रेवाड़ी पुलिस का ‘साइबर सुरक्षा माह’ अभियान लगातार जारी -व्हाट्सएप हैकिंग और ‘अकाउंट टेकओवर’ के खिलाफ थाना रोहड़ाई पुलिस ने 150 विद्यार्थियों को सिखाए साइबर सुरक्षा के गुर

रेवाड़ी (सुरेश सिहाग) डिजिटल युग में तेजी से बदलते साइबर अपराधों के तरीकों पर प्रभावी अंकुश लगाने तथा आमजन, युवाओं व वरिष्ठ नागरिकों को साइबर सुरक्षा के प्रति सजग, सतर्क एवं आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से रेवाड़ी पुलिस द्वारा संपूर्ण अक्टूबर माह को 'साइबर सुरक्षा माह' के रूप में मनाया जा रहा है। पुलिस अधीक्षक रेवाड़ी श्री हेमेंद्र कुमार मीणा, आईपीएस के कुशल मार्गदर्शन में चलाए जा रहे इस विशेष अभियान के अंतर्गत जिले के शिक्षण संस्थानों, औद्योगिक क्षेत्रों, ग्रामीण अंचलों तथा व्यस्त सार्वजनिक स्थलों पर प्रतिदिन लक्षित जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।
बढ़ते साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने और युवा पीढ़ी को डिजिटल रूप से सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से आज थाना रोहड़ाई पुलिस द्वारा शहीद लांस नायक होशियार सिंह राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय गांव गुरावडा में एक विशेष साइबर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में थाना रोहड़ाई से पीएसआई नवीन कुमार ने मुख्य रूप से शिरकत की और विद्यालय के कुल 150 विद्यार्थियों को 'अकाउंट टेकओवर' एवं 'व्हाट्सएप व सोशल मीडिया हैकिंग' के प्रति विस्तार से जागरूक किया।
पीएसआई नवीन कुमार ने विद्यार्थियों को बताया कि आज के डिजिटल दौर में साइबर अपराधी तकनीक का गलत इस्तेमाल कर आमजन के सोशल मीडिया अकाउंट्स को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने स्क्रीन शेयरिंग, फिशिंग लिंक और धोखे से कोड हासिल करने की कार्यप्रणाली को सरल भाषा में समझाते हुए बताया कि ठग किस प्रकार किसी व्यक्ति से ओटीपी या डिवाइस लिंकिंग कोड प्राप्त कर लेते हैं और कुछ ही सेकंड में पीड़ित के व्हाट्सएप व अन्य सोशल मीडिया अकाउंट्स का पूरा नियंत्रण अपने हाथ में ले लेते हैं।
अकाउंट हैक होने के बाद कैसे होती है ठगी?
पीएसआई नवीन कुमार ने स्पष्ट किया कि एक बार व्हाट्सएप या सोशल मीडिया अकाउंट का नियंत्रण ठगों के पास चले जाने के बाद, वे पीड़ित के परिचितों, दोस्तों और रिश्तेदारों को आपातकालीन स्थिति या बीमारी का बहाना बनाकर पैसों की मांग करते हैं। इसके अलावा, अकाउंट की निजी जानकारियों का दुरुपयोग कर ब्लैकमेलिंग जैसी घटनाओं को भी अंजाम दिया जाता है।
विद्यार्थियों को दिए गए मुख्य सुरक्षा सुझाव:
जागरूकता सत्र के दौरान विद्यार्थियों को साइबर ठगों के जाल से बचने के लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण सावधानियां बरतने के निर्देश दिए गए:
ओटीपी व लिंकिंग कोड गोपनीय रखें: किसी भी अनजान व्यक्ति, संदिग्ध कॉल या मैसेज के झांसे में आकर अपने मोबाइल पर आया 6 अंकों का व्हाट्सएप रजिस्ट्रेशन कोड, ओटीपी या डिवाइस लिंकिंग कोड साझा न करें।
'लिंक्ड डिवाइसेस' की जांच करें:* अपने व्हाट्सएप की सेटिंग्स में जाकर समय-समय पर 'लिंक्ड डिवाइसेस' विकल्प को चेक करते रहें। यदि वहां कोई ऐसा कंप्यूटर या डिवाइस दिखे जिसे आप नहीं पहचानते, तो उसे तुरंत लॉग-आउट कर दें।
टू-स्टेप वेरिफिकेशन: अपने व्हाट्सएप और सभी सोशल मीडिया अकाउंट्स (इंस्टाग्राम, फेसबुक आदि) पर 'टू-स्टेप वेरिफिकेशन' या 'टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन' फीचर को अनिवार्य रूप से चालू रखें, ताकि ओटीपी लीक होने की स्थिति में भी कोई बिना पिन (PIN) के आपका अकाउंट चालू न कर सके।
अनजान लिंक व एपीके (APK) फाइलों से बचें: किसी भी लुभावने ऑफर, फ्री रिचार्ज या अनजान ग्रुप से आए संदिग्ध लिंक और डॉट एपीके फाइलों को डाउनलोड न करें।
कॉल फॉरवर्डिंग कोड से सावधान रहें: ठग अक्सर कस्टमर केयर या डिलीवरी बॉय बनकर *401* या *21* जैसे नंबर डायल करने को कहते हैं। ऐसे किसी भी कोड को डायल न करें, इससे आपके फोन की सभी कॉल्स और ओटीपी ठग के नंबर पर फॉरवर्ड हो जाते हैं।
कार्यक्रम के अंत में पीएसआई नवीन कुमार ने सभी 150 विद्यार्थियों से अपील की कि वे इस महत्वपूर्ण जानकारी को अपने माता-पिता, परिवार और आस-पड़ोस के लोगों के साथ भी साझा करें। उन्होंने बताया कि यदि किसी के साथ किसी भी प्रकार की साइबर ठगी या अकाउंट हैकिंग की घटना घटित होती है, तो बिना समय गंवाए तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या आधिकारिक पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। विद्यालय प्रबंधन ने पुलिस विभाग की इस जागरूकता पहल की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया
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