उत्तर प्रदेशलखनऊ

उत्तर प्रदेश में बड़ा प्रशासनिक एक्शन: मनरेगा में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में संयुक्त आयुक्त संजय कुमार पांडेय निलंबित।

शासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं। अब इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच लखनऊ के मंडलायुक्त द्वारा की जाएगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद अधिकारी की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

अजीत मिश्रा (खोजी)

मनरेगा में वित्तीय अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई: संयुक्त आयुक्त संजय कुमार पांडेय निलंबित

  • उप मुख्यमंत्री के निर्देश पर कार्रवाई: ग्राम्य विकास विभाग ने प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर की सख्त कार्रवाई।
  • उन्नाव तैनाती के दौरान बरती गई थी लापरवाही: उपायुक्त (स्वतः रोजगार) पद पर रहने के दौरान वित्तीय नियमों की अनदेखी का मामला आया सामने।
  • लोकपाल कार्यकाल विस्तार और निर्देशों की अवहेलना: 15 मार्च 2026 को लोकपालों का कार्यकाल पूरा होने के बाद प्रस्ताव न भेजने और शासनादेशों के उल्लंघन का आरोप।
  • लखनऊ मंडलायुक्त करेंगे जांच: शासन द्वारा जारी आदेश के बाद अब पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच लखनऊ मंडल के आयुक्त द्वारा की जाएगी।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के ग्राम्य विकास विभाग ने भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए संयुक्त आयुक्त (मनरेगा) संजय कुमार पांडेय को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के स्पष्ट निर्देशों के बाद की गई है। प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने के बाद उन्हें कार्यालय आयुक्त, ग्राम्य विकास, उत्तर प्रदेश, लखनऊ से संबद्ध कर दिया गया है।

​उन्नाव तैनाती के दौरान सामने आई अनियमितताएं

​यह पूरा मामला संयुक्त आयुक्त संजय कुमार पांडेय की जनपद उन्नाव में उपायुक्त (स्वतः रोजगार) और राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के पद पर तैनाती के दौरान किए गए कार्यों से जुड़ा है। शासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार, इस कार्यकाल के दौरान उनके स्तर पर कई गंभीर वित्तीय अनियमितताएं और प्रशासनिक स्तर पर भारी लापरवाही बरती गई, जिसके बाद शासन स्तर पर यह गाज गिरी है।

​प्रमुख आरोप और नियमों की अनदेखी

​शासन की जांच रिपोर्ट और जारी आदेश के मुताबिक, अधिकारी पर निम्नलिखित गंभीर आरोप तय किए गए हैं:

  • लोकपाल कार्यकाल का विस्तार न करना: लोकपालों का कार्यकाल 15 मार्च 2026 को पूरा होने के बाद भी उनके कार्यकाल के विस्तार या नवीनीकरण से संबंधित कोई प्रस्ताव या पत्रावली समय पर प्रस्तुत नहीं की गई।
  • विशेषज्ञ के खिलाफ कार्रवाई में हीलाहवाली: संबंधित विशेषज्ञ के विरुद्ध नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई।
  • निर्देशों का उल्लंघन: भारत सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों और उत्तर प्रदेश शासन के शासनादेशों की अवहेलना की गई।
  • पर्यवेक्षण में विफलता: मनरेगा योजना से जुड़े महत्वपूर्ण और संवेदनशील बिंदुओं पर उचित पर्यवेक्षण (सुपरविजन) और समय पर ठोस कार्रवाई करने में विफलता पाई गई।

​आगे की जांच प्रक्रिया

​शासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष जांच के आदेश दिए हैं। अब इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच लखनऊ के मंडलायुक्त द्वारा की जाएगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद अधिकारी की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

​इस सख्त प्रशासनिक कदम से यह संदेश स्पष्ट हो गया है कि ग्रामीण विकास योजनाओं और मनरेगा जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में वित्तीय अनुशासनहीनता तथा लापरवाही को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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