वंचित को तस्कर शाहिद उर्फ आडवाणी की अंतिम संस्कार हंगामा परिजनों ने एनकाउंटर को बताया हत्या।

वांछित गौ-तस्कर शाहिद उर्फ आडवाणी के अंतिम संस्कार पर हंगामा, परिजनों ने एनकाउंटर को बताया हत्या – 6 घंटे के गतिरोध के बाद सुपुर्द-ए-खाक। तावडू।
बीते बृहस्पतिवार को थाना रोजका मेव क्षेत्र के गांव भिरावटी के पास पुलिस मुठभेड़ में मारे गए वांछित गौ-तस्कर शाहिद उर्फ आडवाणी के सुपुर्द-ए-खाक को लेकर गांव खड़खड़ी में शुक्रवार को जमकर हंगामा हुआ और करीब 6 घंटे तक गतिरोध बना रहा। परिजनों और ग्रामीणों ने पुलिस एनकाउंटर पर गंभीर सवाल उठाते हुए शव का अंतिम संस्कार करने से साफ इंकार कर दिया और कहा कि यह एनकाउंटर नहीं बल्कि सोची समझी हत्या है, जिसमें पुलिस के साथ बाहरी लोगों और गांव के विरोधी गैंग की भूमिका रही है।
बता दें कि इससे एक दिन पहले नूंह के शहीद हसन खान मेवाती मेडिकल कॉलेज नल्हड़ में पोस्टमार्टम से पहले भी परिजनों, स्थानीय नेताओं और अधिवक्ताओं ने धरना-प्रदर्शन किया था और पुलिस-प्रशासन के बीच गतिरोध बना था। तब पुलिस अधीक्षक डॉ.
अर्पित जैन के निर्देश पर मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में जांच कमेटी नियुक्त करने और न्यायिक जांच कराने का आश्वासन देकर मामला शांत कराया गया था। पोस्टमार्टम बोर्ड की निगरानी में कराया गया था।
लेकिन शव कब्जे में लेने के बाद गांव पहुंचते ही परिजनों ने फिर से हंगामा शुरू कर दिया। मृतक के भाई हबीब सहित अन्य परिजनों ने मांग की कि संबंधित पुलिसकर्मियों और गांव के चार लोगों पर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाए, नहीं तो वे अंतिम संस्कार नहीं करेंगे और तावडू-सोहना रोड जाम करेंगे।
इस चेतावनी के बाद गांव खड़खड़ी मे भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। मुठभेड़ पर सवाल उठाते हुए मृतक के भाई हबीब ने मीडिया के सामने दावा किया कि कल नल्हड़ मेडिकल कॉलेज में जब वे अपनी मांगों की लड़ाई लड़ रहे थे तब उनके पास सबूत नहीं थे, लेकिन अब उनके पास पुख्ता सबूत आ गए हैं।
परिजनों का दावा है कि उनके भाई का एनकाउंटर नहीं मर्डर हुआ है। उन्होंने कहा कि उन्होंने सीसीटीवी फुटेज निकाली है और सारे एविडेंस मिल गए हैं।
मुठभेड़ के दौरान जो साथी फरार बताए गए थे, उन्होंने ही सारी स्थिति की वीडियो रिकॉर्डिंग और बयान दिए हैं। परिजनों के अनुसार मौके पर चार प्राइवेट गाड़ियां दो कैंपर, एक बोलेरो और एक स्कॉर्पियो पायलट के रूप में आगे चल रही थीं और पीछे सरकारी बोलेरो गाड़ी थी।
प्राइवेट गाड़ियों में 10 से 15 लोग सवार थे। परिजनों ने सीधा आरोप लगाया कि इस हत्या को एनकाउंटर का रूप दिया गया है और इसे अंजाम देने वाले गांव के ही विरोधी लोग हैं, जो उनके पुराने दुश्मन हैं और जिन्होंने पूर्व में भी शाहिद पर गोली मारने की नीयत से फायरिंग की थी लेकिन वह बच गया था।
परिजनों ने मीडिया के सामने गांव के चार लोगों के नाम भी उजागर किए, जिन्हें अपराधी प्रवृत्ति का बताया जा रहा है और कहा कि प्रशासन को गुमराह कर यह हत्या कराई गई है। इस गतिरोध को खत्म करने के लिए प्रशासन हरकत में आया।
मौके पर तावडू शहर थाना प्रभारी चंद्रभान ने परिजनों को समझाते हुए कहा कि मामले में जो भी हुआ है उसकी न्यायिक जांच के लिए पुलिस अधीक्षक ने आदेश दे दिए हैं और एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट नियुक्त किए गए हैं। सूचना पर ड्यूटी मजिस्ट्रेट के रूप में तावडू बीडीपीओ अरुण कुमार भी मौजूद रहे।
इसके अलावा सदर थाना प्रभारी, नूंह सीआईए प्रभारी और तावडू सीआईए की टीम सहित भारी पुलिस बल आसपास के गांवों में तैनात रहा। परिजनों ने पुलिस के समक्ष लिखित में अपना मांग पत्र रखा जिसमें उन्होंने गांव के चार लोगों और पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की।
करीब 3 घंटे तक बंद कमरे में ग्रामीणों और पुलिस अधिकारियों के बीच लंबी वार्ता चली और कुल 6 घंटे के गतिरोध के बाद आखिरकार डीएसपी अभिमन्यु लोहान के आश्वासन पर ग्रामीण मान गए। मृतक के दो भाइयों को पैरोल पर अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए लाया गया था।
इसके बाद सैकड़ों ग्रामीणों और आसपास के लोगों की मौजूदगी में पुलिस की निगरानी में शाहिद उर्फ आडवाणी को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। उल्लेखनीय है कि शाहिद उर्फ आडवाणी एक वांछित हिस्ट्रीशीटर अपराधी था, जिस पर हरियाणा, राजस्थान सहित तीन राज्यों में करीब 70 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं।
अधिकतर मामले गौ-तस्करी, पुलिस पार्टी पर जानलेवा हमला, हत्या का प्रयास, सरकारी कार्य में बाधा, चोरी, एटीएम लूट और महिला विरुद्ध अपराधों से जुड़े हैं। पुलिस का कहना है कि वह मोस्ट वांटेड की सूची में था और कई बार पुलिस को चकमा दे चुका था।
🔔 Vande Bharat News Alerts
नई प्रमुख खबरों की browser notification पाने के लिए Subscribe करें।







