आगर-मालवा। महंगाई की बढ़ती मार ने मध्यमवर्गीय परिवारों का घरेलू बजट बिगाड़ दिया है। रोजमर्रा की जरूरतों से लेकर त्योहारों की खरीदारी तक खर्च बढ़ने से परिवारों के सामने आर्थिक संतुलन बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है। दिवाली पर बाजारों में रौनक के बीच खरीदारी का बढ़ता बोझ त्योहार के बाद परेशानी बढ़ा सकता है।
*रसोई से बाजार तक महंगाई का असर*
खाद्य तेल, आटा, दाल, सब्जियां और अन्य जरूरी वस्तुओं पर बढ़ते खर्च से परिवारों की बचत प्रभावित हो रही है। वहीं, सीमित वेतन में घर चलाना, बच्चों की फीस भरना और आकस्मिक जरूरतों के लिए पैसा बचाना मुश्किल होता जा रहा है।
*आकर्षक ऑफर, कर्ज का खतरा*
त्योहारी सीजन में 'नो-कॉस्ट ईएमआई', भारी छूट और 'अभी खरीदें, बाद में भुगतान करें' जैसे ऑफर लोगों को खरीदारी के लिए आकर्षित करते हैं। लेकिन आय का आकलन किए बिना की गई खरीदारी भविष्य में आर्थिक बोझ बढ़ा सकती है। क्रेडिट कार्ड का भुगतान समय पर नहीं करने पर ब्याज और अतिरिक्त शुल्क भी परेशानी बढ़ा सकते हैं।
*समझदारी से करें खरीदारी*
विशेषज्ञों की सामान्य वित्तीय सलाह है कि त्योहारों पर खर्च करने से पहले बजट निर्धारित करें। गैरजरूरी खरीदारी से बचें और राशन, बच्चों की फीस तथा आपातकालीन जरूरतों के लिए पैसा सुरक्षित रखें।
त्योहार हर साल आते हैं, लेकिन आर्थिक संकट से बचना जरूरी है। खुशियां मनाएं, मगर अपनी आय और बजट की सीमा में रहकर।