भव्य रोशनी वाले कार्यक्रम में अधिकारियों की मौजूदगी, रामलीला मंचन से दूरी! मां शारदा की नगरी में धार्मिक आयोजनों को लेकर उठे सवाल

मैहर। मां शारदा की पावन नगरी मैहर में शारदीय नवरात्रि के शक्ति पर्व के दौरान पुलिस अधीक्षक अवधेश प्रताप सिंह का भजन गायन चर्चा में रहा।
कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाने वाले पुलिस कप्तान जब भक्ति के रंग में नजर आए, तो उन्होंने “अंगना पधारो महारानी, मोरी शारदा भवानी” भजन गाकर श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। उनके भजन गायन से कार्यक्रम का माहौल भक्तिमय हो उठा।
चकाचौंध वाले आयोजन पर जोर, रामलीला मंचन की उपेक्षा क्यों? नवरात्रि के दौरान मैहर में धार्मिक आयोजनों की भव्यता और प्रशासनिक सहभागिता को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि रंग-बिरंगी रोशनी और भव्य सजावट वाले कार्यक्रमों में अधिकारियों की मौजूदगी, प्रचार-प्रसार और उत्साह दिखाई देता है, लेकिन भगवान श्रीराम की लीला के मंचन को वैसा महत्व मिलता नजर नहीं आता। मां शारदा प्रबंध समिति द्वारा आयोजित रामलीला मंचन में दर्शकों की कम उपस्थिति और पंडाल में आवारा पशुओं की मौजूदगी व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।
हालात ऐसे बताए जा रहे हैं कि रामलीला देखने आने वाले दर्शकों से ज्यादा आवारा पशु पंडाल में नजर आते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत रखने वाले इस आयोजन की व्यवस्थाओं पर जिम्मेदारों का ध्यान क्यों नहीं जा रहा?
जब आयोजन एक ही समिति के, तो प्राथमिकता में अंतर क्यों? बताया जा रहा है कि मां शारदा प्रबंध समिति द्वारा विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, लेकिन रामलीला मंचन को लेकर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की अपेक्षित सक्रियता दिखाई नहीं देने की शिकायत है।
यदि एक ओर भव्य मंच, आकर्षक रोशनी और बड़े आयोजनों में सहभागिता दिखाई देती है, तो दूसरी ओर रामलीला जैसे पारंपरिक धार्मिक आयोजन में भी व्यवस्था, प्रचार-प्रसार और जनभागीदारी बढ़ाने के प्रयास होने चाहिए। भगवान श्रीराम की लीला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, मर्यादा और आदर्शों का प्रतीक है।
ऐसे आयोजन को दर्शकों के अभाव और अव्यवस्थाओं के बीच छोड़ देना चिंता का विषय है। सवाल यही है कि मैहर में धार्मिक आयोजनों की पहचान केवल भव्य रोशनी और चकाचौंध तक सीमित रहेगी, या भगवान श्रीराम की लीला को भी उतना ही सम्मान और प्रोत्साहन मिलेगा?
रामलीला पंडाल में साफ-सफाई, आवारा पशुओं पर नियंत्रण, बेहतर प्रचार-प्रसार और अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों की सहभागिता सुनिश्चित करने की जरूरत है, ताकि रामलीला मंचन भी श्रद्धालुओं और आम नागरिकों के बीच आकर्षण का केंद्र बन सके। नोट: संबंधित अधिकारियों और मां शारदा प्रबंध समिति का पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जा सकता है।
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