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विशेष कानूनी खुलासा | मिशनरी संपत्तियों के विवाद में FIR का बड़ा रिकॉर्ड सामने! जॉन ऑगस्टाइन उर्फ विनोद कुमार और सपना चटर्जी के खिलाफ मुकदमों की लंबी फेहरिस्त

23 Sep 2026, 01:11 PM • Vande Bharat Live TV News
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विशेष कानूनी खुलासा | मिशनरी संपत्तियों के विवाद में FIR का बड़ा रिकॉर्ड सामने! जॉन ऑगस्टाइन उर्फ विनोद कुमार और सपना चटर्जी के खिलाफ मुकदमों की लंबी फेहरिस्त - SAHARANPUR, उत्तर प्रदेश

# 🚨⚖️ विशेष कानूनी खुलासा | मिशनरी संपत्तियों के विवाद में FIR का बड़ा रिकॉर्ड सामने! जॉन ऑगस्टाइन उर्फ विनोद कुमार और सपना चटर्जी के खिलाफ मुकदमों की लंबी फेहरिस्त

विशेष कानूनी खुलासा | मिशनरी संपत्तियों के विवाद में FIR का बड़ा रिकॉर्ड सामने! जॉन ऑगस्टाइन उर्फ विनोद कुमार और सपना चटर्जी के खिलाफ मुकदमों की लंबी फेहरिस्त - SAHARANPUR, उत्तर प्रदेश

## गोंडा की FIR में कूटरचना, धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज, कथित वित्तीय अनियमितताओं और धमकी के गंभीर आरोप — 13 पुराने आपराधिक मामलों का भी शिकायत में उल्लेख; LDTA विवाद और NCLT के हालिया आदेश से जुड़ते सवाल

**गोंडा/लखनऊ/नई दिल्ली।** एंग्लिकन चर्च ऑफ इंडिया यानी **Church of India, Pakistan, Burma and Ceylon (CIPBC)** तथा उससे संबद्ध **Lucknow Diocesan Trust Association (LDTA)** की संपत्तियों, संस्थागत नियंत्रण और दस्तावेजों को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद के बीच गोंडा से सामने आया एक पुराना आपराधिक मुकदमा अब चर्चा के केंद्र में है। उपलब्ध कराए गए FIR विवरण और शिकायत में लगाए गए आरोपों के अनुसार, थाना कोतवाली नगर, गोंडा में **मुकदमा अपराध संख्या 0801/2016** दर्ज किया गया था। इसमें **विनोद कुमार उर्फ जॉन ऑगस्टाइन और सपना चटर्जी** को नामजद किया गया था।

FIR में भारतीय दंड संहिता की **धारा 420, 467, 468, 471 और 506** के तहत कार्रवाई का उल्लेख है। मामला न्यायालय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, गोंडा के समक्ष धारा 156(3) CrPC के तहत दिए गए प्रार्थना पत्र के बाद FIR दर्ज किए जाने से जुड़ा बताया गया है। शिकायतकर्ता के रूप में **मधुलिका जोयस** का नाम सामने आता है। हालांकि, FIR में लगाए गए आरोप अपने आप में दोषसिद्धि नहीं हैं और आरोपों की अंतिम सत्यता न्यायिक प्रक्रिया तथा जांच के परिणाम से निर्धारित होती है।

## 🔴 आखिर क्या है पूरा विवाद?

शिकायत के अनुसार विवाद की जड़ चर्च संस्था, उसके पदाधिकारियों और उससे जुड़ी संपत्तियों के अधिकार एवं प्रबंधन से संबंधित है। शिकायत में दावा किया गया कि **जॉन ऑगस्टाइन को वर्ष 1991 में तत्कालीन बिशप एस.पी. प्रकाश द्वारा पादरी नियुक्त किया गया था**, लेकिन बाद में कथित गतिविधियों को लेकर उन्हें संस्था से निष्कासित किए जाने और सदस्यता समाप्त किए जाने की बात कही गई।

