17 करोड़ की फोरलेन परियोजना में जलनिकासी की व्यवस्था पर उठे सवाल, बारिश में राहगीर और दुकानदार परेशान

अजीत मिश्रा (खोजी)
17 करोड़ की फोरलेन परियोजना: विकास के दावों के बीच बहता नरकीय जीवन
- बड़ैवन से कंपनीबाग तक बनी फोरलेन से सफर आसान हुआ, मगर जलनिकासी के लिए बनाए गए नाले चोक हैं, जिससे घरों से निकलने वाला गंदा पानी सड़क पर आकर जमा हो रहा है
महंगे विकास का कच्चा चिट्ठा: पानी-पानी हुई बड़ैवन-कंपनीबाग फोरलेन
बस्ती शहर में यातायात को सुगम बनाने के लिए 17 करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई कंपनीबाग-बड़ैवन फोरलेन आज विकास के दावों पर एक बड़ा सवालिया निशान बन गई है। तीन साल पहले जाम से मुक्ति और वाहनों की रफ्तार बढ़ाने के लिए शुरू की गई यह परियोजना आज राहगीरों, स्कूली बच्चों और दुकानदारों के लिए किसी अभिशाप से कम साबित नहीं हो रही है।
जलनिकासी की पोल खोलती बदहाली
- करोड़ों खर्च, पर हाल सिफर: 1.75 किलोमीटर लंबी इस सड़क और फोरलेन पर भारी-भरकम बजट खर्च किया गया, लेकिन बारिश के मौसम में जलनिकासी की जो पोल खुली है, उसने निर्माण एजेंसियों की कार्यशैली को बेनकाब कर दिया है।
- चोक नाले और सड़कों पर बहता गंदा पानी: सड़क किनारे बने नाले पूरी तरह चोक हो चुके हैं। नतीजा यह है कि बारिश और घरों से निकलने वाला गंदा पानी सड़क पर बह रहा है।
- क्षतिग्रस्त नालियाँ और जलभराव: स्थानीय लोगों और राहगीरों के अनुसार, निर्माण के दौरान कई नालियां टूट गईं और सड़क की तुलना में नालियों की ऊंचाई अधिक होने के कारण पानी का निकास पूरी तरह ठप हो गया है। कई जगहों पर ओवरफ्लो होकर पानी सड़कों पर जमा हो रहा है।
आम जनता का दर्द और अधिकारियों की उदासीनता
”सड़क बन चुकी है, आवागमन बहाल है। नालियां जहां चौक हैं, वहां कार्य कराया जा रहा है। जलनिकासी के लिए, होल भी किए जा रहे हैं। सड़क दबने की जानकारी नहीं है, संबंधित जेई से जांच रिपोर्ट ली जाएगी।”
— अवधेश कुमार, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी, निर्माण खंड-वन, बस्ती
अधिकारियों के कागजी आश्वासन अपनी जगह हैं, लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त यह है कि:
- पैदल चलना दूभर: आरबी, रामकिशन और राकेश जैसे स्थानीय निवासियों का कहना है कि सड़क और नाले पर बड़ा बजट खर्च करने के बावजूद जलनिकासी की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गई।
- बीमारियों का खतरा: सड़कों पर फैला गंदा पानी पैदल चलने वालों और स्कूली बच्चों के लिए गंभीर मुसीबत बन गया है। कटरा पानी टंकी के पास से लेकर विभिन्न स्थानों पर नारकीय स्थिति बनी हुई है।
जनता की मांग: लीपापोती नहीं, ठोस समाधान चाहिए
क्षेत्र के लोगों ने अब कड़ा रुख अख्तियार करते हुए मांग की है कि:
- चौक नालों की तुरंत सफाई हो और क्षतिग्रस्त नालियों की नए सिरे से मरम्मत कराई जाए।
- कृषि कार्यालय के सामने बने चोक नाले को तोड़कर उसे सुधारा जाए ताकि जलभराव से हमेशा के लिए मुक्ति मिल सके।
विकास के नाम पर जनता के गाढ़े पसीने की कमाई को इस तरह पानी में बहते देखना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। प्रशासन को चाहिए कि वह औपचारिकता निभाने के बजाय धरातल पर उतरकर इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान करे।
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