
मकर संक्रांति पर कनहर–ठेमा संगम में उमड़ा आस्था का सैलाब, चार राज्यों से पहुंचे हजारों श्रद्धालु

दुद्धी सोनभद्र(राकेश कुमार कन्नौजिया)_
मकर संक्रांति के पावन अवसर पर महुली स्थित कनहर एवं ठेमा नदी के पवित्र संगम स्थल पर श्रद्धा और आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश तथा उत्तर प्रदेश के आसपास के जिलों से हजारों श्रद्धालु प्रातःकाल से ही संगम तट पर पहुंचकर पवित्र स्नान में लीन नजर आए। घने कोहरे के बीच सूर्य देव की पहली किरणों के साथ ही भक्तों ने हर-हर गंगे के जयघोष के साथ आस्था की डुबकी लगानी शुरू कर दी।
श्रद्धालुओं का मानना है कि मकर संक्रांति के दिन इस पवित्र संगम में स्नान करने से समस्त पापों का नाश होता है और जीवन में नई ऊर्जा व सकारात्मकता का संचार होता है। पूरे दिन संगम स्थल धार्मिक आस्था के प्रमुख केंद्र के रूप में परिवर्तित रहा।
नदी किनारे लगे विशाल मेले ने श्रद्धालुओं का विशेष ध्यान आकर्षित किया। मेले में तिल-गुड़ के लड्डू, खिचड़ी, रेवड़ी सहित विभिन्न पारंपरिक व्यंजनों की दुकानों पर भारी भीड़ देखी गई। महिलाएं पारंपरिक परिधानों में सजी-धजी पूजा-अर्चना करती नजर आईं, वहीं पुरुष तिलक लगाकर धार्मिक अनुष्ठानों में व्यस्त रहे। बच्चों में उत्साह देखते ही बन रहा था—कोई पतंग उड़ाता दिखा तो कोई झूले और घुड़सवारी का आनंद लेते नजर आया। आकाश में लहराती रंग-बिरंगी पतंगों ने पूरे माहौल को उत्सवपूर्ण बना दिया।
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि यह मेला आदिवासी संस्कृति और आपसी भाईचारे का प्रतीक है, जहां विभिन्न राज्यों से आए लोग एकजुट होकर पर्व मनाते हैं। वहीं पर्यावरण प्रेमियों द्वारा इस अवसर पर नदी सफाई अभियान भी चलाया गया, ताकि पवित्र जलधारा स्वच्छ और प्रदूषणमुक्त बनी रहे।
मकर संक्रांति पर तिल दान का भी विशेष महत्व रहा। श्रद्धालुओं ने तिल, वस्त्र एवं खाद्य सामग्री का दान कर पुण्य अर्जित किया। ग्रामीणों ने कहा कि कनहर नदी का यह संगम स्थल क्षेत्र की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर है, जिसका संरक्षण हम सभी की जिम्मेदारी है।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर स्थानीय प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। विंढमगंज व दुद्धी थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ मौके पर मौजूद रहे और पूरे मेले के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाई। आयोजन शांतिपूर्ण और हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ।