इसके बाद शिकायत में आरोप लगाया गया कि वर्ष **1997 में ‘Church of India Anglican’ नाम से एक अलग सोसाइटी का पंजीकरण** कराया गया, जिसके नाम और स्वरूप को लेकर मूल चर्च संस्था की ओर से आपत्ति जताई गई।

यहां से विवाद केवल धार्मिक या संस्थागत मतभेद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिकायत के अनुसार चर्च के नाम, लेटरपैड, पदाधिकारियों और संपत्तियों से संबंधित दस्तावेजों के इस्तेमाल को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए।

## 📄 फर्जी लेटरपैड और हस्ताक्षर के आरोप

मधुलिका जोयस की ओर से दिए गए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया कि **’The Church of India (Anglican) CIPBC Diocese of Lucknow’** के नाम से ऐसे लेटरपैड तैयार किए गए जिनका इस्तेमाल संस्था की ओर से दस्तावेज तैयार करने के लिए किया गया।

शिकायत में बिशप सैमुअल पी. प्रकाश के कथित रूप से फर्जी हस्ताक्षर/हस्ताक्षर की प्रतिकृति इस्तेमाल कर आदेश, प्रस्ताव और अन्य दस्तावेज तैयार करने के आरोप भी लगाए गए। इन्हीं कथित दस्तावेजों के आधार पर मिशनरी संपत्तियों, जमीनों और अन्य परिसंपत्तियों के संबंध में पट्टे या बिक्री जैसे लेनदेन किए जाने तथा आर्थिक लाभ हासिल करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

हालांकि, इन दस्तावेजों की वास्तविकता, हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता और कथित लेनदेन की वैधानिक स्थिति का अंतिम निर्धारण संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया का विषय है।

## 💰 करोड़ों रुपये के कथित वित्तीय लेनदेन का मामला

शिकायत में संस्था के नाम पर कथित रूप से बैंक खाते खोले जाने और उनसे करोड़ों रुपये के वित्तीय लेनदेन तथा गबन के आरोप भी लगाए गए हैं। यदि इन आरोपों की जांच में पुष्टि होती है तो मामला केवल दस्तावेजी विवाद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वित्तीय अपराध के पहलू भी सामने आ सकते हैं।

यही कारण है कि चर्च से जुड़ी संपत्तियों, बैंक खातों, ट्रस्ट रिकॉर्ड, पुराने प्रस्तावों, पट्टों और बिक्री दस्तावेजों की वैधता इस पूरे विवाद में महत्वपूर्ण हो जाती है।

## ⚖️ अदालतों में चल रहे मुकदमों में हस्तक्षेप का आरोप

शिकायत में गोंडा की अदालतों में लंबित कुछ पुराने दीवानी मामलों का भी उल्लेख किया गया है। आरोप लगाया गया कि जॉन ऑगस्टाइन ने स्वयं को संस्था का चेयरमैन/बिशप बताते हुए इन मामलों में हस्तक्षेप करने और मुकदमों की पैरवी प्रभावित करने का प्रयास किया।

शिकायत के अनुसार, संबंधित मामलों में **वाद संख्या 271/2009** तथा **वाद संख्या 95/2002** का उल्लेख किया गया है। इन मामलों में संस्थागत अधिकार और चर्च संपत्तियों से जुड़े विवादों की पृष्ठभूमि होने का दावा किया गया है।

## 🚨 दीवानी चौराहे की घटना और कथित धमकी

गोंडा FIR के पीछे तत्कालीन घटना के रूप में **24 अगस्त 2016** का उल्लेख किया गया है। शिकायत के अनुसार मधुलिका जोयस मुकदमों की पैरवी के सिलसिले में गोंडा आई थीं। आरोप है कि शाम करीब चार बजे सिविल लाइंस चौकी क्षेत्र के दीवानी चौराहे के पास उन्हें कथित तौर पर रोका गया, सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया और मुकदमों की पैरवी न करने की चेतावनी देते हुए जान से मारने की धमकी दी गई।

