सीमेंटेड कुर्सी खरीद में अनियमितता, कोलझिकी मुखिया निलंबित

श्री बंशीधर नगर। 15वें वित्त आयोग की राशि से सीमेंटेड कुर्सियों की खरीद में कथित अनियमितता तथा पंचायत सहायक के चयन में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं करने के मामले में कोलझिकी पंचायत के मुखिया अजय प्रसाद गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई की गई है। राज्य सरकार के पंचायती राज विभाग ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन के साथ उनकी वित्तीय शक्तियों समेत पंचायत से संबंधित अन्य शक्तियां भी समाप्त कर दी गई हैं। विभागीय आदेश को मंत्री की मंजूरी मिलने के बाद कार्रवाई प्रभावी हुई है।
यह कार्रवाई गढ़वा उपायुक्त की अनुशंसा के आधार पर की गई है। विभागीय जांच के दौरान मुखिया के विरुद्ध लगाए गए विभिन्न आरोपों की जांच की गई, जिसमें कई आरोपों की पुष्टि होने की बात सामने आई है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, 15वें वित्त आयोग मद की राशि से ऐसी सीमेंटेड कुर्सियों की खरीद की गई, जिन्हें अनुपयुक्त स्थानों पर स्थापित कराया गया। आरोप है कि कुछ कुर्सियों को व्यक्तिगत स्थानों पर भी अधिष्ठापित कराया गया, जिसको लेकर सरकारी राशि के उपयोग पर सवाल उठे।
एक ही आपूर्तिकर्ता से 8.80 लाख की खरीद
विभागीय जांच में यह भी सामने आया कि निर्धारित प्रक्रिया और विभागीय निर्देशों की अनदेखी करते हुए एक ही आपूर्तिकर्ता एमएस उमा डिजिटल प्वाइंट से अलग-अलग तिथियों में कुल 8.80 लाख रुपये की सीमेंटेड कुर्सियों की खरीद की गई। खरीद प्रक्रिया, स्थान और सरकारी राशि के उपयोग को लेकर शिकायतों के बाद मामले की जांच कराई गई।
जांच के दौरान खरीद से संबंधित दस्तावेजों और प्रक्रिया की पड़ताल की गई। विभागीय स्तर पर लगाए गए आरोपों की जांच के बाद अनियमितताओं की पुष्टि होने की बात कही गई है।
पंचायत सहायक चयन में भी उठे सवाल
मुखिया के खिलाफ पंचायत सहायक के चयन में भी निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं करने का आरोप लगाया गया था। विभागीय जांच में इस मामले को भी शामिल किया गया। आरोपों और उपलब्ध अभिलेखों की जांच के बाद विभाग ने मुखिया के विरुद्ध कार्रवाई की अनुशंसा को आगे बढ़ाया।
स्पष्टीकरण के बाद कार्रवाई
मामले में तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी की ओर से मुखिया से स्पष्टीकरण मांगा गया था। विभागीय सूत्रों के अनुसार, मुखिया की ओर से दिए गए जवाब को संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके बाद मामले को विभागीय स्तर पर आगे बढ़ाया गया और जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद निलंबन की कार्रवाई की गई।
निलंबन के बाद अब संबंधित पंचायत में प्रशासनिक और वित्तीय कार्यों के संचालन को लेकर विभागीय स्तर पर आवश्यक प्रक्रिया अपनाई जाएगी। मामले में आगे की विभागीय कार्रवाई भी नियमों के अनुसार जारी रहने की संभावना है।
गढ़वा उपायुक्त की अनुशंसा के बाद पंचायती राज विभाग की कार्रवाई से पंचायत स्तर पर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और वित्तीय प्रक्रिया में नियमों के पालन को लेकर भी सवाल उठे हैं।
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