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बस्ती: 80 साल के बुजुर्ग पर जानलेवा हमला; रामापुर के पास दबंगों ने की थी क्रूरता, महीनों कोमा में रहने के बाद होश में आए पीड़ित ने खोले राज़।

घटना की भीषणता और पीड़ित की हालत को देखते हुए परिजनों ने नगर थाने में नामजद आरोपियों के खिलाफ लिखित तहरीर दी। इसके बावजूद, हैरानी की बात यह है कि पुलिस ने अभी तक इस गंभीर मामले में मुकदमा दर्ज करना मुनासिब नहीं समझा।

अजीत मिश्रा (खोजी)

न्याय के इंतजार में 80 साल के बुजुर्ग की सिसकियां: बस्ती पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल

  • नगर थाने की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल; जानलेवा हमले के नामजद आरोपियों पर तहरीर देने के बावजूद पुलिस ने नहीं दर्ज किया मुकदमा।
  • कोठवा भरतपुर का मामला: मौत के मुँह से लौटकर आए बुजुर्ग ने बताए हमलावरों के नाम, न्याय के लिए दर-दर भटक रहा पीड़ित परिवार।
  • बस्ती पुलिस की सुस्ती: कोमा से उबरकर बुजुर्ग ने खुद बयां की आपबीती, फिर भी खाकी की मेहरबानी से बेखौफ घूम रहे दबंग।

बस्ती: उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में कानून-व्यवस्था और पुलिस की संवेदनशीलता पर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। मामला जिले के नगर थाना क्षेत्र का है, जहां दबंगों ने एक 80 वर्षीय बुजुर्ग पर जानलेवा हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल बुजुर्ग लंबी अवधि तक कोमा (अचेत अवस्था) में रहने के बाद मौत के मुँह से वापस लौटे, लेकिन खाकी की सुस्त कार्यशैली के चलते आज भी न्याय के लिए भटक रहे हैं।

​क्या है पूरा मामला?

​यह सनसनीखेज घटना नगर थाना क्षेत्र के कौठवा भरतपुर गांव की है। थाना क्षेत्र के रामापुर के पास दबंगों ने क्रूरता की हदें पार करते हुए 80 साल के एक बुजुर्ग को अपना निशाना बनाया और उनपर जानलेवा हमला कर दिया।

​हमले में बुजुर्ग को इतनी गंभीर चोटें आईं कि वे अचेत हो गए और उन्हें इलाज के लिए लखनऊ रेफर करना पड़ा। वहां लंबे समय तक वे कोमा जैसी अचेत अवस्था में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करते रहे।

​होश में आते ही सामने आया सनसनीखेज सच

​ईश्वर की कृपा और डॉक्टरों के प्रयासों से बुजुर्ग की याददाश्त वापस आ गई। होश में आने के बाद पीड़ित ने खुद पर जानलेवा हमला करने वाले दबंगों के नाम का खुलासा किया। बुजुर्ग के बयान ने इस पूरे मामले में कई बड़े खुलासे किए हैं, जिससे आरोपियों की मुश्किलें बढ़नी चाहिए थीं।

​थाने का चक्कर काट रहा पीड़ित परिवार, पुलिस मौन

​घटना की भीषणता और पीड़ित की हालत को देखते हुए परिजनों ने नगर थाने में नामजद आरोपियों के खिलाफ लिखित तहरीर दी। इसके बावजूद, हैरानी की बात यह है कि पुलिस ने अभी तक इस गंभीर मामले में मुकदमा दर्ज करना मुनासिब नहीं समझा।

​एक बुजुर्ग पर जानलेवा हमला, महीनों तक अस्पताल में कोमा में रहना और होश में आने के बाद खुद बयान देना—इन सबके बाद भी पुलिस की यह हीला-हवाली कई गंभीर सवाल खड़े करती है:

  • आखिर नगर थाना अध्यक्ष इस गंभीर मामले में एफआईआर दर्ज करने से क्यों कतरा रहे हैं?
  • क्या पुलिस किसी बड़े दबाव में है या उसे किसी अनहोनी का इंतजार है?
  • क्या बुजुर्ग और उनके परिवार को न्याय दिलाने के लिए कोई ठोस कार्रवाई तभी होगी जब कोई बड़ा बवाल मचेगा?

​निष्कर्ष

​बस्ती पुलिस का यह रवैया न केवल पीड़ितों के जख्मों पर नमक छिड़क रहा है, बल्कि जिले में बढ़ते अपराध और दबंगों के हौसलों को भी बढ़ावा दे रहा है। यदि समय रहते पुलिस ने नामजद आरोपियों पर मुकदमा दर्ज कर कड़ी कार्रवाई नहीं की, तो यह मान लिया जाएगा कि खाकी अब गरीबों और मज़लूमों की रक्षा के बजाय अपराधियों की ढाल बन चुकी है। अब देखना यह है कि उच्च अधिकारी इस मामले में संज्ञान लेते हैं या पीड़ित न्याय के लिए यूं ही दर-दर भटकता रहेगा।

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