सुरक्षित स्कूल भवन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हर बच्चे का कानूनी अधिकार ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूजडे अभियान के तहत न्यायिक अधिकारियों ने विद्यार्थियों को किया जागरूक

सुरक्षित स्कूल भवन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हर बच्चे का कानूनी अधिकार
ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूजडे अभियान के तहत न्यायिक अधिकारियों ने विद्यार्थियों को किया जागरूक
पाली, 13 अक्टूबर। माननीय राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर द्वारा ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूजडे (परिवर्तनकारी मंगलवार) अभियान का शुभारंभ किया गया है। इसका उद्देश्य प्रत्येक माह के प्रथम एवं तृतीय मंगलवार को जिले के राजकीय एवं निजी विद्यालयों में जागरूकता शिविरों के माध्यम से विद्यार्थियों को उनके कानूनी अधिकारों, कर्तव्यों एवं वर्तमान सामाजिक-कानूनी मुद्दों के प्रति संवेदनशील बनाना है। इसी क्रम में जिले के न्यायिक अधिकारियों द्वारा विद्यालयों में सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के महत्व को लेकर जागरूकता शिविर आयोजित किए गए।
जिला एवं सेशन न्यायाधीश राजेन्द्र कुमार ने सेंट पॉल उच्च माध्यमिक विद्यालय, पाली में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। उन्होंने विद्यालयों के बुनियादी ढांचे की कमियों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं तथा उनसे बच्चों को होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सुरक्षित विद्यालय प्रत्येक बच्चे का अधिकार है। विद्यालय भवन या अन्य सुविधाएं असुरक्षित होने पर विद्यार्थियों को सहायता प्राप्त करने के तरीकों की जानकारी भी दी गई।
उन्होंने बताया कि विद्यालयी आधारभूत संरचना का अर्थ केवल भवन नहीं, बल्कि सुरक्षित, समावेशी एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए आवश्यक सभी सुविधाएं हैं। इनमें कक्षाएं, शौचालय, पेयजल, खेल मैदान, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, चारदीवारी, सुगम आवागमन के लिए रैंप तथा सुरक्षा से जुड़े सभी प्रबंध शामिल हैं। इस दौरान निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (आरटीई अधिनियम) के प्रावधानों की जानकारी देते हुए विद्यार्थियों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया गया।
इसी क्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं अपर जिला न्यायाधीश विक्रम सिंह भाटी ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, इंद्रानगर में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। उन्होंने अभियान के उद्देश्य, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की भूमिका, असुरक्षित विद्यालयी आधारभूत संरचना से जुड़े जोखिम, सुरक्षित विद्यालयी वातावरण के महत्व तथा असुरक्षित संरचनाओं के चेतावनी संकेतों के बारे में जानकारी दी। विद्यार्थियों को आपातकालीन परिस्थितियों में क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए, इसके बारे में भी बताया गया।
कार्यक्रम में निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी देते हुए विद्यालयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की भूमिका से अवगत कराया गया।
जिले के अन्य न्यायिक अधिकारियों ने भी आवंटित विद्यालयों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर विद्यार्थियों को असुरक्षित विद्यालयी संरचनाओं की पहचान करने, उनसे बचाव के उपायों, उपलब्ध सहायता तंत्र, विभिन्न हेल्पलाइन नंबरों, दंडात्मक प्रावधानों तथा किशोर न्याय अधिनियम आदि की जानकारी दी। इस दौरान बाल विवाह के विरुद्ध शपथ भी दिलाई गई।
विद्यार्थियों की सुविधा के लिए आवंटित विद्यालयों में शिकायत पेटी (कोर्ट वाली दीदी) भी स्थापित की गई, ताकि विद्यार्थी विद्यालय अथवा अपने आवासीय स्थान से संबंधित किसी भी प्रकार की शिकायत इसमें डाल सकें।
कार्यक्रम में सेंट पॉल स्कूल, पाली के प्रधानाचार्य डेविड जॉन, आस्तिक जोशी, शिक्षक शिवू थॉमस, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, इंद्रानगर के दुदाराम सोलंकी तथा हेड पीएलवी मांगीलाल तंवर सहित अन्य उपस्थित रहे।
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