स्थगन का आदेश भी वे अशर

इश्तगन आदेश भी बेअसर? छह माह से फाइल थामे बैठे तहसीलदार, पूर्व पटवारी के परिवार की जमीन पर कब्जे के आरोप:
Hemant Singh Thakur
जुलाई
दबंगों ने जेसीबी से तोड़ी फेंसिंग, कार्रवाई की जगह बढ़ती रही खामोशी; जनसुनवाई पहुंचा मामला, कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देश
कटनी/विजयराघवगढ़। क्या राजस्व विभाग की सुस्ती दबंगों के हौसले बुलंद कर रही है? क्या न्यायालयीन आदेशों की अनदेखी कर भू-माफियाओं को अप्रत्यक्ष संरक्षण मिल रहा है? विजयराघवगढ़ तहसील के ग्राम इंदौर देवसरी से सामने आया एक मामला ऐसे कई सवाल खड़े कर रहा है।
आरोप है कि स्वर्गीय पूर्व पटवारी शिव कुमार मिश्रा के परिवार की भूमि पर कुछ लोगों ने रातों-रात जेसीबी मशीन से फेंसिंग तोड़कर गड्ढे कर दिए और कब्जे की कोशिश की। मामले की जांच के बाद हल्का पटवारी ने प्रतिवेदन प्रस्तुत किया, जिसके आधार पर दिसंबर 2025 में तत्कालीन तहसीलदार ने इश्तगन (स्थगन) आदेश जारी किया था।
हैरानी की बात यह बताई जा रही है कि इश्तगन आदेश लागू होने के बावजूद पिछले लगभग छह माह से प्रकरण लंबित है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि वर्तमान तहसीलदार राजेन्द्र श्रीवास्तव द्वारा मामले में अंतिम आदेश पारित नहीं किया जा रहा, जिससे विवाद का समाधान नहीं हो पा रहा और कथित कब्जाधारियों का मनोबल बढ़ रहा है।
सूत्रों का कहना है कि यदि समय रहते राजस्व विभाग ने प्रभावी कार्रवाई की होती, तो विवाद इतना लंबा नहीं खिंचता। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर किस कारण से एक स्पष्ट राजस्व विवाद महीनों से लंबित पड़ा है? क्या यह केवल प्रशासनिक लापरवाही है या फिर किसी प्रकार का दबाव अथवा प्रभाव भी काम कर रहा है? इन प्रश्नों का उत्तर निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।
मामले से परेशान होकर विद्या देवी मिश्रा एवं खसरे में दर्ज भूस्वामी शैलेन्द्र कुमार मिश्रा ने 28 जुलाई 2026 को कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी कटनी की जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत पर संज्ञान लेते हुए कलेक्टर ने एसडीएम विजयराघवगढ़ को त्वरित जांच एवं आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
अब यह मामला केवल एक भूमि विवाद नहीं, बल्कि राजस्व प्रशासन की कार्यशैली और जवाबदेही की भी परीक्षा बन गया है। यदि जांच में शिकायत सही पाई जाती है तो यह स्पष्ट होगा कि आदेश होने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय होगी।
जांच के घेरे में उठ रहे सवाल
1.इश्तगन आदेश के बावजूद अंतिम निर्णय छह माह से लंबित क्यों?
2.क्या आदेश का पालन सुनिश्चित करने में प्रशासन विफल रहा?
3.फेंसिंग तोड़ने और कथित अतिक्रमण के आरोपियों पर क्या कार्रवाई हुई?
4.क्या जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होगी?
5.कलेक्टर के निर्देशों के बाद क्या अब पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाएगा?
(नोट: समाचार शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों एवं उपलब्ध दस्तावेजों पर आधारित है। संबंधित पक्ष का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)
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