अहंकारी रावण की स्वर्णनगरी में हनुमान का हाहाकार, धू-धू कर जली लंका

महुली की 80वीं रामलीला में लंका दहन का भव्य मंचन, रावण के सशक्त अभिनय ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध; पूर्व विधायक हरिराम चेरो ने भगवान श्रीराम की आरती कर लिया आशीर्वाद
महुली, सोनभद्र(राकेश कुमार कन्नौजिया)_दुद्धी ब्लॉक के महुली स्थित श्री राजा बरियार शाह खेल मैदान में चल रही 80वीं रामलीला के दसवें दिन शनिवार की रात लंका दहन लीला का भव्य एवं रोमांचकारी मंचन किया गया। पवनपुत्र हनुमान के अद्भुत पराक्रम, दशानन रावण के अहंकार और सोने की लंका में मचे हाहाकार के जीवंत दृश्यों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
रामभक्त हनुमान के जयकारों से पूरा रामलीला मैदान गूंज उठा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दुद्धी के पूर्व विधायक हरिराम चेरो ने भगवान श्रीराम, लक्ष्मण एवं पवनपुत्र हनुमान की आरती कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
इसके बाद रामलीला समिति के अध्यक्ष अरविंद जायसवाल एवं उपाध्यक्ष वीरेंद्र कुमार कन्नौजिया ने मुख्य अतिथि का माल्यार्पण कर अंगवस्त्र भेंट करके सम्मानित किया। इस अवसर पर पूर्व विधायक हरिराम चेरो ने कहा कि महुली की धरती ऐतिहासिक राजा बरियार शाह की धरती है।
इस गांव से उनका विशेष लगाव है। उन्होंने कहा कि इस धरती ने आईएएस, आईपीएस अधिकारियों से लेकर सांसद और विधायक तक दिए हैं।
यदि उन्हें पुनः विधायक बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ तो महुली में रामलीला और दुर्गापूजा के आयोजन की समुचित व्यवस्था कराने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि रामलीला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों, त्याग, सत्य और धर्म का संदेश जन-जन तक पहुंचाने वाला सशक्त माध्यम है।
इसके बाद मंच पर लंका दहन की लीला ने ऐसा रोमांच पैदा किया कि दर्शक देर रात तक मंचन में डूबे रहे। कथा के अनुसार, माता सीता की खोज में लंका पहुंचे हनुमान जी ने अशोक वाटिका में उन्हें खोजा और प्रभु श्रीराम का संदेश देकर उन्हें धैर्य बंधाया।
माता सीता से भेंट के बाद हनुमान जी ने रावण की शक्ति और उसके अभिमान को चुनौती देने के उद्देश्य से अशोक वाटिका में फल खाए और वृक्षों को उजाड़ दिया। रावण के आदेश पर पहुंचे राक्षसों का उन्होंने डटकर मुकाबला किया।
इसके बाद मेघनाद ने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर हनुमान जी को बंदी बनाकर रावण के दरबार में प्रस्तुत किया। दरबार में बैठे दशानन रावण ने अपने दस सिरों के अभिमान और विशाल साम्राज्य की शक्ति का प्रदर्शन करते हुए हनुमान जी को भयभीत करने का प्रयास किया।
रावण ने क्रोध से गरजते हुए उनकी निर्भीकता पर प्रश्न उठाए और अपने पराक्रम का बखान किया। लेकिन रामदूत हनुमान उसके सामने तनिक भी विचलित नहीं हुए।
उन्होंने निर्भीकता से रावण को प्रभु श्रीराम की शरण में आने और माता सीता को सम्मानपूर्वक लौटाने की सलाह दी। हनुमान जी की खरी-खरी बातें सुनकर रावण का अहंकार और भड़क उठा।
उसने क्रोध में आकर हनुमान जी की पूंछ में आग लगाने का आदेश दे दिया। राक्षसों ने हनुमान जी की पूंछ में कपड़े लपेटकर आग लगा दी।
इसके बाद पवनपुत्र ने अपने लघु रूप को त्यागकर विशाल रूप धारण किया और एक महल से दूसरे महल तक छलांग लगाते हुए स्वर्णनगरी लंका को आग के हवाले कर दिया। देखते ही देखते रावण की सोने की लंका धू-धू कर जलने लगी।
चारों ओर अफरा-तफरी मच गई और रावण का वैभव उसकी आंखों के सामने राख में बदलता दिखाई दिया। इस दृश्य ने दर्शकों को यह संदेश दिया कि अहंकार चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः सत्य, धर्म और प्रभु की भक्ति के सामने टिक नहीं सकता।
रावण के अभिनय में डॉ. राकेश कुमार कन्नौजिया ने अपने दमदार संवाद, प्रभावशाली भाव-भंगिमा और ओजपूर्ण प्रस्तुति से विशेष छाप छोड़ी।
उनके सशक्त अभिनय ने दशानन के अहंकार, क्रोध और राजसी ठाठ को मंच पर जीवंत कर दिया। वहीं हनुमान के रूप में कृष्ण मुरारी कन्नौजिया ने अपने पराक्रमपूर्ण अभिनय से दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।
राम की भूमिका में अमरेश कुमार कन्नौजिया, लक्ष्मण के रूप में निखिल कुमार कन्नौजिया, सुग्रीव के रूप में शिवनारायण शर्मा तथा सुरसा की भूमिका में दयाराम कन्नौजिया सहित अन्य कलाकारों ने अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीत लिया। इस मौके पर रामलीला मंडली के व्यास दिलीप कुमार कन्नौजिया, निर्देशक विश्वनाथ शर्मा, महंत दयाराम कन्नौजिया, प्रेमचंद कन्नौजिया सहित रामलीला समिति के पदाधिकारी, सदस्य एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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