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जबलपुर के रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय का 36वां दीक्षांत समारोह ।

22 Jun 2026, 09:59 AM • Vande Bharat Live TV News
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राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने दी बधाई, तो सीएम डॉ. यादव ने बताया छात्रों के लिए क्या-क्या कर रही सरकार

 

जबलपुर के रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय का 36वां दीक्षांत समारोह ।

राज्यपाल ने कहा पिछड़ों के विकास के लिए कई काम कर रही राज्य सरकार

 

सीएम डॉ. मोहन बोले- छात्रों को आगे बढ़ाने के कई अवसर दे रही प्रदेश सरकार

 

भोपाल/जबलपुर। ‘आपके ज्ञान, ऊर्जा और संकल्प से विकसित भारत का सपना साकार होगा। मैं आपसे आग्रह करती हूं कि शिक्षा और प्रतिभा का उपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए नहीं, बल्कि समाज के व्यापक कल्याण के लिए होना चाहिए। आप अपने आसपास के वंचित और ग्रामीणों की समस्याओं को समझें , उनकी समस्याओं का समाधान करें, उन्हें सशक्त बनाएं और विकास की मुख्य धारा से जोड़ने में अपनी भूमिका निभाएं। आप यहां से निकलकर बड़े अधिकारी बनेंगे, आपको कर्तव्यों के साथ बड़ी जिम्मेदारी निभानी है।’ यह बात देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कही। राष्ट्रपति मुर्मु 21 जून को जबलपुर के रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहीं थीं। कार्यक्रम में राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी उपस्थित थे। कार्यक्रम में 141 मेधावी विद्यार्थियों को 240 स्वर्ण पदक मिले। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने चयनित विद्यार्थियों को 20 स्वर्ण पदक प्रदान किए। साथ ही, समारोह में 182 शोधार्थियों को पीएचडी उपाधि प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त 3 विद्वानों को डी-लिट, एक को डीएससी और पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर को मानद उपाधि प्रदान की गई। इस असवर पर विभिन्न संकायों के विद्यार्थियों को स्नातक और स्नातकोत्तर उपाधियां भी प्रदान की गईं।

 

कार्यक्रम में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि आज रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के  अवसर पर आप सभी के बीच आकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। रानी दुर्गावती, जिनके नाम पर यह विश्वविद्यालय स्थापित है, वे अदम्य साहस, शौर्य और पराक्रम की प्रतिमूर्ति थीं। पिछले वर्ष गोंडवाना साम्राज्य की उस महान वीरांगना की  501वीं जन्म जयंती देशवासियों ने मनाई है। संयोग से आज से कुछ दिन बाद उनका 462वां बलिदान दिवस है। रानी दुर्गावती भारत की नारी शक्ति के शौर्य का प्रतीक हैं। वे नारी शक्ति के लिए सदैव प्रेरणा की स्रोत रहेंगीं। मैं उन्हें सादर नमन करती हूं। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि प्रकृति के मनोरम क्षेत्र में स्थित रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय की 36 वर्ष की यात्रा पर सभी को गर्व हो रहा होगा। इस विश्वविद्यालय के आसपास के क्षेत्र में जनजातीय वनवासिओं की संस्कृति की प्रचुर उपस्थिति है। इस विश्वविद्यालय से जुड़े रानी दुर्गावती के नाम की सार्थकता तभी सिद्ध होगी, जब जनजातीय समाज, वंचित तथा पिछड़े वर्ग की बेटियों की सशक्तिकरण  के लिए प्रयास होगा।

 

*जनजातीय समाज की चिंता करना जरूरी*

 

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि जनजातीय समाज स्वाभिमानी है। आज हम स्वाधीनता के 80वें साल की तरफ जा रहे हैं, लेकिन यह समाज वहीं का वहीं अपनी जगह पर खड़ा है। क्योंकि यह समाज अपना दुख-दर्द और परेशानी किसी को बताते नहीं हैं। आज कुछ महिलाएं, कुछ बेटियां, कुछ बेटे उच्च शिक्षित हो रहे हैं। लेकिन, समाज को छोड़कर अकेले चलना भी ठीक नहीं। क्योंकि, उसी समाज से हम यहां तक आए हैं। समाज के लिए चिंता करना हमारा कर्तव्य है। जो भी बेटे या बेटियां किसी भी पद पर रहें, उन्हें समाज का ध्यान रखना चाहिए। कुछ बेटे-बेटियां शहरों में रहते हैं, गांव नहीं जाते, वे समय निकालकर अपनों के बीच जाकर समाज के लोगों को मार्गदर्शन दें। यह समाज के लिए बड़ा उपहार होगा। यह समाज आर्थिक सहायता नहीं मांगता, क्योंकि सरकार उनके लिए बहुत कुछ कर रही है। लेकिन, समाज के कई लोगों को नहीं पता कि सरकारी सुविधा लेने के लिए कहां जाएं, इसलिए शिक्षित बेटे-बेटियों को उनका मार्गदर्शन करना चाहिए।  राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी कहा करते थे कि भारत एक जमीन का टुकड़ा नहीं है, वह जीता-जागता राष्ट्र पुरुष  है। मैं समझती हूं कि विसकित होने के लिए पूरे देश के गांवों का विकास होना जरूरी है। सर्वांगीण विकास तब होगा, जब सबसे पिछड़े व्यक्ति को आगे लाया जाएगा। इसी विकास के रास्ते विकसित भारत-2047 का सपना पूरा होगा।

