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मंडला MP हेमंत नायक महाराजपुर
Forest News mandla वन ग्रामों:–को राजस्व ग्रामों में बदलने की प्रक्रिया को लेकर हाल ही में एक महत्वपूर्ण **कार्यशाला** का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला मंडला जिले के **एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय** के सभागार में हुई, जिसमें वन, राजस्व और ग्रामीण विकास विभागों के अधिकारियों ने मिलकर हिस्सा लिया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य वन क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों के जीवन को बेहतर बनाना और उन्हें कानूनी रूप से स्थायी निवास का दर्जा प्रदान करना है।
कार्यशाला के प्रमुख विषय
इस कार्यशाला में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर गहन चर्चा की गई:
- *वन अधिकार पत्रों का वितरण:** वन ग्रामों में रहने वाले परिवारों को उनके अधिकारों के तहत **वन अधिकार पत्र** जारी करने पर जोर दिया गया। ये पत्र उन्हें अपनी भूमि पर कानूनी अधिकार देते हैं।
- *ग्राम सीमाओं का निर्धारण:** वन ग्रामों की सीमाओं को स्पष्ट रूप से तय करने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया गया ताकि भविष्य में किसी भी तरह के भूमि विवाद से बचा जा सके।
- *वन भूमि पट्टों का नवीनीकरण:** आवश्यकता पड़ने पर वन भूमि के पट्टों को नवीनीकृत करने की प्रक्रिया पर भी बात की गई, ताकि किसानों को अपनी जमीन पर खेती करने में कोई बाधा न आए।
- *सर्वेक्षण का महत्व:** पूरे क्षेत्र का सही-सही सर्वेक्षण (सर्वे) करने की आवश्यकता पर बल दिया गया ताकि संपरिवर्तन की प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी हो सके।

प्रक्रिया की रूपरेखा (एसओपी)
कार्यशाला में मास्टर ट्रेनर और केटीआर बफर जोन के सहायक संचालक **श्री आशीष पाण्डेय** ने संपरिवर्तन की प्रक्रिया की **एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर)** को विस्तार से समझाया। उन्होंने इस प्रक्रिया के सातों चरणों को एक-एक करके बताया और हर चरण के लिए निर्धारित समय-सीमा (टाइमलाइन) भी साझा की। इस दौरान उपस्थित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों, वन समिति के सदस्यों और किसानों ने अपने मन में उठने वाली शंकाओं और सवालों को पूछा, जिनका समाधान किया गया।
कार्यशाला में सहभागिता
इस कार्यशाला में विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे, जिन्होंने इस प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए मिलकर काम करने का संकल्प लिया। इसमें वन विभाग, राजस्व विभाग, जनजातीय कार्य विभाग और ग्रामीण विकास विभाग के प्रतिनिधि शामिल थे। इसके अलावा, वन समिति के सदस्यों और वन ग्रामों के किसानों ने भी भाग लिया, जिससे यह कार्यशाला और भी प्रभावी बन सकी।
यह पहल वन क्षेत्र में रहने वाले लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वन ग्रामों को राजस्व ग्रामों में बदलने से न केवल उन्हें कानूनी सुरक्षा मिलेगी, बल्कि उन्हें सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का भी लाभ मिल पाएगा, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार होगा।












