


डीडवाना-कुचामन। जिले के मीठडी गांव के प्रगतिशील कृषक देवकरण कुमावत ने आधुनिक तकनीक एवं जैविक तरीकों को अपनाकर स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू कर क्षेत्र में एक सराहनीय एवं नवाचारी पहल की है। उनका यह प्रयास न केवल उनकी आय में वृद्धि कर रहा है, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी एक प्रेरणादायी मॉडल बनकर उभरा है।
कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक हरिओम सिंह राणा ने बताया कि देवकरण कुमावत ने लगभग एक बीघा क्षेत्रफल में स्ट्रॉबेरी की खेती की है, जिसमें विंटर डॉन एवं कैम्ब्रिजा किस्मों के कुल 3000 पौधे लगाए गए हैं। फसल उत्पादन के लिए 12 बेड तैयार किए गए हैं, जिनकी कुल लंबाई लगभग 200 फीट है। यह उनकी पहली स्ट्रॉबेरी फसल हैं, जो वर्तमान में सफलतापूर्वक उत्पादन अवस्था में है। कृषक द्वारा स्ट्रॉबेरी की बिक्री 200 ग्राम के पैक में ₹50 की दर से की जा रही है, जिससे उन्हें अच्छा आर्थिक लाभ प्राप्त हो रहा है। वे जैविक खेती को प्राथमिकता देते हुए वर्मी कंपोस्ट, गोबर खाद एवं जैतिक पौषक तत्वों का उपयोग कर रहे हैं। इससे पौधों की जड़ों का बेहतर विकास हो रहा है और फलों की गुणवत्ता भी उत्कृष्ट बनी हुई है। इसके साथ ही उन्होंने मल्चिंग एवं लो-टनल तकनीक का सफलतापूर्वक प्रयोग किया है।
स्ट्रॉबेरी खेती से संबंधित तकनीकी जानकारी उन्हें कुचामन स्थित कृषि विस्तार एवं उद्यान विभाग तथा राजेंद्र ढाका से प्राप्त हुई। वहीं इस नवाचार के लिए संयुक्त निदेशक कृषि विस्तार, डीडवाना हरिओम सिंह राणा से उन्हें विशेष प्रेरणा मिली। कृषक द्वारा अक्टूबर माह में नर्सरी से पौध रोपण किया गया था, जिसके सकारात्मक परिणाम अब सामने आ रहे हैं।
देवकरण कुमावत एक आधुनिक एवं बहुफसली कृषक हैं। स्ट्रॉबेरी के साथ-साथ वे प्याज, गेहूं, टमाटर, हरा धनिया, गाजर एवं मूली जैसी फसलों का भी उत्पादन कर रहे हैं। उन्होंने विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेते हुए अपने खेत में सब्सिडी पर सोलर पंप, ड्रिप सिंचाई प्रणाली एवं फार्म पॉड का निर्माण करवाया है, जिससे सिंचाई व्यवस्था सुदृढ़ हुई है। ड्रिप, मल्चिंग एवं लो-टलल तकनीक का उपयोग वे अन्य सब्जी फसलों में भी कर रहे हैं, जिससे लागत में कमी और उत्पादन में वृद्धि संभव हो रही है।
कृषक अपनी पहली स्ट्रॉबेरी फसल से अत्यंत संतुष्ट हैं तथा आगामी वर्षों में इसके विस्तार को लेकर उत्साहित हैं। उनका मानना है कि आधुनिक तकनीक और जैविक तरीकों को अपनाकर किसान कम क्षेत्र में भी अधिक आय प्राप्त कर सकते हैं।
इस नवाचार से प्रेरित होकर कनिष्ठ अभियंता वैभव दाधीच, महेश भगत एवं राजू इनाणिया ने कृषक से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर उनके प्रयासों की सराहना की तथा इसे क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए आदर्श मॉडल बताया।







