
**रामचंडी महाविद्यालय सरायपाली बगईजोर में किया गया सरस्वती पूजन**

तिलक राम पटेल संपादक महासमुन्द वन्दे भारत लाइव टीवी न्यूज चैनल समृद्ध भारत अखबार
रामचंडी महाविद्यालय सरायपाली बगईजोर में राष्ट्रीय सेवा योजना के तत्वाधान में बसंत पंचमी के अवसर पर मां सरस्वती की पूजा बड़े धूम धाम से मनाई गई। सर्वप्रथम मां सरस्वती के मूर्ति पर द्वीप प्रज्ज्वलन व माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया तत्पश्चात् बी एड के छात्राओं के द्वारा सरस्वती वंदना की गई।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ एन के भोई जी छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि आज प्रकृति का कण-कण पुलकित है, हवाओं में नई उमंग है और चारों ओर पीली आभा बिखरी हुई है। आज ‘ऋतुराज’ बसंत के आगमन का उत्सव है। आज उस चेतना का दिन है, जिसने इस सृष्टि को वाणी दी, जिसने शून्य को संगीत दिया और जिसने अंधकार को ज्ञान के प्रकाश से परास्त किया। जिस तरह पतझड़ के बाद प्रकृति हार नहीं मानती और नए पल्लवों के साथ फिर से जी उठती है, बसंत हमें सिखाता है कि जीवन में कितनी ही बाधाएं आएं, हमें नई ऊर्जा के साथ फिर से खिलना है।
कला और संस्कृति का सम्मान: माँ सरस्वती के हाथों में स्थित ‘वीणा’ हमें संगीत और कला के प्रति प्रेम सिखाती है, तो ‘पुस्तक’ हमें निरंतर सीखने की प्रेरणा देती है।
सहायक प्राध्यापक रजनी प्रधान ने सिर्फ किताबों को पूजने से विद्या नहीं आती, बल्कि विद्या आती है उसे आत्मसात करने से। आइए, आज माँ शारदे के चरणों में यह संकल्प लें कि हम अपनी बुद्धि का उपयोग समाज के निर्माण में करेंगे, विनाश में नहीं। हम अज्ञानता के अंधेरे को मिटाएंगे और अपने चरित्र को इतना उज्ज्वल बनाएंगे कि वह दूसरों के लिए मशाल बन सके।
सहायक प्राध्यापक आर एस मांझी ने सुंदर सरस्वती भजन के माध्यम से छात्रों को प्रेरित किया।
इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापकगण एवं कर्मचारीगण व बड़ी संख्या में छात्र छात्राएं उपस्थित रहीं।






