कासगंज में लहरा गंगा घाट पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सैकड़ों कछुआ शावकों को मिला नया जीवन।

कासगंज में लहरा गंगा घाट पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सैकड़ों कछुआ शावकों को मिला नया जीवन। लहरा घाट पर कछुआ शावक विमोचन कार्यक्रम में विश्व वन्यजीव कोष के वरिष्ठ वैज्ञानिकों ब जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों सहित जन्तु विज्ञान से जुड़े विशेषज्ञों ने की शिरकत।
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कासगंज। (योगेश गुप्ता)जनपद कासगंज के गंगा नदी लहरा घाट पर "कछुआ शावक विमाेचन कार्यक्रम" विश्व वन्यजीव कोष WWF -INDIA द्वारा आयोजित किया गया।वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सैकड़ों कछुआ शावकों को नया जीवन मिला।
सनातन धर्म में जीव मात्र की सेवा और प्रकृति संरक्षण को सर्वोपरि माना गया है। इसी पावन परंपरा का साक्षात दर्शन आज उस समय हुआ, जब पर्यावरणविदों और वन विभाग के तत्वावधान में आयोजित एक विशेष संरक्षण कार्यक्रम के तहत सैकड़ों नवजात कछुआ शावकों (कछुए के बच्चों) को उनके प्राकृतिक आवास गंगा नदी के लहरा घाट पर " गंगा नदी के संरक्षण, जलीय जैव विविधता को बढ़ावा देने और नदी पुनर्जीवन (River Ranching) के लिए 240 (Pangshura smithii के 294 and Pangshura tintoria के 94)कछुओं के बच्चों को जल में प्रवाहित किया गया।कार्यक्रम के शुभारंभ में यजुर्वेद के इस सुप्रसिद्ध शांति मंत्र के साथ शावकों के दीर्घायु होने और जल पारिस्थितिकी (Aquatic Ecosystem) के कल्याण की प्रार्थना की गई:
" ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः,
पृथ्वी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः।
वनस्पतयः शान्तिर्विश्वे देवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः,
सर्वं शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
(अर्थ: हे ईश्वर! आकाश, अंतरिक्ष, पृथ्वी, जल, औषधियां, वनस्पतियां और संपूर्ण ब्रह्मांड शांत व कल्याणकारी हों।
जल (आपः) में विचरने वाले इन कूर्म रूपी जीवों का जीवन भी शांतिमय और सुरक्षित हो।)
इसके साथ ही भगवान नारायण के पौराणिक मंत्र "ॐ नमो भगवते कूर्मावताराय" का जाप करते हुए अक्षत और पुष्पों से इन नन्हें शावकों का अभिनंदन किया गया। इस योजना के तहत नदी के किनारे खेती करने वाले स्थानीय किसानों और 'गंगा मित्रों' की मदद से कछुओं के अंडों और घोंसलों को सुरक्षित बचाया जाता है।
अंडों से निकलने वाले बच्चों (Hatchlings) को शुरुआती सुरक्षा प्रदान करने के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किए गए नर्सरी तालाबों में पाला जाता है। ये बच्चे कुछ बड़े और मजबूत हो जाते हैं, तो इन्हें पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) और नदी की स्वच्छता को संतुलित रखने के लिए गंगा नदी में अनुकूलित ठिकानों पर विमुक्त किया जाता है।
इस मौके पर टीम में शामिल वैज्ञानिकों को स्नातकोत्तर जन्तु विज्ञान की फिशरीज व वन्य जीव विज्ञान की पढ़ाई का रिवीजन एवं प्रयोग दोनों करने का खूब मौका मिला । कार्यक्रम में राजकीय महाविद्यालय, कासगंज के प्राचार्य एवं जंतुविज्ञान के प्रमुख प्रो.एस.के.रावत ,जनपद के मुख्य विकास अधिकारी, जिला वन अधिकारी, बेसिक शिक्षा अधिकारी, WWF india विश्व वन्यजीव कोष से वरिष्ठ परियोजना अधिकारी ,
डॉ.
अमान उल्ला खान , सीनियर परियोजना अधिकारी बिजनौर, हिमांशु शर्मा , सीनियर परियोजना अधिकारी कासगंज, रामोतार परियोजना अधिकारी बिजनौर एंड कासगंज फील्ड एसोसिएट और किसान शामिल रहे।
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