एसपी कार्यालय के सामने पार्किंग की व्यवस्था नहीं, फरियादियों को हो रही परेशानी

अजीत मिश्रा (खोजी)
न्याय मार्ग पर ‘वन-वे’ का फरमान और पार्किंग का अकाल: न्याय की आस में पिसते फरियादी!
- एसपी ऑफिस के आसपास वाहन खड़ा करने पर चालान का खतरा, दूर-दराज से आने वाले लोग परेशान
- विकास भवन से दीवानी न्यायालय के बीच सैकड़ों मोटरसाइकिलें चोरी, फिर भी पार्किंग का इंतजाम नहीं
बस्ती में न्याय मार्ग पर आए दिन लगने वाले जाम से निजात पाने के लिए पुलिस प्रशासन ने वन-वे व्यवस्था लागू कर दी है। इसके तहत पानी की टंकी की ओर से चार पहिया वाहनों के न्याय मार्ग पर प्रवेश पर रोक लगा दी गई है, और कचहरी, पुलिस कार्यालय तथा विकास भवन जाने वाले वाहनों को पकौड़ी चौराहे से प्रवेश करने का निर्देश दिया गया है। पानी की टंकी मार्ग पर पुलिस व यातायात टीम तैनात है तथा सीओ यातायात कुलदीप यादव ने खुद मौके पर पहुंचकर इस व्यवस्था का जायजा लिया है। कागजों और बयानों में यह कदम भले ही ट्रैफिक सुधारने का प्रयास लगे, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत और प्रशासनिक दावों की पोल खोलने वाली है।
न्याय के मंदिर के बाहर ही पार्किंग का नामो-निशान नहीं!
एक तरफ प्रशासन मार्ग को सुगम बनाने के लिए नए रूट थोप रहा है, वहीं एसपी कार्यालय के सामने पार्किंग की कोई व्यवस्था न होने के कारण दूर-दराज से अपनी फरियाद लेकर आने वाले आगंतुकों और फरियादियों की मुसीबतें दोगुनी हो गई हैं। हालात यह हैं कि पुलिस अधीक्षक कार्यालय परिसर के आसपास करीब 100 मीटर के दायरे में वाहन खड़े करने की अनुमति नहीं दी जाती है, और यदि कोई मजबूर होकर वाहन खड़ा करे, तो ट्रैफिक पुलिस द्वारा उसका चालान काट दिया जाता है।
चोरी का खौफ और चालान की दोहरी मार
फरियादियों का दर्द और आक्रोश पूरी तरह जायज है। जब लोग न्याय की गुहार लगाने एसपी ऑफिस या कचहरी पहुंचते हैं, तो उन्हें वाहन खड़े करने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। हैरत की बात यह है कि उत्तर तरफ विकास भवन से लेकर दक्षिण तरफ दीवानी न्यायालय तक के इस व्यस्त क्षेत्र में बीते दिनों सैकड़ों मोटरसाइकिलें चोरी हो चुकी हैं, इसके बावजूद जिला प्रशासन द्वारा पार्किंग की कोई भी वैकल्पिक व्यवस्था नहीं कराई गई है।
एक तीखा सवाल
आखिर कब तक जिला प्रशासन और पुलिस विभाग अपनी आंखें मूंदे रहेगा? ‘वन-वे’ का यह प्रशासनिक फरमान तब तक एक छलावा मात्र है, जब तक न्याय मार्ग और एसपी कार्यालय आने वाले आम नागरिकों व फरियादियों के लिए सुरक्षित पार्किंग की मुकम्मल व्यवस्था नहीं की जाती। केवल रास्तों की बैरिकेडिंग बदलने से जनता की समस्याएं हल नहीं होंगी, इसके लिए जमीनी स्तर पर ठोस बुनियादी इंतजाम करने की सख्त जरूरत है।
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