बस्ती वन विभाग में भ्रष्टाचार का बड़ा खेल: GeM पोर्टल खरीद से लेकर वृक्षारोपण और वन विहार में लाखों की बंदरबांट के आरोप

अजीत मिश्रा (खोजी)
🌲वन विभाग में भ्रष्टाचार का बड़ा खेल! बस्ती में सरकारी खरीद से लेकर वन विहार तक कमीशनखोरी का आरोप🌲
- पर्यावरण संरक्षण के नाम पर लूट: बस्ती में वृक्षारोपण और संत रविदास वन विहार के विकास में करोड़ों के घोटाले की आशंका
- बस्ती वन विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में: खरीद से लेकर परियोजनाओं तक कमीशनखोरी के गंभीर आरोप
- बस्ती: वन विभाग में कमीशनखोरी का खेल, GeM पोर्टल खरीद और वृक्षारोपण पर उठे सवाल
- संत रविदास वन विहार और चंदोताल परियोजना में वित्तीय अनियमितता के आरोप, जांच की मांग
- सरकारी धन की लूट! बस्ती वन विभाग में फाइलों से लेकर जमीन तक भ्रष्टाचार के साये
बस्ती। पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण के नाम पर आवंटित होने वाला सरकारी धन क्या बस्ती वन विभाग में बंदरबांट की भेंट चढ़ रहा है? विभाग से जुड़े सूत्रों और सामने आ रहे दस्तावेजों के हवाले से बेहद गंभीर आरोप लग रहे हैं, जिसने पूरे विभाग की कार्यप्रणाली को जांच के कठघरे में खड़ा कर दिया है।
जेम पोर्टल खरीद में कमीशनखोरी का आरोप
आरोपों के केंद्र में है सरकारी खरीद की प्रक्रिया। आरोप है कि जेम (GeM) पोर्टल के माध्यम से होने वाली खरीद में पारदर्शिता के नाम पर बड़ा खेल किया जा रहा है। कार्यालय में तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर निखिल गुप्ता की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
सूत्रों का आरोप है कि जेम पोर्टल पर सामानों की खरीद में विक्रेताओं से कथित तौर पर कमीशन तय किया जाता है और उसी आधार पर ऑर्डर दिए जाते हैं। सवाल यह है कि एक कंप्यूटर ऑपरेटर स्तर के कर्मचारी का खरीद प्रक्रिया में इतना दखल कैसे? क्या यह सब किसी बड़े अधिकारी के संरक्षण के बिना संभव है?
वर्ष 2026 वृक्षारोपण में लाखों के घोटाले की आशंका
सबसे बड़ा आरोप वर्ष 2026 के वृक्षारोपण कार्यों को लेकर है। आरोप है कि वृक्षारोपण के लिए पौध, खाद, ट्री गार्ड, बांस-बल्ली और मजदूरी के नाम पर कागजों में लाखों रुपये का खर्च दिखाया गया है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और है। अगर स्वतंत्र रूप से स्थलीय सत्यापन और स्टॉक रजिस्टर का मिलान हो तो लाखों के घोटाले का खुलासा हो सकता है।
संत रविदास वन विहार और चंदोताल परियोजना घेरे में
भ्रष्टाचार के आरोप केवल खरीद तक सीमित नहीं हैं। बस्ती के बहुचर्चित संत रविदास वन विहार की परियोजनाएं भी सवालों के घेरे में हैं। आरोप है कि वन विहार के सौंदर्यीकरण, निर्माण और रखरखाव की विभिन्न परियोजनाओं में लगभग 60 से 70 लाख रुपये की बंदरबांट की गई है।
इसी तरह चंदोताल के विकास के नाम पर आवंटित करीब 50 लाख रुपये के बजट में भी गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लग रहा है। काम अधूरा, गुणवत्ता खराब और भुगतान पूरा – यही पैटर्न दोनों जगह दोहराए जाने की चर्चा है।
जांच के बिंदु जो उठ रहे हैं:
1. जेम पोर्टल ऑर्डर का ऑडिट: पिछले एक साल के सभी GeM ऑर्डर, L1 रेट से अधिक पर खरीद, और एक ही फर्म को बार-बार ऑर्डर देने की जांच हो।
2. वृक्षारोपण का भौतिक सत्यापन: 2026 में लगाए गए पौधों की संख्या, जीवित पौधों का प्रतिशत और नर्सरी स्टॉक रजिस्टर का मिलान।
3. वन विहार और चंदोताल की MB और बिल: संत रविदास वन विहार और चंदोताल में हुए कार्यों की मेजरमेंट बुक, एस्टीमेट और भुगतान बिलों की तकनीकी जांच।
4. ऑपरेटर की भूमिका की जांच: सरकारी खरीद और फाइलों के संचालन में कंप्यूटर ऑपरेटर की अनाधिकृत भूमिका कैसे तय हुई, इसकी विभागीय जांच।
खरीद से लेकर परियोजनाओं तक उठे इन सवालों ने वन विभाग की साख पर बट्टा लगा दिया है। सरकारी धन के खर्च का हिसाब अब सार्वजनिक होना चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल यही है – आखिर किसके संरक्षण में चल रहा है कमीशनखोरी का यह पूरा खेल? जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच बेहद जरूरी है। यदि शासन स्तर से जांच हुई तो कई चेहरों से भ्रष्टाचार का नकाब उतर सकता है।
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