पुलिस कार्रवाई का विरोध,बेटे की कार से युवक के घायल होने के बाद बीच सड़क पर बैठे पार्षद, पुलिस ने हटाकर कार थाने पहुंचाई

सागर।वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज रिपोर्टर सुशील द्विवेदी 8225072664 * बीना सर्वोदय चौराहे पर एक युवक के वाहन की चपेट में आने के बाद हुए घटनाक्रम ने पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों के सार्वजनिक आचरण को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए। घटना के बाद पुलिस जब संबंधित कार को थाने ले जाने की कार्रवाई कर रही थी, तभी भाजपा से जुड़े और बीना नगर पालिका परिषद के नामनिर्देशित पार्षद रमेश जड़िया बीच सड़क पर बैठकर पुलिस कार्रवाई का विरोध करने लगे।
इससे मौके पर कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हुआ। जानकारी के अनुसार रमेश जड़िया के बेटे आनंद जड़िया की बुलेरो से एक युवक को टक्कर लगी, जिसमें युवक घायल हो गया।
सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच करते हुए वाहन को थाने ले जाने की कार्रवाई शुरू की। इसी दौरान रमेश जड़िया सड़क पर बैठ गए और पुलिस की कार्रवाई का विरोध करने लगे।
मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उन्हें सड़क से हटाया, जिसके बाद वाहन को थाने ले जाया गया। मामले में पुलिस ने वाहन चालक आनंद जड़िया के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है।
पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की रही कि एक जनप्रतिनिधि होने के नाते क्या रमेश जड़िया को पुलिस कार्रवाई के विरोध में बीच सड़क पर बैठना चाहिए था? बेटे के साथ किसी घटना के बाद पिता का चिंतित होना स्वाभाविक है, लेकिन जनप्रतिनिधि की भूमिका में व्यक्ति से सार्वजनिक स्थान पर अधिक संयम और जिम्मेदारी की अपेक्षा की जाती है।
ऐसी स्थिति में सड़क पर बैठने के बजाय पुलिस अधिकारियों से बातचीत कर अपनी बात रखना एक दूसरा रास्ता हो सकता था,यदि यही स्थिति किसी आम नागरिक के सामने आती तो उससे कानून-व्यवस्था बनाए रखने और पुलिस के साथ सहयोग करने की अपेक्षा की जाती। ऐसे में जनप्रतिनिधि के रूप में भी इसी तरह का संयमित व्यवहार अपेक्षित माना जाता है।
घटना का एक पक्ष यह भी है कि रमेश जड़िया अपने बेटे के पक्ष में मौके पर पहुंचे होंगे, लेकिन सार्वजनिक पद पर होने के कारण उनके व्यवहार को केवल पारिवारिक मामले के रूप में नहीं देखा गया। सड़क पर बैठने से यातायात प्रभावित हुआ और पुलिस को उन्हें वहां से हटाना पड़ा।
अब चर्चा इस बात की है कि ऐसी परिस्थितियों में जनप्रतिनिधि को अपने परिवार के सदस्य के साथ खड़े होने और अपनी सार्वजनिक जिम्मेदारी निभाने के बीच किस तरह संतुलन बनाना चाहिए,घटना ने यह सवाल जरूर सामने ला दिया है कि जनप्रतिनिधि भी आम नागरिक की तरह कानून के दायरे में होते हैं, लेकिन उनके सार्वजनिक आचरण से लोगों के बीच एक संदेश भी जाता है। फिलहाल पुलिस की कार्रवाई और दर्ज प्रकरण आगे की कानूनी प्रक्रिया के अधीन है।
घटना के सभी तथ्यों और दोनों पक्षों का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट होगी।
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