श्री बंशीधर नगर। अनुमंडल अस्पताल श्री बंशीधर नगर ओटी और विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध, फिर भी एक साल से नहीं हुआ सिजेरियन ऑपरेशन!

संवाददाता अखिलेश विश्वकर्मा गढ़वा ✅ श्री बंशीधर नगर। अनुमंडल अस्पताल श्री बंशीधर नगर की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। अस्पताल में ऑपरेशन थिएटर (ओटी) समेत सिजेरियन ऑपरेशन के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध होने और विशेषज्ञ चिकित्सकों की पदस्थापना के बावजूद पिछले एक वर्ष से एक भी सिजेरियन ऑपरेशन नहीं हुआ है। इसके कारण ऑपरेशन की आवश्यकता वाली गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए करीब 36 किलोमीटर दूर गढ़वा सदर अस्पताल रेफर किया जा रहा है। बीते एक वर्ष में ऐसी 216 गर्भवती महिलाओं को सदर अस्पताल भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
अनुमंडल अस्पताल स्थानीय क्षेत्र के लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। खासकर गर्भवती महिलाओं के लिए समय पर जांच, सुरक्षित प्रसव और आपात स्थिति में तत्काल उपचार की सुविधा बेहद जरूरी है। ऐसे में अस्पताल में सिजेरियन ऑपरेशन की सुविधा का एक वर्ष से उपयोग नहीं होना कई सवाल खड़े करता है। यदि अस्पताल में ऑपरेशन थिएटर और संबंधित संसाधन उपलब्ध हैं, साथ ही विशेषज्ञ चिकित्सक भी पदस्थापित हैं, तो सिजेरियन ऑपरेशन नहीं होने के पीछे क्या कारण हैं, यह जांच और स्पष्टीकरण का विषय है।
36 किलोमीटर दूर जाने की मजबूरी
सामान्य प्रसव संभव नहीं होने या चिकित्सकीय परिस्थितियों में सिजेरियन ऑपरेशन की आवश्यकता पड़ने पर गर्भवती महिलाओं को गढ़वा सदर अस्पताल रेफर करना पड़ता है। श्री बंशीधर नगर से सदर अस्पताल की दूरी करीब 36 किलोमीटर है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को समय, परिवहन और अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। विशेषकर प्रसव पीड़ा के दौरान मरीज को दूसरे अस्पताल तक ले जाना परिजनों के लिए चिंता का कारण बनता है।
आपात स्थिति में समय पर उचित चिकित्सा सुविधा मिलना मां और नवजात दोनों की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। ऐसे मामलों में रेफरल की व्यवस्था जरूरी हो सकती है, लेकिन यदि स्थानीय अस्पताल में आवश्यक सुविधाएं मौजूद हैं, तो उनका नियमित संचालन सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
एक वर्ष में 216 गर्भवती महिलाएं रेफर
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पिछले एक वर्ष में सिजेरियन ऑपरेशन की आवश्यकता वाली 216 गर्भवती महिलाओं को गढ़वा सदर अस्पताल रेफर किया गया। यह आंकड़ा अनुमंडल अस्पताल में सिजेरियन सेवाओं के संचालन को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की आवश्यकता दर्शाता है। हालांकि, इन महिलाओं को रेफर किए जाने के अलग-अलग चिकित्सकीय कारणों और प्रत्येक मामले की परिस्थितियों की जानकारी सामने आना भी जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि रेफरल किन कारणों से किया गया।
जिम्मेदारों की जवाबदेही पर सवाल
अस्पताल में ओटी, आवश्यक संसाधन और विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता के बावजूद सिजेरियन ऑपरेशन नहीं होने की स्थिति में स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रबंधन की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। यह जानना जरूरी है कि क्या उपकरणों के संचालन, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, अन्य आवश्यक चिकित्सा कर्मियों, दवाओं, रक्त की उपलब्धता, तकनीकी व्यवस्था या किसी अन्य कारण से ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। इन बिंदुओं पर आधिकारिक जानकारी मिलने से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
स्वास्थ्य विभाग से अपेक्षा
स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों के हित में स्वास्थ्य विभाग को इस मामले की समीक्षा कर सिजेरियन सेवाएं बंद रहने के कारणों की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। यदि किसी संसाधन, विशेषज्ञ या तकनीकी व्यवस्था की कमी के कारण ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं, तो उसे दूर करने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए। वहीं, यदि सभी जरूरी व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं, तो सेवा संचालन में आ रही बाधाओं को दूर कर अस्पताल में सुरक्षित प्रसव की सुविधा बहाल करने पर ध्यान देना चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब अनुमंडल अस्पताल में सिजेरियन ऑपरेशन के लिए ओटी, संसाधन और विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध बताए जा रहे हैं, तो पिछले एक वर्ष से एक भी ऑपरेशन क्यों नहीं हुआ? स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस संबंध में आधिकारिक स्पष्टीकरण आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
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