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वर्तमान में मनुष्य के शरीर में रक्षस दूरबुध्दी के रूप में निवास करते हैं:-विदुषी प्रज्ञा पाराशर

ग्राम मलगांव में प्रज्ञा पुराण कथा का चौथा दिन

*”वर्तमान में मनुष्य के शरीर में राक्षस दुर्बुद्धि के रूप में निवास करते हैं – विदुषी प्रज्ञा पाराशर“*
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मलगांव में प्रज्ञा पुराण कथा का चौथा दिन
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बांगरदा(खरगोन) प्राचीनकाल में राक्षस शरीरधारी होते थे जो सज्जनों को कष्ट देते थे। ऋषि , संतो और साधकों द्वारा उनका संहार कर उनके आतंक से मुक्ति पाई जाती थी। कलयुग में राक्षस शरीरधारी न होते हुये दुर्बुद्धि के रूप में मन-मस्तिष्क में समाहित हैं जो सशरीर दिखाई तो नहीं देते किन्तु वे सज्जनों और भगवान का काम करने वाले लोगों को सताते हैं और विकास के मार्ग में बाधक बने हुये हैं।
उपरोक्त संदेश समीपस्थ ग्राम मलगांव में शांतिकुंज हरिद्वार में देवात्मा हिमालय की अग्नी से प्रज्ज्वलित अखण्ड दीपक तथा माता भगवती देवी शर्मा के जन्म शताब्दी के अवसर पर चल रही पांच दिवसीय प्रज्ञा पुराण कथा, 9 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ एवं संस्कार महोत्सव के अवसर पर आयोजित कथा के दौरान उपस्थित श्रोताओं के मध्य बहन कथावाचक प्रज्ञा पाराशर ने दिया। उन्होंने कहा सशरीर राक्षसों का नाश तो हो जाता था किन्तु वर्तमान में मनुष्य के मस्तिष्क में समाहित दुर्बुद्धि रूपी राक्षसों का नाथ करने के लिये गायत्री परिवार के संस्थापक पं. श्रीराम शर्मा आचार्य ने विचार क्रांतिअभियान योजना बनाई। जिसके माध्यम से बुरे विचारों के स्थान पर सद्विचारों की स्थापना की जा सके। उन्होंने बताया सद्विचारों की स्थापना के लिये व्यक्ति को भगवान के कार्यों में मना लगाना चाहिए, संत, महात्मा, साधकों के संपर्क में रहना चाहिए, सद्ग्रंथों का नियमित स्वाध्याय करना चाहिए, अवसर मिलने पर सत्संग का लाभ उठाना चाहिए, गाय माता की सेवा करना चाहिए तथा शुद्ध और सात्विक भोजना करना चाहिए।
राजा परीक्षित का वृतान्त सुनाते हुये उन्होंने कहा हमें यह मानना चाहिए भगवान ने हमें भी केवल 7 दिनों का समय दिया है। आठवां दिन किसी को भी नहीं मिलता। प्राप्त 7 दिनों में सत्कर्म और भगवान के कार्य कर मनुष्य जीवन को धन्य बनाना चाहिए। गायत्री महामंत्र के जाप के माध्यम से सद्बुद्धि को धारण कर प्रगति के रास्ते खोले जा सकते हैं। परिवार प्रबंधन में भी बुद्धि का महत्वपूर्ण योगदान होता है। जहां सभी मिलजुलकर रहते हैं, संयमित रहते हैं, आदर सम्मान का भाव रखते हैं, जगत जननी गायत्री को अपनाते हैं वे परिवार स्वर्ग के समान होते हैं।
प्रज्ञा गीतों की मनमोहक प्रस्तुती संगीत टोली के किरण दसोंदी, अनिल पाटील, नारायण भारद्वाज, रोहित चौहान , योगाचार्य योगेश पटेल ने प्रस्तुत की।
जिला मीडिया प्रभारी महेन्द्रसिंह पंवार ने बताया कि प्रातःकालीन पारी में नौ कुण्डीय गायत्री महायज्ञ के माध्यम से गर्भस्थ बहनों के पुंसवन संस्कार भी सम्पन्न हुये। दुर्गाराम मोराण्या, राधेश्याम मुकाती, सुनील मलगायां, डाॅ. कमलेश पुनास्या, रामचंद्र धोंगड़िया, भुवानीराम, प्रबंध ट्रस्टी जगदीश शाह, सह ट्रस्टी डाॅ. राधेश्याम बिर्ला, सुकदेव पटेल, अशोक कुमार सिंह सनावद, शिवनारायण परवाल सनावद, गायत्री साहित्य पटल के संचालक रविन्द्र दुबे, पुरुषोत्तम मालाकार, पूर्व सरपंच ठा. महेन्द्रसिंह पंवार कोटल्याखेड़ी, युवा मण्डल, प्रज्ञा मण्डल महिला मण्डल के परिजन, आसपास की शाखाओं के परिजनों सहित आसपास ग्रामों के अनेक श्रोता उपस्थित थे। संचालन युवा संगठन के जिला संयोजक धर्मेंद्र मुकाती ने किया। श्रोताओं के लिए पेयजल की व्यवस्था, टोली एवं समयदानी परिजनों की भोजन व्यवस्था में दुलिचंद भमोरिया सहित युवाओं की टीम का सराहनीय सहयोग मिल रहा है।
:-रामेश्वर फूलकर पत्रकार बांगरदा

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संबोधित करते हुए प्रज्ञा दीदी
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