बस्ती: रिटायरमेंट से आठ दिन पहले हेल्थ डायरेक्टर डॉ. रतन पाल सिंह सुमन का बड़ा कारनामा, दो करोड़ की रिश्वत लेकर दिया चद्दर धुलाई का आर्डर.

अजीत मिश्रा (खोजी)
रिटायरमेंट के मुहाने पर खड़े हेल्थ डायरेक्टर का कारनामा: दो करोड़ की रिश्वत लेकर सरकारी खजाने पर डाका
- बाजार में 245 रुपये में होने वाली चद्दर की धुलाई का आर्डर ‘श्री इंटरप्राइजेज’ को 1245 रुपये प्रति चद्दर की दर से देकर सरकारी खजाने पर किया गया डाका.
- मेडिकल कॉरपोरेशन के नियमों को ताक पर रखकर बिना टेंडर के सालाना लगभग सात अरब रुपये का भुगतान कराने का सनसनीखेज मामला.
- स्वास्थ्य विभाग की एक ताकतवर महिला अधिकारी की मध्यस्थता से तय हुई दो करोड़ की डील, प्रमुख सचिव तक पहुंच का हवाला देकर वसूली गई भारी कीमत.
बस्ती जिले के स्वास्थ्य विभाग से एक अत्यंत गंभीर और भ्रष्टाचार को बेनकाब करने वाला मामला सामने आया है, जो यह साबित करता है कि महकमे में कुछ अधिकारी अपनी कुर्सी का इस्तेमाल जनता की सेवा के लिए नहीं, बल्कि अपनी तिजोरी भरने के लिए करते हैं।
मुख्य बिंदु:
- रिटायरमेंट से ठीक पहले का खेल: हेल्थ डायरेक्टर डॉ. रतन पाल सिंह सुमन अपने रिटायरमेंट के ठीक आठ दिन पहले (31 दिसंबर से पूर्व) अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर चद्दर और कंबल की धुलाई का बड़ा आदेश जारी कर गए।
- करोड़ों का सौदा: आरोप है कि उन्होंने ‘श्री इंटरप्राइजेज’ के भगवान यादव से दो करोड़ रुपये की घूस लेकर यह टेंडर पास किया।
- दरों में भारी अंतर और लूट: जहां बाजार में अन्य फर्में (जैसे कुंवर कंस्ट्रक्शन कंपनी) 245 रुपये से लेकर 500 रुपये प्रति चद्दर की दर से धुलाई कर रही थीं, वहीं श्री इंटरप्राइजेज को 1245 रुपये प्रति चद्दर की भारी-भरकम दर पर आर्डर दे दिया गया।
- महिला अधिकारी की संलिप्तता: इस पूरे भ्रष्टाचार में स्वास्थ्य विभाग की एक ताकतवर महिला अधिकारी की भी संलिप्तता सामने आई है, जिसने इस सौदे को कराने में मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभाई और अपनी भारी कीमत वसूली।
नियमों की अनदेखी और कॉरपोरेशन के आदेश की अवहेलना
नियमानुसार अस्पतालों के टेंडर और अनुबंध करने की जिम्मेदारी मेडिकल कॉरपोरेशन की थी, जिसने शुरुआत में श्री इंटरप्राइजेज को अयोग्य मानकर टेंडर निरस्त कर दिया था। इसके बावजूद, डायरेक्टर ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए नियमों के विरुद्ध जाकर यह आदेश जारी कर दिया।
कुंवर कंस्ट्रक्शन कंपनी के रमेश प्रसाद द्वारा की गई शिकायतों से यह उजागर हुआ है कि इस फर्जीवाड़े के कारण सरकार को हर साल करोड़ों रुपये का चूना लग रहा है। इस बात के भी आरोप हैं कि यह फर्म प्रति चद्दर 500 रुपये का भारी कमीशन दे रही है, जिसके चलते यह पूरा घोटाला अंजाम दिया गया।
1. दो करोड़ की रिश्वत और टेंडर का खेल
- डॉ. रतन पाल सिंह सुमन अपने रिटायरमेंट के ठीक आठ दिन पहले (यानी 31 दिसंबर से पहले) अपने अधिकार क्षेत्र से पूरी तरह बाहर चले गए और एक बड़ा आर्डर जारी कर दिया।
