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अंधेरे में भविष्य, उमस में शिक्षा: कब रोशन होगा कप्तानगंज का पूर्व माध्यमिक विद्यालय बटटूपुर?

12 Oct 2026, 08:59 PM • Vande Bharat Live TV News
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अंधेरे में भविष्य, उमस में शिक्षा: कब रोशन होगा कप्तानगंज का पूर्व माध्यमिक विद्यालय बटटूपुर? - BASTI, उत्तर प्रदेश

अजीत मिश्रा (खोजी)

अंधेरे में भविष्य और उमस में शिक्षा: कब रोशन होगा कप्तानगंज के बटटूपुर पूर्व माध्यमिक विद्यालय का भाग्य?

  1. धन जमा, कागजी प्रक्रिया पूरी… फिर किस लालफीताशाही की भेंट चढ़ गया बटटूपुर विद्यालय का बिजली कनेक्शन?
  2. ​सरकारी दावों की उखड़ी पोल: बटटूपुर में पंखे बंद, बल्ब बुझा… पसीने में पढ़ने को मजबूर मासूम!
  3. ​कागजों में रोशन, धरातल पर अंधेरा: कप्तानगंज के बटटूपुर स्कूल में कब आएगी बिजली?
  • ​लापरवाही पर सवाल: विद्युत विभाग की ढिलाई या प्रशासनिक सुस्ती? सवालों के घेरे में जिम्मेदार अफसर!
  • ​बच्चों की परेशानी: चिलचिलाती गर्मी और घुटन भरे कमरों में पढ़ाई की अग्निपरीक्षा दे रहे नौनिहाल।
  • ​अधिकारियों को चुनौती: सारी औपचारिकताएं पूरी, फिर किस टेबल पर अटकी है बटटूपुर विद्यालय की फाइल?

​बस्ती: उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा भले ही परिषदीय विद्यालयों को आधुनिक और संसाधन-युक्त बनाने के दावे ठंके की चोट पर किए जा रहे हों, लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त इन दावों की पोल खोलने के लिए काफ़ी है। बस्ती ज़िले के कप्तानगंज विकास खंड अंतर्गत आने वाले पूर्व माध्यमिक विद्यालय बटटूपुर की स्थिति इन दिनों प्रशासनिक सुस्ती और व्यवस्था की उदासीनता की बानगी बन चुकी है। तमाम कागज़ी औपचारिकताएं पूरी होने और धनराशि जमा किए जाने के बावजूद यह विद्यालय आज भी बिजली के कनेक्शन के इंतज़ार में अंधेरे और उमस की मार झेल रहा है।

​कागज़ों में पूरी प्रक्रिया, ज़मीन पर सिफ़र अंधेरा

​प्राप्त तथ्यों के अनुसार, विद्यालय में बिजली कनेक्शन लगवाने के लिए आवश्यक धनराशि को विधिवत जमा किया जा चुका है और इससे जुड़ी तमाम कागजी प्रक्रियाएं भी महीनों पहले पूरी की जा चुकी हैं। नियम और प्रावधानों के तहत जब एक बार विभाग द्वारा डिमांड या औपचारिकताएं पूरी हो जाती हैं, तो कनेक्शन मिलने में देरी का कोई औचित्य नहीं बनता।

​सवाल यह उठता है कि जब धन जमा है और फाइल स्वीकृत हो चुकी है, तो आखिर यह प्रक्रिया किस लालफीताशाही या सरकारी लापरवाही की भेंट चढ़ गई है? क्या जिम्मेदार अधिकारियों को इस बात का अंदाज़ा नहीं है कि विद्यालय में बिजली न होने से शिक्षण कार्य पर कितना बुरा असर पड़ रहा है?

लगभग 40 साल पुराना यह विद्यालय आज भी बिजली के एक कनेक्शन का इंतजार कर रहा है।
तथ्य क्या कहते हैं?
1. स्कूल की पहचान: P.S. BATTUPUR, UDISE Code – 09550207101, स्थापना वर्ष – 1985। पता – बटटूपुर, विष्णुपुर, कप्तानगंज, बस्ती।

2. यह अकेला नहीं है: बस्ती जिले के यह हालात सिर्फ बटटूपुर के नहीं हैं। जिले के 50 परिषदीय विद्यालयों में आज तक बिजली का मीटर तक नहीं लगा है और काम जुगाड़ के सहारे चल रहा है।

3. पोर्टल पर भी खेल: विद्युत विभाग का अपना झटपट पोर्टल भी बस्ती में फेल साबित हो रहा है। पोर्टल पर आवेदन के बाद भी समय से कनेक्शन नहीं मिल पा रहा है।