 

*शिक्षा विकास का सबसे प्रभावी माध्यम*

 

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि शिक्षा ही विकास का सबसे प्रभावी माध्यम है। इसलिए जनजातीय समुदाए के शैक्षणिक विकास के लिए प्रयास करना बहुत महत्वपूर्ण है। मुझे बताया गया है कि इस विश्वविद्यालय में ग्रामीण एवं वंचित वर्ग के विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए विशेष योजना चलाई जा रही है। हम सबको मिलकर ये प्रयास करना चाहिए कि हमारे जनजातीय युवाओं को आधुनिक विकास में भागीदारी करने का अवसर मिले। साथ ही, उनकी जनजातीय पहचान और अस्मिता बनी रहनी चाहिए। अपनी पहचान, अपनी धरोहर, अपनी संस्कृति, अपनी परंपरा को भूलना नहीं चाहिए। जनजातीय समाज के लोगों के कौशल एवं ज्ञान को आधुनिक माध्यमों से प्रसारित करने की आवश्यकता है। इस संदर्भ में इस विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों को विशेष प्रयास करने चाहिए। जनजातीय ज्ञान एवं शिल्प परंपरा का व्यापक स्तर पर अध्ययन सभी देशवासियों के लिए लाभ दायक होगा। उच्च शिक्षण संस्थान शिक्षा के साथ-साथ नवाचार और अनुसंधान के प्रमुख केंद्र होते हैं। विद्यार्थियों में रचनात्मक सोच, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और उद्यमिता का विकास करना शिक्षण संस्थानों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। संस्थानों से ये अपेक्षा की जाती है कि विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति, परंपरा और भाषाओं के प्रति प्रेमभाव उत्पन्न करे। भारत विविधताओं का देश है। लोगों का खान-पान, रहन-सहन, पहनावा, भाषाएं, संस्कृति अलग-अलग है। यह सब अलग-अलग समाजों की पहचान है। उन्होंने कहा कि आधुनिकता और परंपरा के समन्वय से देश का संतुलित विकास संभव है।

 

*युवा देश में अदम्य साहस*

 

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि इस विश्वविद्यालय के शैक्षणिक ढांचे एवं पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा को समाहित करने की सराहनीय पहल की गई है। मुझे ज्ञात हुआ है कि यह विश्वविद्यालय वैदिक गणित और भारत के शैक्षणिक मूल्यों के प्रचार-प्रसार के लिए अन्य संस्थाओं के सहयोग के लिए प्रयासरत है। यहां नवाचार को प्रोत्साहित किया जा रहा है। मुझे बताया गया है कि यहां कार्यरत डिजाइन इनोवेशन सेंटर द्वारा पेटेंट भी प्राप्त किए गए हैं। दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। आज दीक्षांत समारोह में स्वर्ण पदक पाने वाली बेटियों की संख्या अधिक है। ये हमारी बेटियों के निरंतर आगे बढ़ने के संकल्प और देश के सर्वांगीण विकास का प्रतीक है। हमारा देश नवयुवकों का देश है। देश के 65 फीसदी नागरिक युवा हैं। इनमें कुछ भी करने का अदम्य साहस है। देश को इनसे बड़ी अपेक्षाएं हैं। ये अपेक्षाएं तभी पूरी होंगी जब युवाओं को योग्यता के अनुसार रोजगार मिले। राज्य और केंद्र सरकार इसके लिए प्रयासरत हैं।

 

*मूल्यों को बनाएं जीवन का आधार*

 

