67 की उम्र में भी सरकारी सेवा जारी! बस्ती के सीएमएसडी स्टोर में तैनात चीफ फार्मासिस्ट अजय मिश्र के कारनामों पर शासन सख्त, 3 दिन में मांगी रिपोर्ट

अजीत मिश्रा (खोजी)
ढहने की कगार पर ‘अजय मिश्र’ के रसूख का ‘साम्राज्य’! 67 की उम्र में भी दे रहे सरकारी सेवा, शासन ने मांगी 3 दिन में रिपोर्ट
विशेष संवाददाता | बस्ती
- ‘ढहने लगा अजय मिश्र के रसूख का साम्राज्य!’ 67 वर्ष की आयु में भी कुर्सी से चिपके हैं चीफ फार्मासिस्ट, शासन ने दिए जांच के आदेश
- उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग का कारनामा: 05 जनवरी 1959 जन्मतिथि वाले बाबू दे रहे सेवाएं, शासन स्तर पर मचा हड़कंप
- बस्ती सीएमओ दफ्तर में फर्जीवाड़े का खेल: करोड़ों के औषधि भंडार पर राज करने वाले चीफ फार्मासिस्ट की उम्र पर उठे गंभीर सवाल
- क्या भ्रष्टाचार और मिलीभगत की ढाल से बच रहे हैं अजय मिश्र? शासन के अल्टीमेटम के बाद भी महकमे में पसरा सन्नाटा
उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य महकमे से एक ऐसा हैरतंगेज और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रशासनिक अमले और स्वास्थ्य विभाग की साख पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। बस्ती जनपद में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) दफ्तर के केंद्रीय औषधि भंडार (CMSD Store) पर पिछले 20 वर्षों से एकाधिकार जमाए बैठे चीफ फार्मासिस्ट अजय मिश्र के कारनामों का ‘किला’ अब ढहने के कगार पर पहुंच गया है।

सबसे बड़ा और चौंकाने वाला सवाल यह है कि शासकीय दस्तावेजों के अनुसार 05 जनवरी 1959 को जन्मे अजय मिश्र 67 वर्ष की उम्र पार करने के बावजूद किस नियम के तहत अब तक सरकारी सेवा में बने हुए हैं? क्या उत्तर प्रदेश शासन के सेवा नियमावली के नियम इस रसूखदार कर्मचारी पर लागू नहीं होते?
शासन की सख्त कार्रवाई: अनु सचिव ने महानिदेशक को लिखा पत्र
शासन स्तर से इस मामले में अत्यधिक गंभीरता दिखाते हुए कड़ा रुख अपनाया गया है। उत्तर प्रदेश शासन के अनु सचिव अमरेश कुमार मिश्र द्वारा महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं, लखनऊ को ‘सर्वोच्च प्राथमिकता/मुख्यमंत्री संदर्भ’ (संख्या: 884/पांच-7-2026) के तहत पत्र जारी कर फटकार लगाई गई है।
शासन ने स्पष्ट किया है कि इससे पूर्व भेजी गई जांच आख्या सुस्पष्ट एवं अपूर्ण थी, जो कि बेहद खेदजनक है। अब सक्षम स्तर से जांच कराकर 3 दिवस के भीतर निम्नलिखित गंभीर बिंदुओं पर स्पष्ट आख्या मांगी गई है:
- सेवानिवृत्ति पर सवाल: जब अजय मिश्र की जन्मतिथि 05.01.1959 है, तो उनकी सेवानिवृत्ति कब होनी थी और वे अब तक पद पर कैसे हैं?
- कूटरचना व FIR: जब वार्ड ब्वाय ललित बौद्ध द्वारा फर्जी हस्ताक्षर बनाने का मामला उजागर हुआ, तो उस पर कूटरचना की एफआईआर (FIR) दर्ज क्यों नहीं कराई गई?
- अनुशासनिक व फोरेंसिक जांच: इस गंभीर प्रकरण में अब तक अनुशासनिक जांच और हस्ताक्षरों की फोरेंसिक जांच क्यों नहीं कराई गई?
- अन्य गड़बड़ियों की आशंका: क्या कूट रचना करके कोई अन्य बड़ा घोटाला या गड़बड़ी तो नहीं की गई?
- लापरवाही या मिलीभगत: ललित बौद्ध जब फर्जी हस्ताक्षर बना रहा था, तो चीफ फार्मासिस्ट अजय मिश्र को इस बात की भनक क्यों नहीं लगी?
फर्जीवाड़े का खेल और स्वास्थ्य विभाग में ‘मनी व पावर’ का गठजोड़
प्राप्त जानकारी के अनुसार, लगभग ढाई साल पहले तत्कालीन सीएमओ द्वारा किए गए निरीक्षण के दौरान सीएमएसडी स्टोर में फर्जी हस्ताक्षरों और गड़बड़ियों का भंडाफोड़ हुआ था। आरोप है कि वार्ड ब्वाय ललित बौद्ध द्वारा फर्जी दस्तखत किए जा रहे थे। तत्कालीन सीएमओ ने वार्ड ब्वाय का तबादला सीएचसी परसरामपुर कर दिया था, लेकिन न तो एफआईआर कराई गई और न ही विधिक कार्रवाई हुई।
चौंकाने वाली बात यह है कि वर्तमान सीएमओ द्वारा उसी दागी वार्ड ब्वाय को पुनः सीएमएसडी स्टोर में तैनात कर दिया गया, जिससे स्वास्थ्य विभाग के अफसरों और अजय मिश्र के बीच गहरे ‘गठजोड़’ की बू आ रही है। आखिर ऐसी कौन सी मजबूरी या ‘डील’ थी जिसके चलते कानूनी कार्रवाई करने के बजाय मामलों को दबाया जाता रहा?
जनता का सवाल: कब गिरेगी गाज?
बस्ती से लेकर लखनऊ (राजधानी) तक अपनी पैठ रखने वाले चीफ फार्मासिस्ट के इस ‘साम्राज्य’ पर अब शासन के कड़े पत्र के बाद हड़कंप मचा हुआ है। करोड़ों के औषधियों के रखरखाव और वितरण वाले महत्वपूर्ण पद पर बैठे किसी व्यक्ति का फर्जीवाड़े के बावजूद 67 साल की उम्र तक बने रहना पूरे सिस्टम की लाचारी या मिलीभगत को उजागर करता है।
अब देखना यह है कि शासन के इस 3 दिवसीय अल्टीमेटम के बाद जिम्मेदार अधिकारियों पर गाज गिरती है या फिर से कागजी लीपापोती की कोशिश की जाएगी!
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