ग्वालियर नगर निगम की प्रधानमंत्री आवास योजना में कथित दलाली और रिश्वतखोरी का मामला उजागर? स्टिंग ऑपरेशन में राशि मांगने का दावा, निष्पक्ष जांच की मांग

ग्वालियर। नगर निगम ग्वालियर की प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत सागरताल क्षेत्र में स्थित फ्लैटों के आवंटन को लेकर कथित दलाली और रिश्वत मांगने का गंभीर मामला सामने आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक कथित स्टिंग ऑपरेशन के दौरान एक व्यक्ति की तस्वीर लिए जाने तथा फोन पर राशि की मांग से संबंधित ऑडियो रिकॉर्डिंग किए जाने का दावा किया गया है। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह जरूरतमंद परिवारों को आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित सरकारी योजना की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।
₹2 लाख एडवांस देने पर आवंटन कराने का कथित दावा
स्टिंग ऑपरेशन से जुड़ी जानकारी के अनुसार, संबंधित व्यक्ति कथित तौर पर सागरताल स्थित प्रधानमंत्री आवास योजना के फ्लैटों के संबंध में लोगों को आवंटन दिलाने का भरोसा दे रहा था। बातचीत में दावा किया गया कि वहां कुल 925 फ्लैट खाली हैं और उन्हें प्राप्त करने के लिए लगभग 85,000 आवेदन आ चुके हैं। साथ ही, फ्लैटों का पजेशन दिसंबर 2028 में दिए जाने की बात कही गई।
आरोप है कि संबंधित व्यक्ति ने अधिकारियों तक रिश्वत की राशि पहुंचाने की बात कहते हुए 1 BHK फ्लैट के लिए लगभग ₹2 लाख अग्रिम देने की मांग की। कथित बातचीत में यह भी कहा गया कि फ्लैट की कीमत लगभग ₹4 लाख होगी और शेष प्रक्रिया अगले महीने पूरी होने पर पहली किस्त जमा की जा सकेगी।
फ्लैटों के नाम पर लाखों रुपये की कथित वसूली का आरोप
स्टिंग ऑपरेशन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, विभिन्न श्रेणियों के फ्लैटों के लिए निम्नलिखित कीमतें बताई गईं:
1 BHK फ्लैट: लगभग ₹4 लाख
2 BHK फ्लैट: लगभग ₹20 लाख
3 BHK फ्लैट: लगभग ₹30 लाख
डुप्लेक्स: लगभग ₹40 लाख
बताया जा रहा है कि संबंधित व्यक्ति ने आवेदन भरने की अंतिम तारीख 28 अक्टूबर होने की बात भी कही। हालांकि, इन कीमतों, समय-सीमा, उपलब्ध फ्लैटों की संख्या और कथित भुगतान व्यवस्था की पुष्टि नगर निगम तथा संबंधित विभाग के आधिकारिक अभिलेखों से किया जाना आवश्यक है।
वीडियो में तोमर नाम के व्यक्ति की पहचान का संदेह, हेमंत योगी की भूमिका की जांच की मांग
उपलब्ध वीडियो को देखकर संबंधित व्यक्ति का उपनाम तोमर होने का संदेह व्यक्त किया जा रहा है। यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि वह प्रधानमंत्री आवास योजना से संबंधित कार्य करने वाले हेमंत योगी के लिए काम कर रहा है। फिलहाल, इन व्यक्तियों की कथित भूमिका और उनके बीच किसी आधिकारिक अथवा अनधिकृत संबंध की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना आवश्यक है।
प्रशासन से प्रमुख मांगें
इस मामले में नगर निगम आयुक्त ग्वालियर, जिला प्रशासन एवं संबंधित सतर्कता अथवा भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी से मांग की जाती है कि:
स्टिंग ऑपरेशन की तस्वीरों, वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग की निष्पक्ष एवं तकनीकी जांच कराई जाए।
सागरताल स्थित परियोजना में उपलब्ध फ्लैटों की वास्तविक संख्या, आवेदनों की स्थिति, पात्रता मानदंड और आवंटन प्रक्रिया का आधिकारिक विवरण सार्वजनिक किया जाए।
कथित तौर पर रिश्वत मांगने वाले व्यक्ति तथा जिन अधिकारियों या कर्मचारियों के नाम लिए जा रहे हैं, उनकी भूमिका की जांच की जाए।
यदि किसी व्यक्ति द्वारा सरकारी आवास आवंटित कराने के नाम पर अवैध राशि मांगे जाने की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाए।
आवेदकों को दलालों के माध्यम से भुगतान करने के बजाय केवल आधिकारिक माध्यमों से आवेदन एवं राशि जमा करने के संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं।
प्रधानमंत्री आवास योजना के वास्तविक पात्र हितग्राहियों के हितों की रक्षा करते हुए आवंटन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को आवास उपलब्ध कराना है, न कि उन्हें कथित दलाली या रिश्वत के दबाव में लाना। यदि सरकारी आवास के आवंटन के नाम पर अधिकारियों तक रिश्वत पहुंचाने का दावा करके अग्रिम राशि मांगी जा रही है, तो यह अत्यंत गंभीर विषय है। संबंधित एजेंसियों को उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर सच्चाई सामने लानी चाहिए, ताकि दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई हो और पात्र हितग्राहियों का सरकारी व्यवस्था पर विश्वास बना रहे।
मांग: इस पूरे प्रकरण की समयबद्ध, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराकर जांच के निष्कर्षों के आधार पर उचित कार्रवाई की जाए।
🔔 Vande Bharat News Alerts
नई प्रमुख खबरों की browser notification पाने के लिए Subscribe करें।