ग्रामीणों और अभिभावकों का आरोप है कि विद्यालय प्रबंधन द्वारा बिजली कनेक्शन के लिए धनराशि जमा करने और सारी कागजी औपचारिकता पूरी करने के बावजूद महीनों से फाइल विद्युत विभाग के बाबुओं की मेज पर धूल खा रही है।
क्लासरूम का हाल
कक्षा 1 से 5 तक कुल 74 बच्चे नामांकित हैं। दोपहर 12 बजे के बाद टीन शेड वाले कमरों में तापमान 40 डिग्री के पार चला जाता है। बिना पंखे के बच्चे पसीने से तरबतर होकर पढ़ने को मजबूर हैं। अंधेरे कमरों में ब्लैक बोर्ड तक ठीक से नहीं दिखता। स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर, ई-पाठशाला की बात तो दूर, यहां तो रोशनी भी मयस्सर नहीं।
जिम्मेदार कौन?
सवाल सीधा है –
• जब धनराशि जमा है, एस्टीमेट बन गया है, तो कनेक्शन किस फाइल में अटका है? • क्या विद्युत उपखंड कप्तानगंज और बेसिक शिक्षा विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टाल रहे हैं? • ऑपरेशन कायाकल्प के तहत विद्युतीकरण के दावों की जमीनी हकीकत यही है?
यह लापरवाही नहीं, तो क्या है? एक तरफ करोड़ों की लागत से नए उपकेंद्रों का शिलान्यास हो रहा है, दूसरी तरफ 1985 से चल रहा स्कूल आज भी अंधेरे में है।

बिजली के अभाव में शिक्षा प्रभावित हो रही है और बच्चों का भविष्य दांव पर लगा है। क्या इन बच्चों की परेशानी सुनने वाला कोई नहीं है?

प्रशासन से मांग है कि –
1. बटटूपुर विद्यालय के कनेक्शन की पत्रावली सार्वजनिक की जाए। 2. 15 दिन के भीतर कनेक्शन देकर अनुपालन रिपोर्ट दी जाए। 3. जिले के शेष 50 बिना बिजली वाले स्कूलों की सूची और उन पर कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट की जाए।

​उमस भरी गर्मी में पसीने से तर-बतर भविष्य

​वर्तमान मौसम में उमस और चिलचिलाती गर्मी अपने चरम पर है। ऐसे में बिना पंखे और बिजली के उन कमरों में बैठना जहाँ हवा का कोई गुजर न हो, बच्चों और शिक्षकों दोनों के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है।

  • ​बल्ब बुझे और पंखे बंद: कक्षाओं में लगे पंखे और ट्यूबलाइट केवल शोपीस बनकर रह गए हैं।
  • ​स्वास्थ्य पर असर: उमस भरे माहौल में बच्चे पसीने से तर-बतर होकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं, जिससे उनकी सेहत और ध्यान दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
  • ​छात्रों की एकाग्रता भंग: चिलचिलाती गर्मी और घुटन भरे माहौल के बीच बच्चे पढ़ाई पर फोकस करने के बजाय राहत पाने के लिए संघर्ष करते नज़र आते हैं।

​किसकी लापरवाही? विद्युत विभाग या प्रशासनिक सुस्ती?

​इस पूरे घटनाक्रम में विभागीय तालमेल की भारी कमी साफ़ झलकती है। एक तरफ जहाँ स्थानीय अभिभावक और विद्यालय प्रबंधन समिति लगातार बिजली कनेक्शन बहाल कराने की गुहार लगा रही है, वहीं दूसरी तरफ जिम्मेदार विभागों की सुस्ती ने बच्चों के भविष्य को अधर में लटका दिया है।

​क्या विद्युत विभाग और शिक्षा विभाग के अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं होनी चाहिए? जनता के टैक्स के पैसों से जब कागजी खानापूर्ति पूरी हो चुकी है, तो सुविधा धरातल पर उतरने में इतनी लंबी देरी क्यों हो रही है? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे या छात्र-अभिभावक के आक्रोश का इंतज़ार कर रहा है?

​ज़रूरत तत्काल हस्तक्षेप की:

बटटूपुर पूर्व माध्यमिक विद्यालय की यह बानगी सिर्फ एक स्कूल की कहानी नहीं है, बल्कि ग्रामीण अंचल की शिक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न है। समय आ गया है कि ज़िला प्रशासन और शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारी इस मामले का संज्ञान लें। यदि जल्द ही कागजों से निकलकर बिजली के तार विद्यालय तक नहीं पहुंचे, तो यह बच्चों के मौलिक अधिकारों और उनके उज्ज्वल भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ माना जाएगा।

 

​क्या अब भी कोई जिम्मेदार अधिकारी इस खामोशी को तोड़ेगा और बटटूपुर विद्यालय को रोशन करेगा?

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