कि नशे के कारोबार में शामिल किसी भी रसूखदार को बख्शा नहीं जाएगा।
्जब तक गांजा माफिया दुर्गेश और उसके मुख्य सहयोगियों तक पुलिस के हाथ नहीं पहुंचते, तब तक बस्ती को नशा मुक्त बनाने के दावे खोखले ही साबित होंगे। अब देखना यह है कि पुलिसिया कार्रवाई कब तक इन असली चेहरों को बेनकाब कर सलाखों के पीछे पहुंचाती है।
🔔 Vande Bharat News Alerts
नई प्रमुख खबरों की browser notification पाने के लिए Subscribe करें।






