बस्ती: फोन पे से नाम तलाश कर ‘क्राइम ब्रांच’ के नाम पर ठगी करने वाले दो शातिर साइबर अपराधी गिरफ्तार

अजीत मिश्रा (खोजी)
फोन पे पर नाम तलाश कर ‘क्राइम ब्रांच’ के नाम पर ठगी करने वाले दो शातिर साइबर अपराधी गिरफ्तार
- बस्ती: ‘CY-VAJRA’ अभियान के तहत साइबर थाना पुलिस की बड़ी कार्रवाई, दो शातिर साइबर ठग दबोचे गए
- डर का खेल: 42 पन्नों की सीडीआर और फर्जी केस में फंसाने की धमकी देकर ठगी करने वाला गिरोह बेनकाब
- नायाब तरीका: फोन पे और गूगल पे से पहचान चुराकर वॉयस चेंजर के जरिए लगाते थे चूना, दो साल से थे सक्रिय
- बस्ती पुलिस की अपील: साइबर ठगी का शिकार होने पर तुरंत डायल करें 1930, सतर्क रहने की दी हिदायत
बस्ती, 8 सितंबर 2026। साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान ‘CY-VAJRA’ के तहत बस्ती जिले की साइबर क्राइम थाना पुलिस ने एक बड़े साइबर ठग गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने फोन पे और गूगल पे के जरिए मोबाइल नंबर से नाम-पता निकालकर लोगों को क्राइम ब्रांच का अधिकारी होने का झांसा देने और फर्जी मामलों में फंसाने की धमकी देकर ठगी करने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार अभियुक्तों की पहचान आदित्य गुप्ता (28) पुत्र निवासी दक्षिण दरवाजा, थाना पुरानी बस्ती, बस्ती (मूल निवासी- मस्कनवा बाजार, थाना छपिया, गोंडा) और अजय सिंह चौहान (24) निवासी कंचनपुर, थाना गुजैनी, कानपुर नगर (मूल निवासी- भौसाना, थाना चौबेपुर, कानपुर देहात) के रूप में हुई है। ठगी का नायाब और खौफनाक तरीका
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे ऑनलाइन पेमेंट ऐप्स का इस्तेमाल लोगों को फंसाने के लिए करते थे।
नाम की जानकारी: आरोपी फोन पे या गूगल पे पर किसी भी रैंडम मोबाइल नंबर को डालकर उससे जुड़े व्यक्ति का नाम और पहचान का पता लगाते थे। फर्जी धमकी: इसके बाद वे पीड़ित को फोन कर खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताते थे।
पीड़ित पर दबाव बनाने के लिए कहा जाता था कि उनके खिलाफ 42 पन्नों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) मिली है और वे अश्लील वीडियो देखने के मामले में फंस चुके हैं। वॉयस चेंजर का इस्तेमाल: गिरफ्तारी और कोर्ट-कचहरी के डर से पीड़ित जब घबरा जाते थे, तो आरोपी थाने स्तर पर मामला रफा-दफा करने के नाम पर 15 हजार रुपये या कोर्ट के जरिए मामला खत्म कराने के नाम पर चार लाख रुपये तक की मांग करते थे।
यदि पीड़ित के खाते में और पैसे होते थे, तो वे वॉयस चेंजर का उपयोग कर खुद को वरिष्ठ अधिकारी के रूप में पेश करते और मामला हाईलाइट होने का डर दिखाकर पूरा खाता खाली करने का प्रयास करते थे। दो साल से सक्रिय था सिंडिकेट
मुख्य आरोपी आदित्य गुप्ता ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वह पिछले दो वर्षों से इस अवैध धंधे में शामिल है।
वह अपने परिचितों के नाम पर फर्जी बैंक खाते और सिम कार्ड उपलब्ध कराता था। साइबर ठगी से आने वाली कुल रकम में से वह करीब 30 प्रतिशत हिस्सा अपने पास रखता था।
इस ठगी की रकम को एटीएम से निकालने के अलावा अन्य सहयोगियों के खातों में भी ट्रांसफर किया जाता था। हाल ही में अजय सिंह और उसके साथियों ने इसी प्रकार एक पीड़ित को गिरफ्तार करने का डर दिखाकर 11 हजार रुपये की ठगी की थी।
भारी मात्रा में बरामदगी
पुलिस ने दोनों आरोपियों के पास से आपत्तिजनक सामग्री और नकदी बरामद की है:
आदित्य गुप्ता के पास से: एक रियलमी मोबाइल फोन, एक चेकबुक, दो एटीएम कार्ड, पासबुक और 1,500 रुपये नकद। अजय सिंह के पास से: दो मल्टीमीडिया मोबाइल फोन, पांच सिम कार्ड, एक चेकबुक, एक पासबुक, दो एटीएम कार्ड और 2,500 रुपये नकद।
कानूनी कार्रवाई और पुलिस टीम
साइबर क्राइम थाना बस्ती में आरोपियों के खिलाफ मुकदमा अपराध संख्या 21/2026, धारा 319(2), 318(4), 308(2), 61(2), 317(2) बीएनएस तथा 66सी, 66डी आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। यह पूरी कार्रवाई पुलिस अधीक्षक बस्ती डॉ.
यशवीर सिंह के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक श्यामाकांत के पर्यवेक्षण और क्षेत्राधिकारी साइबर कुलदीप यादव के नेतृत्व में साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक विजय नारायण मिश्रा व उनकी टीम द्वारा की गई।
पुलिस की अपील
पुलिस अधीक्षक डॉ.यशवीर सिंह ने जनपदवासियों से अपील की है कि साइबर ठगों से सतर्क रहें। किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ ओटीपी, बैंक खाता विवरण या कोई भी गोपनीय जानकारी साझा न करें।
साइबर धोखाधड़ी का शिकार होने पर तुरंत राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। पुलिस का कहना है कि समय पर सूचना मिलने पर एफआईआर दर्ज होने के बाद भी ठगी गई धनराशि को वापस कराने की प्रक्रिया संभव होती है।
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