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, वंचित वर्गों का विकास, स्वच्छता, सामाजिक समरसता विषयों को अनुसंधान और अध्ययन में शामिल करने से समाज लाभांवित होता है। साथ ही, देश के विकास के लिए योजनाएं बनाने में सहायता मिलती है। हम सब की ऐसी सोच और ऐसे प्रयास होना चाहिए कि देश के सभी विश्वविद्यालय ज्ञान-विज्ञान एवं अनुसंधान के क्षेत्र में विश्व प्रसिद्ध हों। आज पूरा विश्व तेजी से बदल रहा है। हमारी भाषा, रहन-सहन, जीवनशैली, सब तेजी गति से बदल रहा है। लेकिन, हमें अपने मूल्यों को नहीं भूलना चाहिए। मेरा मानना है कि आप जैसे युवाओं को भारतीय संस्कृति के मूल्यों और आदर्शों को जीवन का आधार बनाना चाहिए। सत्य, अहिंसा, करुणा, सेवा और ईमानदारी जैसे मूल्य हमारी चेतना का हिस्सा हैं। इन मूल्यों को जीवन में अपनाकर आप कठिन परिस्थितियों का आसानी से सामना कर सकते हैं। आप आदर्श नागरिक बनकर राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। आप केवल परिवार या विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि नहीं है, बल्कि राष्ट्र की आकांक्षाओं और भविष्य के निर्माता हैं। आपके कंधों पर देश का भविष्य निर्भर है। वह सामर्थ्य और जोश आप में है। देश के लिए काम करना आपका कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि आज देश डिजिटल, प्रौद्योगिकी, स्टार्टअप, हरित ऊर्जा, अंतरक्षि अनुसंधान में नई ऊर्जाएं प्राप्त कर रहा है। आप इनका लाभ लीजिए, नवाचार कीजिए और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाएं। लेकिन, इसके साथ-साथ पर्यावरण के प्रति भी जिम्मेदारी निभाएं। मुझे विश्वास है कि आप जिम्मेदारियों को समझकर आगे बढ़ेंगे। मैं आपके उज्जवल भविष्य की कामना करती हूं।

 

*गरीब आदिवासियों के लिए काम करें छात्र*

 

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि दीक्षांत समारोह में पदक और डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थी विकसित भारत-2047 की नई शक्ति हैं। आज समय की पुकार है कि युवा डिग्रीधारी रानी दुर्गावती के लोक कल्याण की भावना से प्रेरणा लें और जनजातीय नायकों ने समाज के लिए अनेक कल्याण के कार्य किए हैं। हमें अब जनजातीय समाज के 5-5 गांवों को गोद लेना है। जनजातीय समाज के शिक्षित युवा इन गावों की परिस्थितियों को नजदीक से देखें और समाज के समग्र विकास के लिए कार्य करें। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में बैगा, भारिया और सहारिया जनजातीय आबादी 14 लाख से अधिक है। उनके लिए केंद्र सरकार ने 24 हजार करोड़ रुपए की पीएम जन-मन योजना प्रारंभ की है। देश के इतिहास में पहली बार अति पिछड़े जनजातीय समाज के लिए तीन साल में कई अच्छे काम हुए हैं। धरती आवा ग्राम विकास योजना में केंद्र सरकार ने 80 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। तहसील और गांव स्तर पर गरीब आदिवासियों को सरकार की योजना का लाभ मिले, इसके लिए विद्यार्थी काम करें। अपने समाज और राष्ट्र को कभी न भूलें। रानी दुर्गावती के जीवन से प्रेरणा लेकर हमें लोकतांत्रित मूल्यों, नारी सशक्तिकरण और विकसित भारत के लिए कार्य करना है। राष्ट्र की प्रगति में अपना श्रेष्ठ योगदान दें।

 

*छात्रों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है राज्य सरकार*

 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने 5 हजार साल पुरानी गौरवशाली गुरु परंपरा का अनुसरण करते हुए विश्वविद्यालयों के कुलपति के लिए कुलगुरु शब्द प्रयोग करना प्रारंभ किया है। हमारी ऋषि परंपरा में गुरु हमारे आश्रमों को गौरवान्वित करते रहे हैं। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के सभी युवा मित्र बधाई के पात्र हैं, जिन्हें आज दीक्षांत समारोह में स्वर्ण पदक और उपाधियां मिल रही हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेज गति से आगे बढ़ेगा। महाकौशल की रानी दुर्गावती ने मुगल सत्ता के काल में आदिवासी संस्कृति के गौरव की रक्षा के लिए अपनी क्षमता, बुद्धि और योग्यता के साथ अबकर के सामने 50 युद्ध लड़े। तोपों से लैस मुगल सेना के सामने रानी दुर्गावती के हाथी आगे नहीं बढ़ पाए। उन्होंने युद्ध की विपरीत परिस्थियों में अपने विश्वास पात्र सैनिक को आदेश दिया था। जीवित रहते हुए मुगल सैनिक उनके उनके पास न पहुंच पाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज राष्ट्रपति महोदय प्रदेश की युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहन प्रदान कर रही हैं। राज्य सरकार के प्रयासों से उच्च शिक्षा क्षेत्र में सकल पंजीयन दर 28.9 प्रतिशत हो गई है। स्कूल शिक्षा में भी ड्राप आउट दर शून्य हो चुकी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने तीन नए शासकीय विश्वविद्यालय खोलने का प्रयास किया है। छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए बेहतर अवसर मिलें, इसके लिए प्रयास जारी हैं। हमारे विश्वविद्यालयों में कृषि संकाय की पढ़ाई शुरू की गई है। हर प्रकार से युवाओं को कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण मिले, इसके लिए नए कोर्स शुरू किए गए हैं।

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