- आरोप है कि ‘श्री इंटरप्राइजेज’ के प्रतिनिधि भगवान यादव ने डायरेक्टर साहब को अपने पक्ष में करने के लिए 2 करोड़ रुपये का ऑफर दिया, जिसे देखते ही डायरेक्टर की नीयत बदल गई।
- जहाँ बस्ती में चद्दर की धुलाई का टेंडर महज 245 रुपये में हो सकता था, वहीं डायरेक्टर साहब ने जाते-जाते उसी काम के लिए श्री इंटरप्राइजेज को 1245 रुपये प्रति चद्दर की भारी-भरकम दर पर आर्डर दे दिया।
2. एक ताकतवर महिला अधिकारी की संलिप्तता
- इस पूरे फर्जीवाड़े में अकेले डायरेक्टर साहब ही शामिल नहीं थे, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की एक ताकतवर महिला अधिकारी ने भी इसमें अहम भूमिका निभाई।
- बताया जाता है कि भगवान यादव को डायरेक्टर तक पहुँचाने और इस सौदे को तय करवाने में इसी महिला अधिकारी का हाथ था, जिसने प्रमुख सचिव तक अपनी पहुँच का हवाला देकर यह डील कराई और इसके बदले अपनी भारी कीमत भी वसूली।
3. मेडिकल कॉरपोरेशन के नियमों की अनदेखी
- नियमानुसार, सरकारी अस्पतालों के लिए टेंडर निकालने और अनुबंध करने की जिम्मेदारी ‘मेडिकल कॉरपोरेशन’ की होती है। कॉरपोरेशन ने टेंडर निकाला भी था, लेकिन उसमें केवल श्री इंटरप्राइजेज के क्वालिफाई होने के कारण उस टेंडर को निरस्त करना पड़ा था।
- लगभग दो साल तक श्री इंटरप्राइजेज को टेंडर नहीं मिल पाया था, क्योंकि कॉरपोरेशन इसके पक्ष में नहीं था। इसके बावजूद, डायरेक्टर डॉ. रतन पाल सिंह सुमन ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर नियमों को ताक पर रख दिया और बिना टेंडर के ही पूरे प्रदेश के सरकारी अस्पतालों के चद्दर और कंबल धोने का आर्डर श्री इंटरप्राइजेज को सौंप दिया।
4. सरकारी खजाने को करोड़ों का नुकसान और कमीशनखोरी
- कुंवर कंस्ट्रक्शन कंपनी (बस्ती) के रमेश प्रसाद द्वारा की गई शिकायत के अनुसार, उनकी फर्म जीएसटी सहित 278 रुपये प्रति चद्दर की दर से धुलाई करने को तैयार थी, जबकि श्री इंटरप्राइजेज को यही काम 1245 रुपये प्रति चद्दर के हिसाब से दिया गया।
- इस मनमाने और नियम-विरुद्ध आदेश के कारण सरकार को हर साल करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है।
- स्थिति यह है कि प्रदेश भर के अस्पतालों में रोजाना होने वाली चद्दरों की धुलाई के मद में अकेले एक महीने में लगभग 62 करोड़ रुपये का भुगतान श्री इंटरप्राइजेज को किया जा रहा है, जिससे सालाना भुगतान लगभग सात अरब रुपये तक पहुँच जाता है।
- इस बड़े खेल के पीछे मुख्य वजह यह बताई जा रही है कि श्री इंटरप्राइजेज इस अवैध आर्डर के बदले प्रति चद्दर 500 रुपये का भारी कमीशन दे रही है।
यह मामला स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक पारदर्शिता पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है कि कैसे चंद पैसों की खातिर बैठे अधिकारी सरकारी तंत्र को खोखला कर रहे हैं।
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