बस्ती: परमिशन 10 की, काट डाले 45 बेशकीमती सागौन; विभागीय सह पर फल-फूल रहा लकड़ी माफियाओं का साम्राज्य!

अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती में वन विभाग की सह पर ‘हरा सोना’ साफ: परमिशन 10 की, और काट डाले 45 बेशकीमती सागौन!
- सोनहा में ‘हरा सोना’ साफ: रेंजर की सरपरस्ती में डीएफओ की आंखों में धूल झोंककर चल रहा अवैध कटान का खेल।
- कागजों में 10, मैदान में 45: बस्ती वन विभाग के संरक्षण में धड़ल्ले से उजड़ रहे हैं जंगल!
- डीएफओ अनजान, रेंजर मेहरबान: बस्ती में लकड़ी माफियाओं ने उड़ाई नियमों की धज्जियां, अमरौली शुमाली का मामला।
- बस्ती में वन विभाग और लकड़ी माफिया की खौफनाक जुगलबंदी: परमिशन से चार गुना अधिक सागौन के पेड़ सफाचट!
बस्ती: जिले में वन विभाग और लकड़ी माफियाओं का गठजोड़ अब इस हद तक बेखौफ हो चुका है कि पर्यावरण, कानून और नियमों की धज्जियां सरेआम उड़ाई जा रही हैं। सोनहा थाना क्षेत्र के अमरौली शुमाली मधुबन से सामने आया ताजा मामला इस बात का जीता-जागता प्रमाण है कि कैसे विभागीय सरपरस्ती में हरे-भरे पेड़ों का कत्ल खुलेआम किया जा रहा है।

इस अवैध खेल के मुख्य बिंदु:
- कागजों में हेरफेर, मैदान में तांडव: विभाग से महज 10 पेड़ों को काटने की अनुमति ली गई थी, लेकिन लकड़ी माफियाओं ने बेखौफ होकर नियमों को ताक पर रखते हुए 45 बेशकीमती सागौन के पेड़ों पर आरी चला दी।
- रेंजर की सीधी सरपरस्ती: इस पूरे खेल के केंद्र में स्थानीय विभागीय रेंजर की संदिग्ध भूमिका और संरक्षण साफ नजर आ रहा है, जिनकी छत्रछाया में माफियाओं के हौसले बुलंद हैं।
- डीएफओ को अंधेरे में रखना: जिला मुख्यालय पर बैठे उच्चाधिकारियों और डीएफओ की आंखों में धूल झोंककर स्थानीय कर्मचारी कागजी खानापूर्ति कर रहे हैं और उच्चाधिकारियों को पूरी तरह गुमराह किया जा रहा है।
- जिले भर में चल रहा सिंडिकेट: यह कोई इकलौता मामला नहीं है। बस्ती जिले के लगभग सभी क्षेत्रों में स्थानीय रेंजर्स और कर्मचारियों की मिलीभगत से यही अवैध खेल चल रहा है।
पर्यावरण और राजस्व को खुली चुनौती
जितने पेड़ों की परमिशन दी जाती है, उससे कई गुना अधिक पेड़ धड़ल्ले से काट लेना अब जिले के वन विभाग की कार्यशैली बन चुकी है। लकड़ी माफिया और भ्रष्ट कर्मचारियों की इस जुगलबंदी से न सिर्फ सरकारी राजस्व को भारी चूना लग रहा है, बल्कि क्षेत्र का पर्यावरण संतुलन भी खतरे में पड़ रहा है।
निष्कर्ष:
यदि जिला प्रशासन और वन विभाग के उच्चाधिकारी इस मामले में तत्काल संज्ञान लेते हुए दोषी रेंजर और लकड़ी माफियाओं पर कठोर कार्रवाई नहीं करते हैं, तो बस्ती के जंगलों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। यह मामला सिर्फ अवैध कटान का नहीं, बल्कि विभागीय भ्रष्टाचार और प्रशासनिक विफलता का एक स्याह सच है।
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