
अजीत मिश्रा (खोजी)
।। बस्ती: नए साल की रात होटल में बवाल, प्रधान संघ अध्यक्ष ने कोतवाली पुलिस पर लगाए बर्बरता के आरोप।।
03 जनवरी 26, उत्तर प्रदेश।
बस्ती ।। जनपद के पॉश होटल ‘क्लार्क इन’ में नए साल की रात हुआ विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। प्रधान संघ के अध्यक्ष सचिन दुबे ने कोतवाली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिसिया कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा किया है। पीड़ित ने एसपी कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है।

गुंडई पर उतरी बस्ती पुलिस? प्रधान संघ अध्यक्ष को सरेराह पीटा, होटल मैनेजर की शह पर खाकी ने दिखाया खौफनाक चेहरा।
बस्ती। जनपद में पुलिसिया बर्बरता का एक शर्मनाक अध्याय जुड़ गया है। रक्षक ही जब भक्षक बन जाएं, तो न्याय की उम्मीद किससे की जाए? होटल क्लार्क इन के बाहर जो हुआ, उसने यह साबित कर दिया है कि वर्दी के नशे में चूर कुछ पुलिसकर्मी खुद को कानून से ऊपर समझने लगे हैं।
होटल मैनेजर की बदतमीजी और पुलिस की ‘गुंडागर्दी’
घटनाक्रम के अनुसार, बहादुरपुर ब्लॉक के प्रधान संघ अध्यक्ष सचिन दुबे (पुत्र स्व. अशोक दुबे) अपने साथियों हिमांशु शुक्ला, अरुण कुमार यादव और अमन विश्वकर्मा के साथ 31 दिसंबर की रात करीब 10 बजे होटल क्लार्क इन (निकट फौव्वारा तिराहा) खाना खाने गए थे।
होटल के गेट पर कर्मचारी ने तो हां कर दी, लेकिन मैनेजर सेमुल्ल सिंह ने आपा खो दिया। मैनेजर ने न केवल अभद्रता की बल्कि “भगाओ सबको बाहर” कहकर सरेआम गाली-गलौज शुरू कर दी। विवाद यहीं खत्म हो सकता था, लेकिन असली तांडव तब शुरू हुआ जब ‘शांति’ कायम करने पहुंची पुलिस ने खुद ही मोर्चा संभाल लिया।
कोतवाल की दबंगई: परिचय देने पर मिलीं गालियां और लाठियां
पीड़ित सचिन दुबे का आरोप है कि जब उन्होंने अपना परिचय दिया, तो कोतवाल साहब और पुलिस प्रशासन ने मर्यादा की सारी सीमाएं लांघ दीं।
मारपीट और अपमान: प्रधान संघ अध्यक्ष को सरेराह पीटा गया और धक्का मारकर गाड़ी में बैठाया गया।
लाइसेंसी असलहे पर ‘फर्जी’ खेल: पीड़ित के चाचा अनिल कुमार दुबे के पास लाइसेंसी असलहा था, लेकिन पुलिस ने उसे ‘गुंडई’ का हथियार बताकर पेश किया।
फर्जी मुकदमा: कोतवाली ले जाकर न केवल मारपीट की गई, बल्कि रसूखदार परिवार के इन युवकों पर फर्जी मुकदमे भी थोप दिए गए।
🚨 वीडियो साक्ष्य से डरी पुलिस?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पूरी घटना का वीडियो साक्ष्य सोशल मीडिया पर मौजूद है, तो पुलिस अपनी खाल बचाने के लिए झूठ क्यों गढ़ रही है? क्या एक होटल मैनेजर के कहने पर खाकी किसी जनप्रतिनिधि की इज्जत उछाल सकती है?
🔥 जनता के सवाल:—
👉 मैनेजर सेमुल्ल सिंह के अहंकार को पुलिस का संरक्षण क्यों मिला?
👉 क्या बस्ती पुलिस अब अनिल कुमार दुबे जैसे वैध लाइसेंस धारकों को भी अपराधी घोषित करेगी?
👉 कोतवाल पर कार्रवाई करने में प्रशासन के हाथ क्यों कांप रहे हैं?
यह हमला सिर्फ सचिन दुबे पर नहीं, बल्कि समूचे ‘प्रधान संगठन’ और जनता के मान-सम्मान पर है। अगर पुलिस कप्तान ने दोषी पुलिसकर्मियों और होटल मैनेजर पर कठोर कार्रवाई नहीं की, तो यह चिंगारी शांत होने वाली नहीं है। सचिन दुबे का आरोप है कि मौके पर पहुंची कोतवाली पुलिस ने मामले को शांत कराने के बजाय उनके साथ अभद्रता की और बर्बरतापूर्वक व्यवहार किया। पीड़ित पक्ष का कहना है कि पुलिस ने सत्ता और वर्दी के नशे में एक जनप्रतिनिधि की गरिमा का ख्याल नहीं रखा। इस दौरान हुई झड़प का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जिसमें पुलिस का सख्त रवैया दिखाई दे रहा है।
👉 एसपी कार्यालय पहुंचे पीड़ित, कार्रवाई की मांग:—
घटना के विरोध में और न्याय की मांग को लेकर सचिन दुबे, हिमांशु शुक्ला के साथ पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय पहुंचे। उन्होंने उच्चाधिकारियों को पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया और दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की मांग की। प्रधान संघ का कहना है कि यदि जनप्रतिनिधियों के साथ इस तरह का व्यवहार होगा, तो आम जनता की सुरक्षा का क्या होगा?
👉 सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय:—
होटल के भीतर का वीडियो वायरल होने के बाद जिले के राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। एक पक्ष इसे पुलिस की ज्यादती बता रहा है, तो वहीं दूसरा पक्ष होटल में हुए हंगामे को लेकर अपनी राय रख रहा है।