शिकायतकर्ता का कहना था कि पुलिस स्तर पर तत्काल अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के बाद उन्होंने न्यायालय का रुख किया और धारा 156(3) CrPC के तहत आदेश प्राप्त करने के बाद FIR दर्ज हुई।

## 📂 सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा—13 पुराने मुकदमों का उल्लेख

गोंडा FIR में शिकायत के एक हिस्से में जॉन ऑगस्टाइन उर्फ विनोद कुमार के खिलाफ विभिन्न राज्यों में दर्ज बताए गए **13 पुराने आपराधिक मामलों** का उल्लेख किया गया है। इन मामलों में धोखाधड़ी, कूटरचना, आपराधिक षड्यंत्र, धमकी, बलवा, सरकारी कार्य में बाधा और अन्य धाराओं का उल्लेख है।

इनमें गोंडा का मुकदमा अपराध संख्या **103/2007**, लखनऊ तालकटोरा के **316/2003 और 317/2003**, तालकटोरा का **06/2001**, वजीरगंज लखनऊ का **124/2008**, हजरतगंज के **1108/1998 और 2289/2005**, तथा **77/2004** जैसे मामले शामिल बताए गए हैं।

इसके अतिरिक्त नई दिल्ली के सिविल लाइंस थाना क्षेत्र का **90/2007**, EOW वसंत विहार का **34/2012**, पंजाब के तरनतारन का **63/2007**, देहरादून के डालनवाला थाने का **139/2005** और हरियाणा के पलवल थाने का **246/2006** भी शिकायत में सूचीबद्ध बताए गए हैं।

इन सभी मामलों का उल्लेख FIR/शिकायत में होना यह दिखाता है कि शिकायतकर्ता ने आरोपी के कथित पूर्व आपराधिक मामलों को भी न्यायालय के समक्ष रखा था। लेकिन किसी मुकदमे में FIR दर्ज होना, आरोपी होना या मुकदमा लंबित होना अपने आप में दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है। प्रत्येक मामले का वर्तमान कानूनी स्टेटस—जांच, चार्जशीट, ट्रायल, बरी, दोषसिद्धि या अन्य न्यायिक आदेश—अलग से सत्यापित किया जाना आवश्यक है।

## 🔎 धार्मिक पद बनाम कानूनी अधिकार—विवाद का अहम सवाल

इस पूरे मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू धार्मिक पदों और कानूनी अधिकारों के बीच दिखाई देने वाला विवाद है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि विभिन्न धार्मिक पदों, ऑर्डिनेशन, एंथ्रोनमेंट और चर्च संबंधी दस्तावेजों का इस्तेमाल संस्थागत अधिकार जताने के लिए किया गया।

यहीं सवाल उठता है कि किसी व्यक्ति के धार्मिक पद का दावा और किसी ट्रस्ट, कंपनी या संस्था की संपत्ति पर कानूनी अधिकार—क्या दोनों एक ही चीज हैं?

कानूनी तौर पर संपत्ति के अधिकार का निर्धारण केवल धार्मिक पद या किसी लेटरपैड से नहीं, बल्कि पंजीकृत दस्तावेजों, कंपनी/ट्रस्ट रिकॉर्ड, राजस्व अभिलेख, वैध प्रस्तावों, न्यायालय के आदेशों और लागू कानून के आधार पर होता है।

## 🏛️ LDTA विवाद और NCLT का नया अध्याय

मामले की अहम कड़ी **Lucknow Diocesan Trust Association (LDTA)** से जुड़े मौजूदा कॉरपोरेट विवाद तक पहुंचती है। हालिया NCLT कार्यवाही में **CP No. 142/ALD/2017** और **IA No. 113/ALD/2026** से जुड़े विवादों में संस्था के प्रबंधन, संपत्तियों और प्रतिद्वंद्वी गुटों के अधिकारों पर गंभीर प्रश्न उठे हैं।

