
संवाददाता_राकेश कुमार कन्नौजिया
विंढमगंज सोनभद्र
दुद्धी ब्लॉक के ग्राम फुलवार जुड़वानिया में श्री सरस्वती नाट्यकला समिति द्वारा आयोजित पांच दिवसीय नाट्य उत्सव का समापन सोमवार की रात्रि “कलयुग का आरंभ” जैसे गूढ़ और शिक्षाप्रद नाटक के साथ हुआ।
यह नाट्य प्रस्तुति न केवल मनोरंजन का माध्यम बनी, बल्कि धर्म, नीति और मानवता के पतन की गहरी सीख छोड़ गई।
मुख्य अतिथि जुबेर आलम (जिला पंचायत सदस्य बाघडू), विशिष्ट अतिथि राजू शर्मा (युवा समाजसेवी दुद्धी), डॉ. सरजू प्रसाद गुप्ता एवं गोविंदा ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया।
समिति के अध्यक्ष दिनेश यादव (ग्राम प्रधान फुलवार) की ओर से सभी कलाकारों को अंगवस्त्र मुख्य अतिथि के करकमलों द्वारा सम्मानित किया गया।मुख्य अतिथि जुबेर आलम ने कहा— “ऐसे मंचन हमारी संस्कृति की आत्मा हैं। जब गांवों में धर्म और कला एक साथ जीवंत होती है, तो समाज में जागृति का नया सूर्योदय होता है।”नाटक का सार — जब धर्म हुआ आहत और आरंभ हुआ कलयुग नाटक की कथा राजा परीक्षित के समय से आरंभ होती है। धर्मराज युधिष्ठिर के वंशज परीक्षित अपने न्यायप्रिय और धर्मनिष्ठ स्वभाव के लिए प्रसिद्ध थे। लेकिन एक क्षणिक क्रोध में उन्होंने एक तपस्वी ऋषि का अपमान कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप तक्षक नाग के शाप से उनकी मृत्यु हुई।
यह घटना सत्य युग से कलयुग में प्रवेश का प्रतीक बनी — जब धर्म की नींव डगमगाने लगी और अधर्म ने अपना पहला कदम बढ़ाया।इसके बाद दृश्य बदलता है — परीक्षित के पुत्र जन्मेजय पिता की मृत्यु का प्रतिशोध लेने के लिए सर्प यज्ञ का आयोजन करते हैं। इस यज्ञ की लपटों में न केवल सर्प, बल्कि करुणा और क्षमा जैसे गुण भी भस्म होने लगते हैं।
नाटक का चरम दृश्य तब आया जब कलयुग का पात्र (अभिनय – नुरुलहूदा) मंच पर प्रवेश कर संवाद कहता है— “जब मनुष्य अपने धर्म को भूल जाएगा, जब लोभ, क्रोध और अन्याय की दीवारें ऊँची होंगी — वहीं से आरंभ होगा मेरा राज्य… मेरा कलयुग!”इस संवाद पर पूरा मैदान तालियों की गड़गड़ाहट और “जय श्री कृष्ण” के नारों से गूंज उठा। दर्शकों की आंखों में आस्था और सोच दोनों झलक रहे थे।कलाकारों की सजीव अदाकारी बनी आकर्षण का केंद्र पात्र अभिनेता राजा परीक्षित रंजीत गुप्ता,कलयुग नुरुलहूदा,तक्षक नाग दिनेश,धर्म गौरीशंकर,इरावती पिंकू,पृथ्वी कमलेश,जन्मेजय आशीष गुप्ता,सभी कलाकारों ने अपने संवादों, मंचाभिनय और भावभंगिमा से ऐसा वातावरण रचा कि दर्शक पौराणिक काल में लौट गए।आयोजकों की टीम ने दिया उत्कृष्ट संयोजन नाटक का सफल संचालन संस्थापक एवं निदेशक मुनेश्वर प्रसाद कनौजिया ने किया।
समिति की ओर से अध्यक्ष दिनेश यादव (ग्राम प्रधान फुलवार), प्रबंधक वीरेंद्र चौधरी (मंडल अध्यक्ष विंढमगंज), उपाध्यक्ष पंकज कन्नौजिया, कोषाध्यक्ष विजय कुमार कन्नौजिया, महामंत्री डॉ. राजेश्वर प्रसाद गुप्ता, सचिव रामनारायण गुप्ता, अनूप कुमार कन्नौजिया, अनुज कुमार कन्नौजिया ,मुकेश गुप्ता सहित दर्जनों कार्यकर्ताओं ने अथक प्रयास किया।रात्रि तक चले मंचन में सैकड़ों दर्शक डटे रहे। अंत में पूरा परिसर “जय धर्मराज, जय श्री कृष्ण” के उद्घोषों से गूंज उठा।
नाटक ने दिया यह संदेश“धर्म और अधर्म की जंग युगों से चलती आ रही है, पर विजयी वही होगा जो सत्य और करुणा के मार्ग पर डटा रहेगा।”




