शहरी बाबू पत्रकारिता,गांव की खबर तो चाहिए मगर गांव का रिपोर्टर नही

'शहरी बाबू' पत्रकारिता: गांव की खबर तो चाहिए, मगर गांव का रिपोर्टर नहीं!
अलवर शहर के अधिकतर पत्रकार नही चाहते की कोई ग्रामीण क्षेत्र से भी राष्ट के चौथे स्तंभ का सिपाही बनकर अपने क्षेत्र की धरातलीय वास्तविकता को प्रकाशित करे आप को बता दें अलवर शहर और कठूमर इकाई के पत्रकारों को गांव की खबर तो चाहिए मगर कोई गांव का रहने वाला एक पत्रकार बने ये बात इनको खटकती है ये कोई बनावटी कहानी या किसी पर आरोप नही बल्कि वो धरातलीय सच्चाई है जिसकी किसी ग्रामीण किसान के बेटे ने पिछले दो तीन वर्षो में अपनी आंखो से देखा है आखिर क्या है इसके पीछे का राज अगर इसका खुलकर विश्लेषण किया जाए तो राष्ट के चौथे स्तंभ की ही हसीं होगी परंतु क्या ये सही है आज मीडिया जगत जर्जर हो रहा है अपने कर्तव्य पालन करने से डरता है भ्रष्टाचार और अपराधिक घटनाएं प्रकाशित करने और दिखाने से कतराता है आखिर क्यों,क्योंकि अधिकतर पत्रकार अपना वास्तविक स्वरूप भूल गए हैं या यूं कहें उनको पत्रकारिता के दायित्व और मायने का प्रशिक्षण दिया ही नहीं जाता पत्रकारों को आज किसी बात का प्रशिक्षण दिया जाता हैं तो वो है एक दूसरे से अपने आप को श्रेष्ठ दिखाने का एक दूसरे से इर्ष्या रखने का एक जिसका परिणाम सबके सामने है आज कोई भी राष्ट के चौथे स्तंभ को अपमानित कर देता है कोई भी हाथापाई कर देता है और यहां तक कि हत्या तक कर दी जाती है और हमारे पत्रकार बंधु झूठी तस्स्ली दिखाने के लिए ज्ञापन देंगे दिखावटी और बनावटी आक्रोश प्रदर्शन करेगे परंतु मजाल है कि भ्रष्टाचार और अपराध एवम पत्रकार सुरक्षा को लेकर एक जुट हो जाए और सबसे बड़ा खतरा तो शहरी बाबू पत्रकारों को किसी ग्रामीण क्षेत्र से पत्रकारिता में प्रवेश करने से लगता हैं जैसे शास्त्रों में वर्णित हैं ना कोई भी व्यक्ति चाहे किसी भी बात के लिए तपस्या करे देवराज इंद्र को यही डर सताता रहता हैं कि कहीं ये मेरा सिंहासन ना छीन ले और उसकी तपस्या भंग करने में हर संभव प्रयास करता है अपको बता दें यही डर अलवर के जिले शहरी बाबू पत्रकारों को सता रहा है अगर कोई ग्रामीण पत्रकार बनने के नाम पर अलवर पी आर ओ पहुंच जाए तो शहरी पत्रकारों की धड़कने तेज हो जाती है, आपको बता दें शहरी पत्रकारों को गांव की एक्सक्लूजिव खबर तो चाहिए गांव के किसान की स्टोरी तो चाहिए परंतु गांव का पत्रकार ना बाबा ना हमारा तो इंद्र पद ही संकट में आ जायेगा ,और यही संकीर्ण मानसिकता और घिनौनी सोच आज राष्ट के चौथे स्तंभ को जर्जर बना रही है जिसका वास्तविक कारण है अच्छे संस्कार और संगति एवम सही प्रशिक्षण का अभाव ,, जय हिन्द
🔔 Vande Bharat News Alerts
नई प्रमुख खबरों की browser notification पाने के लिए Subscribe करें।