हालिया आदेश के अनुसार पूर्व उत्तराखंड हाईकोर्ट न्यायाधीश **जस्टिस लोकपाल सिंह** को स्वतंत्र प्रशासक नियुक्त किए जाने, प्रतिद्वंद्वी बोर्डों की शक्तियों को निलंबित किए जाने और संस्था की संपत्तियों की बिक्री/हस्तांतरण/बंधक आदि पर NCLT की अनुमति के बिना रोक लगाए जाने की बात सामने आई है।

इसका अर्थ यह नहीं है कि गोंडा FIR में लगाए गए सभी आरोप NCLT के आदेश से सिद्ध हो गए हैं। दोनों कार्यवाहियां अपने-अपने कानूनी प्रश्नों से संबंधित हैं। लेकिन दोनों मामलों में संस्था के प्रशासन, दस्तावेजों और संपत्तियों को लेकर चल रहे लंबे विवाद की पृष्ठभूमि अवश्य सामने आती है।

## 📌 मधुलिका जोयस की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण?

इस पूरे प्रकरण में **मधुलिका जोयस** का नाम शिकायतकर्ता के रूप में सामने आता है। उपलब्ध विवरण के अनुसार उन्होंने गोंडा प्रकरण में न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और कथित धमकी, दस्तावेजों तथा संस्था से जुड़े विवादों को रिकॉर्ड पर रखा।

LDTA के वर्तमान विवाद में भी मधुलिका जॉयस खन्ना की भूमिका का उल्लेख सामने आया है। इसलिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभिन्न मुकदमों में उनकी भूमिका किस क्षमता में रही, उनके द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों का न्यायालयों ने किस सीमा तक परीक्षण किया और संबंधित मामलों में आगे क्या न्यायिक निष्कर्ष सामने आते हैं।

## 🧾 अब सबसे बड़े सवाल

क्या 2016 की गोंडा FIR में लगाए गए आरोपों की जांच का अंतिम परिणाम क्या रहा?

13 पुराने मुकदमों में से कितने मामलों में चार्जशीट दाखिल हुई?

कितने मामलों में ट्रायल चला और वर्तमान स्थिति क्या है?

जिन दस्तावेजों को शिकायत में कथित रूप से कूटरचित बताया गया, उनकी फोरेंसिक अथवा न्यायिक जांच हुई या नहीं?

मिशनरी संपत्तियों से जुड़े कथित पट्टों और बिक्री दस्तावेजों की वर्तमान कानूनी स्थिति क्या है?

और सबसे महत्वपूर्ण—**LDTA की संपत्तियों और प्रशासन को लेकर NCLT के हालिया आदेश के बाद इस पुराने आपराधिक रिकॉर्ड का कानूनी प्रभाव क्या होगा?**

इन सवालों के जवाब संबंधित अदालतों के आदेशों, पुलिस की विवेचना, कंपनी/ट्रस्ट रिकॉर्ड और संपत्ति से जुड़े मूल दस्तावेजों की विस्तृत जांच से ही सामने आएंगे।

### ⚠️ कानूनी स्थिति स्पष्ट

इस रिपोर्ट में वर्णित आपराधिक आरोप मुख्यतः उपलब्ध कराए गए FIR/शिकायत विवरण पर आधारित हैं। **FIR में किसी व्यक्ति का नाम होना दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है।** 13 पुराने मामलों में भी प्रत्येक मुकदमे का अलग-अलग वर्तमान स्टेटस महत्वपूर्ण है। संबंधित पक्षों का पक्ष, जांच रिपोर्ट, चार्जशीट और न्यायालयों के अंतिम आदेश उपलब्ध होने पर ही पूरे मामले की अंतिम कानूनी तस्वीर स्पष्ट होगी।

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**✍️ विशेष रिपोर्ट: एलिक सिंह**
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