भारतीय संस्कृति की आत्मा है शक्ति उपासना, युवाओं को इससे प्रेरणा लेनी चाहिए – अविराज सिंह

सागर।वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज रिपोर्टर सुशील द्विवेदी 8225072664 *युवा नेता अविराज सिंह ने कहा कि नवरात्र का पर्व आत्ममंथन, आत्मानुशासन और जीवन को सकारात्मक दिशा देने का अवसर है। यह पर्व हमें अपनी आंतरिक शक्तियों को पहचानने, बुराइयों पर विजय प्राप्त करने और समाज के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करने की प्रेरणा देता है।
आज के युवाओं को नवरात्र के समय का उपयोग साधना, संयम और आत्मविकास के लिए करना चाहिए, ताकि वे जीवन में दृढ़ संकल्प, साहस और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें। उन्होंने पुरव्याऊ टोरी स्थित श्री सार्वजनिक दुर्गा महोत्सव में आरती में सहभागिता करते हुए मां दुर्गा की आराधना की तथा महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र का कंठस्थ पाठ किया।
उन्होंने कहा कि दुर्गा उपासना भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण परंपरा है, जो मनुष्य को अन्याय, अहंकार और नकारात्मकता के विरुद्ध संघर्ष करने की प्रेरणा देती है। अविराज सिंह ने कहा कि भारतीय संस्कृति में शिव और शक्ति का संबंध सृष्टि के मूल भाव को अभिव्यक्त करता है।
शिव को चेतना और शक्ति को उसकी सक्रिय अभिव्यक्ति के रूप में देखा जाता है। मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूप जीवन में तप, त्याग, संयम, सदाचार और कर्तव्यनिष्ठा जैसे गुणों को अपनाने का संदेश देते हैं।
मां शैलपुत्री प्रकृति और जीव-जंतुओं के संरक्षण की प्रेरणा देती हैं, जबकि मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप साधना, तपस्या और आत्मसंयम का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र का नियमित और श्रद्धापूर्वक पाठ साधक के मन में साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मकता का संचार करता है।
नवरात्र में शक्ति की आराधना का विशेष महत्व है, क्योंकि यह पर्व व्यक्ति को अपनी कमजोरियों पर विजय प्राप्त करने, कठिन परिस्थितियों का सामना करने और जीवन में उच्च आदर्शों को अपनाने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम द्वारा देवी दुर्गा की आराधना से जुड़ा प्रसंग शक्ति, समर्पण और दृढ़ संकल्प का संदेश देता है।
भारतीय धार्मिक परंपराओं में मां दुर्गा को साहस, सामर्थ्य और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक माना गया है। शक्ति उपासना का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत कल्याण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से समाज में न्याय, सद्भाव, सेवा और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने की प्रेरणा भी मिलती है।
उन्होंने कहा कि मातृशक्ति का सम्मान भारतीय संस्कृति की आधारशिला है। महिलाओं की भूमिका परिवार के निर्माण से लेकर समाज और राष्ट्र के विकास तक महत्वपूर्ण है।
नवरात्र जैसे पर्व तभी सार्थक होंगे, जब हम देवी की पूजा के साथ समाज में प्रत्येक महिला को सम्मान, सुरक्षा और समान अवसर देने का संकल्प भी निभाएंगे। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे धार्मिक परंपराओं के मूल संदेश को अपने आचरण में उतारें और समाज में सकारात्मक परिवर्तन के सहभागी बनें।
अविराज सिंह ने कहा कि नवरात्र के अवसर पर कन्या पूजन के साथ कन्या सुरक्षा, महिला सम्मान और सामाजिक समानता का संकल्प लेना भी आवश्यक है। देवी के विभिन्न स्वरूप नारी की शक्ति, करुणा, त्याग और सृजनशीलता का स्मरण कराते हैं।
इसलिए किसी भी समाज की प्रगति का आकलन वहां की महिलाओं की सुरक्षा, गरिमा और अवसरों से किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं को स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रेरणा लेते हुए निर्भयता, चरित्र निर्माण और राष्ट्रसेवा को अपने जीवन का उद्देश्य बनाना चाहिए।
महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र की आध्यात्मिक परंपरा मनुष्य को मानसिक दृढ़ता, आत्मविश्वास और कठिनाइयों से संघर्ष करने की प्रेरणा देती है। नवरात्र का वास्तविक संदेश तभी पूरा होगा, जब हम पूजा-पाठ के साथ अपने व्यवहार में भी संवेदनशीलता, अनुशासन और परोपकार को स्थान देंगे तथा समाज में व्याप्त कुरीतियों और भेदभाव को दूर करने के लिए आगे आएंगे।
उन्होंने कहा कि नवरात्र के अवसर पर वे सागर में आयोजित विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सहभागिता कर रहे हैं। इसी क्रम में अविराज सिंह सराफा तिगड्डा, बड़ा बाजार में श्री विनोद प्रजापति द्वारा आयोजित विशाल चुनरी यात्रा तथा मकरोनिया स्थित वैदिक वाटिका में श्री वैदिक वानखेड़े द्वारा आयोजित वैदिक संस्कृति रास गरबा महोत्सव 2026 में शामिल हुए ।
इसके साथ ही मोतीनगर चौराहे पर श्री दुर्गा अवतार महोत्सव समिति द्वारा आयोजित महाआरती तथा संत कवरराम वार्ड स्थित झूलेलाल गार्डन में सिंधी समाज महिला मंडल द्वारा आयोजित सिंधी समाज गरबा महोत्सव में भी सहभागिता की।
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