कागजों पर तालाब-नाली, जेब में जनता का पैसा: गोंडा में ₹7 लाख के गबन पर DM का हंटर, प्रधान व सचिव समेत 4 नपे!

अजीत मिश्रा (खोजी)
सरकारी खजाने पर प्रहार: गोंडा में DM की सख्त कार्रवाई से भ्रष्टाचारियों में हड़कंप
- गोंडा में भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस: बिना काम कराए ₹7.17 लाख हड़पने वाले प्रधान और इंजीनियरों पर गिरी गाज!
- सरकारी खजाने पर डाका डालने वालों की खैर नहीं: इमिलिया मिश्र पंचायत घोटाले में DM प्रियंका निरंजन का कड़ा एक्शन!
- गबन का खेल खत्म: ₹7.17 लाख के फर्जीवाड़े में हटाए गए प्रधान, अब होगी पाई-पाई की वसूली और कानूनी शिकंजा!
- विकास के नाम पर लूट: धरातल पर शून्य, फाइलों में पूरा भुगतान—गोंडा के इस घोटाले ने खोली तंत्र की पोल!
बस्ती/गोंडा: सरकारी तिजोरी को अपनी निजी जागीर समझकर जनता के हक पर डाका डालने वालों के खिलाफ प्रशासन ने अब कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। गोंडा जिले से आई एक सनसनीखेज खबर ने पूरे प्रशासनिक गलियारे में हलचल मचा दी है। मनरेगा और राज्य वित्त आयोग के नाम पर गरीबों के पसीने की कमाई को डकारने वाले एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है, और जिला प्रशासन ने इस पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति का ऐसा चाबुक चलाया है कि भ्रष्टाचारियों की नींद उड़ गई है।
कागजों पर नाली और तालाब, जेब में सरकारी खजाना
मामला गोंडा के इमिलिया मिश्र ग्राम पंचायत का है, जहां विकास के दावों की पोल तब खुली जब गांव के ही एक सजग नागरिक पंकज तिवारी ने धांधली के खिलाफ आवाज उठाई। शिकायत के बाद जब जांच की सुई घूमी, तो एक के बाद एक चौंकाने वाले खुलासे हुए।
जांच में सामने आया कि धरातल पर एक इंच भी काम नहीं हुआ—न कोई नया तालाब खुदा और न ही कोई नाली बनी—लेकिन कागजी घोड़े दौड़ाकर पांच अलग-अलग विकास मदों से कुल ₹7,17,446 (सात लाख सत्रह हजार चार सौ छियालीस रुपये) की भारी-भरकम राशि का फर्जी भुगतान करा लिया गया। यानी काम गायब, फाइलें पास और सरकारी पैसा सीधे गबन!
किसकी-किसकी गर्दन फंसी?
इस खेल में अकेले मुखिया ही शामिल नहीं थे, बल्कि पूरे तंत्र की मिलीभगत सामने आई है:
- तत्कालीन प्रशासक व प्रधान: राजेंद्र प्रसाद मिश्र को पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है। उनकी जगह अब झंझरी ब्लॉक के एडीओ पंचायत को नया प्रशासक नियुक्त कर कमान सौंपी गई है।
- अधिकारी भी नपे: जांच की आंच सिर्फ प्रधान तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें पंचायत सचिव रोहित कुमार, जेई संतोष कुमार और तकनीकी सहायक एस.के. पांडेय को भी सीधे तौर पर दोषी पाया गया है।
अब होगी पाई-पाई की वसूली और जेल की तैयारी
प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि जनता के खून-पसीने की कमाई लूटने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। नोटिस का संतोषजनक जवाब न मिलने पर अब इन सभी दोषियों से गबन की गई पूरी राशि की रिकवरी (आरसी) और सख्त कानूनी विधिक कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
जनता का सवाल और संदेश
यह मामला सिर्फ एक ग्राम पंचायत का नहीं, बल्कि उन तमाम व्यवस्थाओं पर एक बड़ा तमाचा है जो ग्रामीण विकास के नाम पर भ्रष्टाचार की दीमक पाले हुए हैं। गोंडा डीएम प्रियंका निरंजन द्वारा उठाया गया यह कदम अन्य जिलों के लिए भी एक नजीर बनना चाहिए।
सरकारी धन का दुरुपयोग करने वालों के लिए यह एक सीधी चेतावनी है— भ्रष्टाचार की इस गाड़ी का अंत अब जेल की सलाखों और बर्बादी के सिवाय कुछ नहीं है!
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