
।। बलरामपुर: मध्याह्न भोजन में 11 करोड़ का बड़ा घोटाला, सवा महीने बाद भी 37 आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर।।
शनिवार 03 जनवरी 26, उत्तर प्रदेश।
बलरामपुर।। उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में मध्याह्न भोजन (एमडीएम) योजना के तहत 11 करोड़ रुपये से अधिक के सरकारी धन के गबन का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस बड़े घोटाले में कुल 44 लोगों को नामजद किया गया था, लेकिन घटना के सवा महीने बीत जाने के बाद भी पुलिस की कार्रवाई सुस्त नजर आ रही है। अब तक केवल सात आरोपियों की ही गिरफ्तारी हो सकी है, जबकि 37 आरोपी अब भी फरार हैं।
कैसे हुआ खुलासा?
यह पूरा मामला 26 नवंबर को प्रकाश में आया था, जब जांच के बाद एमडीएम योजना के धन में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की पुष्टि हुई। रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों, प्रधानाध्यापकों और बिचौलियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये का बंदरबांट किया गया। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्राथमिकी दर्ज की थी।
कार्रवाई की अब तक की स्थिति
27 नवंबर: मामला दर्ज होने के अगले ही दिन पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए जिला समन्वयक सहित 5 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
17 दिसंबर: करीब तीन सप्ताह के सन्नाटे के बाद पुलिस ने दो और आरोपियों को हिरासत में लिया।
वर्तमान स्थिति: कुल 44 नामजद आरोपियों में से अब तक मात्र 7 गिरफ्तारियां हुई हैं। शेष 37 आरोपी सवा महीने बाद भी पुलिस की पहुंच से दूर हैं, जिससे पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
विभागों ने कसी कमर: निलंबन की गाज
भले ही पुलिसिया कार्रवाई धीमी हो, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर विभाग सख्त रुख अपनाए हुए हैं:
बेसिक शिक्षा विभाग: बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) ने त्वरित कार्रवाई करते हुए घोटाले में संलिप्त 5 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को निलंबित कर दिया है।
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग: मदरसा शिक्षा से जुड़े 3 प्रधानाचार्यों और कुछ अन्य कर्मचारियों पर भी गाज गिरी है। इनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ पुलिस रिपोर्ट में भी नाम शामिल हैं।
पुलिस की भूमिका पर उठते सवाल
इतने बड़े वित्तीय घोटाले में मुख्य आरोपियों का अब तक फरार होना जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की आशंका बढ़ गई है। पुलिस की विशेष टीमें गठित होने के बावजूद सफलता न मिलना जांच की दिशा पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।








