बस्ती: महादेवा विधायक दूध राम ने नगर थाने के प्रभारी राम प्रसाद यादव के खिलाफ मुख्यमंत्री को लिखा पत्र।

अजीत मिश्रा (खोजी)
खाकी पर उठे गंभीर सवाल: महादेवा विधायक के निशाने पर नगर थानेदार, मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
- सीधा वार: थानेदार पर जनता से जबरन वसूली करने और फरियादियों के साथ दुर्व्यवहार करने का गंभीर आरोप।
- सरकार की बदनामी: विधायक ने पत्र में लिखा कि थानाध्यक्ष का क्षेत्र में बने रहना सरकार की छवि खराब कर रहा है।
- हटाए जाने की मांग: विधायक ने मुख्यमंत्री से थानाध्यक्ष को विधानसभा क्षेत्र से तत्काल हटाने की मांग की है।
- उच्च अधिकारियों को भेजी प्रति: मुख्यमंत्री के साथ-साथ एसपी बस्ती और डीआईजी बस्ती परिक्षेत्र को भी भेजी गई शिकायत की प्रतिलिपि।
- बड़ा सवाल: जब विधायक को ही लिखनी पड़ी चिट्ठी, तो आम फरियादियों की सुनवाई कैसे होती होगी?
बस्ती:उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में जनप्रतिनिधि और पुलिस प्रशासन के बीच का टकराव अब खुलकर सामने आ गया है। महादेवा विधानसभा क्षेत्र (311) से विधायक दूध राम ने नगर थाने के प्रभारी (थानाध्यक्ष) राम प्रसाद यादव की कार्यप्रणाली के खिलाफ सीधा मोर्चा खोलते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक तीखा पत्र लिखा है। विधायक द्वारा मुख्यमंत्री को भेजी गई इस चिट्ठी के सार्वजनिक होने के बाद से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।

जबरन वसूली और दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप
विधायक दूध राम द्वारा लिखे गए पत्र में नगर थानेदार पर बेहद गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पत्र के मुताबिक, थानाध्यक्ष राम प्रसाद यादव पर जनता से जबरन वसूली करने और थाने पहुंचने वाले फरियादियों के साथ दुर्व्यवहार करने की लगातार शिकायतें मिल रही हैं। विधायक ने दो टूक शब्दों में कहा है कि आम जनमानस थानाध्यक्ष की इस तानाशाहीपूर्ण कार्यप्रणाली से बेहद आक्रोशित और परेशान है।
”थानेदार का रहना यानी सरकार की बदनामी”
पत्र में विधायक ने कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए यहां तक कहा है कि ऐसे भ्रष्ट और जनविरोधी अधिकारी का क्षेत्र में थानाध्यक्ष के रूप में बने रहना सीधे तौर पर सरकार की छवि को धूमिल करना और बदनामी कराना है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की है कि जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए थानाध्यक्ष को तत्काल प्रभाव से उनके विधानसभा क्षेत्र से हटाया जाए, ताकि आम जनता राहत की सांस ले सके।
उच्च अधिकारियों को भी भेजी गई प्रतिलिपि
इस सनसनीखेज शिकायत की प्रतिलिपि केवल मुख्यमंत्री तक ही सीमित नहीं रखी गई है, बल्कि इसकी प्रतियां पुलिस अधीक्षक (एसपी) जनपद बस्ती और पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) बस्ती परिक्षेत्र को भी भेजी गई हैं।
बड़ा सवाल: क्या होगी त्वरित कार्रवाई?
यह पूरा मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब एक चुने हुए जनप्रतिनिधि यानी विधायक को अपनी ही क्षेत्र की पुलिस के खिलाफ मुख्यमंत्री तक गुहार लगानी पड़ रही है, तो आम और बेसहारा फरियादियों की थानों में क्या सुनवाई होती होगी?
फिलहाल, वायरल हुई इस चिट्ठी ने पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब देखना यह होगा कि इस उच्च-स्तरीय शिकायत के बाद शासन-प्रशासन और पुलिस के उच्च अधिकारी इस थानेदार पर क्या और कब तक कार्रवाई करते हैं।
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