
अजीत मिश्रा (खोजी)
शिक्षा विभाग की खानापूर्ति या मिलीभगत? एक दिन पहले सील हुआ स्कूल फिर खुला, भविष्य से खिलवाड़ जारी!
- बीईओ विजय आनंद की कार्रवाई साबित हुई हवा-हवाई; ‘आर.सी. फेथ पब्लिक स्कूल’ सील होने के कुछ घंटों बाद ही फिर हुआ संचालित
- अवैध विद्यालयों के संचालन पर उठ रहे गंभीर सवाल; क्या विभागीय मिलीभगत से बच्चों के भविष्य से हो रहा है खिलवाड़?
- महदेवा के ‘एसडीएनएल टैलेंट एकेडमी’ पर जुर्माने की संस्तुति के बाद भी धड़ल्ले से चल रहा खेल, अभिभावकों में भारी आक्रोश
हरैया (बस्ती): शिक्षा विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली पर अब गंभीर और सवालिया निशान खड़े होने लगे हैं। मामला बस्ती जिले के हरैया विकासखंड का है, जहां खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) की टीम द्वारा एक दिन पहले जिस अवैध विद्यालय पर ताला लगाया गया, वह अगले ही दिन फिर से धड़ल्ले से संचालित मिलने लगा। इस घटना ने विभागीय दावों, चेतावनियों और कार्रवाई की हवा निकाल दी है, जिससे साफ जाहिर होता है कि कागजी कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है।
हवा-हवाई साबित हुई बीईओ की कार्रवाई
कुछ दिन पहले खंड शिक्षा अधिकारी विजय आनंद के नेतृत्व में एक जांच अभियान चलाया गया था। इस दौरान हरदी स्थित ‘आर.सी. फेथ पब्लिक स्कूल’ बिना किसी मान्यता के संचालित पाया गया था, जिसके बाद विभाग ने विद्यालय को बंद कराकर नोटिस जारी किया था। वहीं, महादेवा स्थित ‘एसडीएनएल टैलेंट एकेडमी’ के खिलाफ भी कार्रवाई करते हुए भारी जुर्माने की संस्तुति बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) को भेजी गई थी।
विभाग की ओर से यह सख्त चेतावनी दी गई थी कि यदि बंद कराए गए विद्यालय दोबारा संचालित पाए गए, तो प्रबंधकों के खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। लेकिन विडंबना देखिए कि चेतावनी के महज 24 घंटे के भीतर ही ये दावे कागजों तक सीमित नजर आने लगे और स्कूल का संचालन फिर से शुरू हो गया।
अभिभावकों के भविष्य के साथ खिलवाड़
इस लचर व्यवस्था और प्रशासनिक ढिलाई से क्षेत्र के अभिभावक बेहद आक्रोशित हैं। अभिभावकों का कहना है कि बिना मान्यता के संचालित होने वाले ये विद्यालय बच्चों के भविष्य के साथ एक गंभीर खिलवाड़ हैं। ऐसे स्कूलों में न तो मानक के अनुरूप शिक्षक होते हैं, न सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और न ही बच्चों के भविष्य की कोई विधिक मान्यता।
अभिभावकों ने तीखा सवाल उठाया है कि आखिर सील होने के अगले ही दिन स्कूल दोबारा कैसे खुल गया? क्या खंड शिक्षा अधिकारी की कार्रवाई सिर्फ मीडिया की सुर्खियों में बने रहने के लिए थी या फिर इसके पीछे कोई गहरी विभागीय मिलीभगत है?
सख्त कदमों की दरकार
यह मामला सिर्फ एक स्कूल के दोबारा खुलने भर का नहीं है, बल्कि यह शिक्षा विभाग के नियंत्रण और उसकी साख पर एक बड़ा तमाचा है। यदि जिम्मेदार अधिकारी इस तरह की गंभीर लापरवाहियों पर आंखें मूंद लेंगे, तो अवैध विद्यालयों का मकड़जाल कभी खत्म नहीं होगा।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और बेसिक शिक्षा अधिकारी इस मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित विद्यालय औरलापरवाह जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या ठोस और नजीर पेश करने वाली कार्रवाई करते हैं, या फिर यह मामला भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।









