जिला रिपोर्टर सुरेश चौहान आगर मालवा मध्य प्रदेश कच्चे दूध के कारोबार से खड़ा किया लाखों का साम्राज्य, अब सालाना 50 से 60 लाख की कमाई! पीएमएफएमई योजना से बदली विनोद राठौर की तकदीर,

आगर-मालवा, 17 अक्टूबर। मेहनत, लगन और सही मार्गदर्शन मिल जाए तो छोटे कारोबार को भी बड़ी सफलता में बदला जा सकता है। इसकी मिसाल जिले के सुसनेर विकासखंड के ग्राम मोड़ी निवासी विनोद कुमार राठौर हैं। कभी कच्चा दूध बेचकर सीमित आय अर्जित करने वाले विनोद आज मिल्क प्रोसेसिंग यूनिट के जरिए सालाना 50 से 60 लाख रुपये की कमाई कर रहे हैं। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) ने उनके कारोबार को नई पहचान देने के साथ पूरे परिवार को आत्मनिर्भर बनाने का रास्ता खोला है।
*कच्चे दूध से शुरू हुआ सफर, अब तैयार कर रहे कई उत्पाद*
विनोद कुमार राठौर पहले केवल कच्चे दूध की बिक्री करते थे। इससे होने वाली आय सीमित थी। उन्होंने समझा कि दूध से विभिन्न उत्पाद तैयार कर बाजार में उतारने से कारोबार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। इसी सोच के साथ उन्होंने अपने व्यवसाय का विस्तार करने का निर्णय लिया और उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग से संपर्क किया।
विभागीय अधिकारियों के मार्गदर्शन में उन्होंने पीएमएफएमई योजना के तहत मिल्क प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने की योजना बनाई। इसके बाद परियोजना रिपोर्ट तैयार करने से लेकर बैंक ऋण की स्वीकृति और खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप प्रसंस्करण तक उन्हें तकनीकी एवं वित्तीय मार्गदर्शन मिला।
*35 प्रतिशत अनुदान से कारोबार को मिली नई उड़ान*
योजना के तहत विनोद राठौर को 35 प्रतिशत क्रेडिट लिंक्ड अनुदान का लाभ मिला। बैंक ऋण और अनुदान की सहायता से उन्होंने अपनी इकाई में आधुनिक मशीनें स्थापित कीं। इनमें पाश्चराइजर, खोया मशीन, पनीर प्रेस और डीप फ्रीजर जैसे उपकरण शामिल हैं।
आधुनिक मशीनों की मदद से अब उनकी यूनिट में स्वच्छता के निर्धारित मानकों के अनुरूप पनीर, मावा, खोया, दही, लस्सी, मक्खन और शुद्ध देशी घी का उत्पादन किया जा रहा है। कच्चे दूध की बिक्री तक सीमित रहने वाला कारोबार अब दूध से बनने वाले कई उत्पादों के जरिए बाजार में अपनी पहचान बना चुका है।
*सालाना 50 से 60 लाख रुपये की आय, 8 सदस्य भी बने आत्मनिर्भर*
मिल्क प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना के बाद विनोद राठौर के कारोबार में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। अब इस व्यवसाय से उनके परिवार को सालाना 50 से 60 लाख रुपये की आय प्राप्त हो रही है। इस इकाई की खास बात यह है कि परिवार के सभी आठ सदस्य कारोबार से जुड़े हैं और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
इसके साथ ही यूनिट के संचालन और उत्पादों के वितरण से स्थानीय स्तर पर भी रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। इस तरह विनोद की सफलता केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि दूसरे लोगों के लिए भी स्वरोजगार की प्रेरणा बन रही है।
*योजना ने दिया उद्यमी बनने का अवसर*
विनोद कुमार राठौर का कहना है कि प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना ने उनके व्यवसाय को नई पहचान दी है। आधुनिक मशीनों, वित्तीय सहायता और विभागीय मार्गदर्शन से उन्हें अपना कारोबार बढ़ाने का अवसर मिला। आज उनका पूरा परिवार इसी व्यवसाय से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रहा है।
उन्होंने इस सफलता के लिए उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग तथा केंद्र और राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया।
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