खाकी की छांव में जुए का काला कारोबार: महसों में लाखों की बाजी, चौकी प्रभारी सस्पेंड

अजीत मिश्रा (खोजी)
खाकी की छांव में जुए का काला कारोबार: महसों कांड से बेनकाब होती पुलिसिया कार्यशैली
- एक लाख का ‘मासिक चढ़ावा’ और लाखों का जुआ: लालगंज थाने के खेल से उठा पर्दा
- सिर्फ एक मोहरा सस्पेंड या पूरे सिंडिकेट का अंत? महसों जुआ कांड पर खड़े हुए गंभीर सवाल
- बस्ती पुलिस की बड़ी कार्रवाई: जुआ खिलवाने के आरोपी चौकी प्रभारी पर गिरी गाज, सफेदपोशों पर भी उठाई उंगली
- मजे में महसों: थाने से चौकी तक बंधी थी ‘सुविधा शुल्क’ की रकम, असली खिलाड़ी अब भी बेनकाब
बस्ती जिले के लालगंज थाना क्षेत्र के महसों इलाके में जुए के अड्डों पर चल रहे लाखों के खेल और उसके एवज में बंधे ‘मासिक चढ़ावे’ ने एक बार फिर खाकी की साख पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। पुलिस अधीक्षक द्वारा चौकी प्रभारी को निलंबित कर अपनी सक्रियता का संदेश देना सराहनीय कदम है, लेकिन क्या यह कार्रवाई महज एक लीपापोती है या इस काले धंधे की जड़ों तक प्रहार किया जाएगा?
महसों में सरेआम फल-फूल रहा जुए का साम्राज्य
चंगेरवा उद्यान के पीछे, रनिया तालाब और टूटे मसान के पास खुलेआम जुए की महफिलें सज रही हैं। हैरानी की बात यह है कि इस अवैध कारोबार को चलाने वाले धंधेबाज बेखौफ होकर प्रति व्यक्ति पांच सौ रुपए वसूलते हैं। यह पूरी रकम तंत्र के जिम्मेदारों तक ‘सुविधा शुल्क’ के रूप में पहुंचती है, ताकि जुआ खेलने और खिलाने का यह गंदा खेल बिना किसी रुकावट के चलता रहे। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो आम जनता न्याय की किससे उम्मीद करे?
सिर्फ एक मोहरे पर गाज, असली खिलाड़ी कब होंगे बेनकाब?
एसपी डॉ. यशवीर सिंह ने चौकी प्रभारी संजय कुमार को निलंबित कर कड़ा रुख जरूर दिखाया है, मगर सवाल यह उठता है कि क्या इस बड़े सिंडिकेट का अंत सिर्फ एक उपनिरीक्षक के निलंबन से हो जाएगा?
- सफेदपोशों का संरक्षण: इस काले धंधे को केवल थाने या चौकी स्तर पर ही नहीं, बल्कि कई तथाकथित सफेदपोशों और प्रभावशाली लोगों का संरक्षण प्राप्त रहा है।
- बढ़ता ऑनलाइन जाल: महसों के अलावा और अन्य क्षेत्रों में ऑनलाइन लॉटरी का कारोबार भी तेजी से पैर पसार रहा है, जिसके पीछे भी पुलिस की मिलीभगत के गंभीर आरोप हैं।
जब तक इस सिंडिकेट को खाद-पानी देने वाले मुख्य संरक्षकों और पर्दे के पीछे के खिलाड़ियों पर शिकंजा नहीं कसा जाता, तब तक महसों जैसी घटनाएं दोहराती रहेंगी और कानून का इकबाल कमजोर होता रहेगा।
क्या बस्ती पुलिस इस मामले में महज एक चौकी प्रभारी पर कार्रवाई कर इतिश्री कर लेगी, या इस अवैध नेटवर्क को हवा देने वाले उन असली सफेदपोशों और बड़े अधिकारियों पर भी शिकंजा कसेगा, जिनके संरक्षण में यह काला धंधा फल-फूल रहा है?
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