बस्ती में सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती: डिड़ौहा चौराहे पर लाखों की चोरी, सीसीटीवी साक्ष्य भी साथ ले उड़े शातिर।

अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती में ‘बेखौफ’ अपराध: मॉडल शॉप में चोरी, पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल
- बस्ती में सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती: डिड़ौहा चौराहे पर लाखों की चोरी, सीसीटीवी साक्ष्य भी साथ ले उड़े शातिर।
- बढ़ते अपराधों के बीच बस्ती: सीसीटीवी डीवीआर पार कर चोरों ने पुलिस के खुफिया तंत्र को दी मात।
- मॉडल शॉप में बड़ी वारदात: साक्ष्यों को मिटाकर भागे अपराधी, व्यापारियों में दहशत का माहौल।
बस्ती: क्या बस्ती पुलिस का खौफ अपराधियों के दिलों से पूरी तरह खत्म हो चुका है? यह सवाल डिड़ौहा चौराहे पर हुई उस सनसनीखेज चोरी के बाद हर नागरिक की जुबान पर है, जिसने शहर की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। रविवार रात शहर कोतवाली क्षेत्र में एक मॉडल शॉप को निशाना बनाकर अज्ञात चोरों ने जिस शातिराना अंदाज में लाखों की नकदी और सीसीटीवी का डीवीआर पार किया, वह पुलिस की गश्त व्यवस्था पर एक बड़ा तमाचा है।
साहस या पुलिस का ढीलापन?
हैरानी की बात यह नहीं कि चोरों ने ताला तोड़ा और लाखों रुपये उड़ा ले गए। असली चिंता का विषय यह है कि अपराधी इतने ‘निश्चिंत’ थे कि उन्होंने दुकान के भीतर बैठकर शराब के जाम छलकाए और इत्मीनान से अपनी वारदात को अंजाम दिया। यह स्पष्ट दर्शाता है कि उन्हें न तो किसी पुलिस गश्त का डर था और न ही पकड़े जाने का कोई खौफ। 3.51 लाख रुपये से अधिक की नकदी ले जाना कोई छोटी बात नहीं है, यह एक बड़ी साजिश और योजनाबद्ध तरीके से की गई सेंधमारी है।
सीसीटीवी ले उड़े, सबूत मिटाने में रहे सफल
चोरों द्वारा डीवीआर और हार्ड डिस्क साथ ले जाना यह साबित करता है कि वे पूरी तरह से तैयार थे। अपराधियों ने पुलिस को जांच के नाम पर अंधेरे में रखने के लिए तकनीकी सबूतों को ही मिटा दिया। क्या बस्ती के प्रमुख चौराहों पर पुलिस की निगरानी केवल कागजों तक सीमित है? यदि अपराधियों को मालूम था कि उन्हें कोई नहीं रोकेगा, तो यह स्थानीय खुफिया तंत्र की विफलता है।
बढ़ते अपराध, कब जागेगा प्रशासन?
एक व्यापारी अपनी मेहनत की कमाई से दुकान चलाता है, लेकिन सुरक्षा के अभाव में उसकी जमा-पूंजी चंद मिनटों में चोरी हो जाती है। पीड़ित अभिनव पाण्डेय ने प्राथमिकी तो दर्ज करा दी है, लेकिन सवाल यह है कि क्या पुलिस केवल तहरीर लेकर खानापूर्ति करेगी? आम जनता अब केवल ‘जांच जारी है’ जैसे घिसे-पिटे जुमलों से संतुष्ट होने वाली नहीं है।
बस्ती पुलिस के लिए यह मामला केवल एक और एफआईआर नहीं, बल्कि अपनी साख बचाने की चुनौती है। शहर के व्यापारियों में असुरक्षा का जो माहौल बना है, उसे दूर करने के लिए अपराधियों की शीघ्र गिरफ्तारी ही एकमात्र रास्ता है। अपराधियों का इस कदर बेखौफ होना कानून-व्यवस्था के लिए खतरे की घंटी है। प्रशासन को समय रहते चेत जाना चाहिए, वरना अपराध की यह आग कब किस दूसरे प्रतिष्ठान को अपनी चपेट में ले ले, कहना मुश्किल है।
अब देखना यह है कि पुलिस कब तक इस ‘अज्ञात’ को ‘ज्ञात’ कर सलाखों के पीछे भेजती है।
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