*कमर्जी फॉरेस्ट स्ट्राइक फोर्स’ का सरकारी वाहन गिट्टी के साथ इंसानों का भी अवैध परिवहन*

मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी), छत्तीसगढ़: जिले के वन परिक्षेत्र कमर्जी में सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। पहले से ही गिट्टी ढोने के लिए सुर्खियों में आए 'फॉरेस्ट स्ट्राइक फोर्स' के वाहन (नंबर CG 02 AU 2207) का एक वीडियो सामने आया है जिसमें यह सरकारी गाड़ी न केवल अवैध माल, बल्कि इंसानों को भी अवैध रूप से ढोती नज़र आ रही है। यह घटना वन विभाग के नियमों की धज्जियां उड़ाने और सरकारी तंत्र की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े करती है।
*स्ट्राइक फोर्स का वाहन बना शेयरिंग ऑटो*
वीडियो में देखा जा सकता है कि जिस महिंद्रा बोलेरो कैंपर वाहन को वन सुरक्षा के लिए आरक्षित किया गया है, उसके पिछले हिस्से (डाला) में गिट्टी भरी हुई है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि उसी गिट्टी के ऊपर और वाहन के केबिन के अंदर, वन विभाग के कोई कर्मचारी नजर नहीं आ रहे बल्कि अन्य लोग भी सवार नज़र आ रहे हैं।
*सुरक्षा नियमों की खुली अवहेलना*
सरकारी नियमों के अनुसार, 'फॉरेस्ट स्ट्राइक फोर्स' के वाहनों का उपयोग केवल वन विभाग के अधिकृत कर्मचारियों और आधिकारिक कार्यों (जैसे पेट्रोलिंग, गश्ती, आपातकालीन कार्रवाई) के लिए किया जाना चाहिए। आम जनता या अनधिकृत व्यक्तियों को इन वाहनों में बिठाना पूरी तरह से प्रतिबंधित है, क्योंकि यह न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि सुरक्षा के लिहाज़ से भी जोखिम भरा है।
*कर्मचारियों की मौन सहमति या मिलीभगत*
वाहन में सवार वन विभाग के कर्मचारी (यदि वे अधिकृत थे) इन अनधिकृत सवारियों को ले जाने के लिए जिम्मेदार हैं। क्या यह परिवहन उनकी जानकारी में हो रहा था? या क्या उन्होंने किसी निजी लाभ के लिए इन सवारियों को बिठाया था? यह जांच का विषय है।
*सरकारी संसाधन का निजी लाभ के लिए इस्तेमाल*
यह आशंका भी जताई जा रही है कि क्या विभाग के कर्मचारी इन 'सवारियों' से किराया या कोई अन्य लाभ ले रहे थे? अगर ऐसा है, तो यह एक गंभीर भ्रष्टाचार का मामला है।
*क्या यही है 'फॉरेस्ट स्ट्राइक*
जिस वाहन का नाम ही 'स्ट्राइक' (तेज़ कार्रवाई) के लिए रखा गया है, उसका इस तरह 'मालवाहक' और 'सवारी गाड़ी' के रूप में इस्तेमाल होना हास्यास्पद और शर्मनाक है। यह विभाग की गंभीरता पर सवाल उठाता है।
*विभागीय निगरानी पर सवाल*
यह घटना इस बात की ओर भी इशारा करती है कि क्या वन विभाग के पास अपने वाहनों और कर्मचारियों की निगरानी के लिए कोई प्रभावी तंत्र है? क्या अधिकारियों को पता था कि उनके वाहन का इस्तेमाल इस तरह से हो रहा है
*उदाहरण सेट करने की ज़रूरत*
यह मामला न केवल एक वाहन के दुरुपयोग का है, बल्कि सरकारी तंत्र के प्रति जनता के विश्वास को बहाल करने का भी है। प्रशासन को इस मामले में त्वरित और सख्त कदम उठाकर एक उदाहरण सेट करना चाहिए ताकि भविष्य में कोई और कर्मचारी ऐसा करने की हिम्मत न कर सके।
इस वायरल वीडियो ने एमसीबी जिले के वन विभाग की कार्यप्रणाली को पूरी तरह से बेनकाब कर दिया है। अब देखना यह है कि विभाग के आला अधिकारी इस गंभीर मामले पर क्या कार्रवाई करते हैं।
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