बस्ती DFO कार्यालय में भ्रष्टाचार का नंगा नाच: नियमों को ताक पर रखकर चल रहा मनमानी का खेल!

अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती वन विभाग (DFO) कार्यालय: भ्रष्टाचार, मनमानी और प्रशासनिक अव्यवस्था का अड्डा?
🎯हरियाली बचाने वाला वन विभाग खुद भ्रष्टाचार की गिरफ्त में; DFO कार्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल।
🎯बस्ती: फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र से लेकर रिटायर स्ट्रेनो से सेवा तक, DFO ऑफिस में धज्जियां उड़ रहे नियम।
🎯ड्राफ्टमैन संभाल रहे अकाउंटेंट की कुर्सी, चहेतों पर मेहरबान DFO; कब जागेगा शासन-प्रशासन?
🎯बस्ती DFO कार्यालय: भ्रष्टाचार, फर्जीवाड़ा और मनमानी का नया अड्डा!
🎯नियम सिर्फ कागजों तक सीमित? बस्ती वन विभाग में वित्तीय धांधली के गंभीर आरोप।
🎯ऑपरेटर पर ‘विशेष कृपा’ और रिटायर कर्मियों का जलवा: सवालों के घेरे में बस्ती DFO की भूमिका।
बस्ती: जिले का वन विभाग (DFO) कार्यालय इन दिनों अपनी कार्यप्रणाली, प्रशासनिक मनमानी और गंभीर भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर सुर्खियों में है। कभी हरियाली और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाला यह विभाग अब नियमों की धज्जियां उड़ाने और कथित तौर पर कुछ चुनिंदा लोगों को उपकृत करने का केंद्र बनता जा रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या DFO कार्यालय में नियम-कानून सिर्फ कागजों तक सीमित रह गए हैं?
फर्जी अनुभव और ‘विशेष कृपा’: कंप्यूटर ऑपरेटर पर मेहरबानी क्यों?
विभाग की कार्यप्रणाली पर सबसे बड़ा सवाल एक कंप्यूटर ऑपरेटर की नियुक्ति और उसकी कार्यशैली को लेकर खड़ा हुआ है। आरोप है कि यह ऑपरेटर कथित तौर पर फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र के सहारे अनुचित लाभ लेने की फिराक में है।
हद तो तब हो गई जब विभाग में “समान कार्य-समान वेतन” की आड़ में न्यूनतम वेतन भुगतान का रास्ता तलाशने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस पूरे प्रकरण में DFO (प्रभागीय वनाधिकारी) की भूमिका सीधे तौर पर संदेह के घेरे में है। आखिर किस दबाव या साठगांठ के तहत इस ऑपरेटर पर विशेष अनुकंपा बरसाई जा रही है, यह जांच का गंभीर विषय है।
सेवानिवृत्त स्टेनो से सेवाएँ और ड्राफ्टमैन से अकाउंटेंट का खेल
विभाग में पदों और जिम्मेदारियों के तय नियमों की किस हद तक धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, इसकी बानगी इन दो मामलों से मिलती है:
- सेवानिवृत्त स्टेनो का मोह: नियमों को ताक पर रखकर सेवानिवृत्त स्टेनो अशोक कुमार वर्मा से अब भी सरकारी सेवाएँ ली जा रही हैं। जब नियम नियमित या अनुबंधित कर्मचारियों की पात्रता तय करते हैं, तो किस अधिकार के तहत एक रिटायर कर्मचारी पर विभाग मेहरबान है?
- ड्राफ्टमैन को अकाउंटेंट की कुर्सी: तकनीकी पद पर तैनात ड्राफ्टमैन दीपक सोनी से वित्तीय और लेखा-जोखा से जुड़ा ‘अकाउंटेंट’ का काम लिया जा रहा है। एक तकनीकी विशेषज्ञ से गैर-तकनीकी और संवेदनशील वित्तीय कार्य कराना न सिर्फ नियमों के खिलाफ है, बल्कि सरकारी धन के लेन-देन और उसकी पारदर्शिता पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।
सरकारी धन की बर्बादी और योजनाओं में धांधली के आरोप
वन विभाग की विभिन्न योजनाओं के संचालन, सरकारी धन के उपयोग और भुगतान की पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवालिया निशान लग चुके हैं। विभागीय धन का उपयोग जनहित या पर्यावरण विकास के बजाय कागजी खानापूरी और चहेतों को लाभ पहुँचाने के लिए किया जा रहा है। क्या जिले के उच्च अधिकारी और शासन-प्रशासन इन तमाम अनियमितताओं से अनजान है, या फिर संरक्षण की चादर ओढ़े सब कुछ नजरअंदाज किया जा रहा है?
जनता का सवाल: कब होगी निष्पक्ष जांच?
बस्ती DFO कार्यालय में चल रहा यह भ्रष्टाचार का खेल अब आम चर्चा का विषय बन चुका है। जनता और जागरूक नागरिकों के मन में बस एक ही सवाल है—
- क्या शासन-प्रशासन इन गंभीर आरोपों का संज्ञान लेगा?
- क्या इन तमाम मामलों की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष जांच कराई जाएगी?
- और सबसे अहम, नियमों को ताक पर रखने वाले इन लापरवाह और भ्रष्ट जिम्मेदारों पर कार्रवाई की तलवार कब चलेगी?
अगर समय रहते इन अनियंत्रित पटरियों को दुरुस्त नहीं किया गया, तो विभाग की साख पूरी तरह धूल में मिल जाएगी और जनता का तंत्र से भरोसा उठ जाएगा।
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