
अम्बेडकर नगर
नगर पालिका अकबरपुर की लापरवाही और जिम्मेदार अधिकारियों की घोर उदासीनता अब नागरिकों की सांसें छीन रही है। शहजादपुर के तिरंगा चौराहा के निकट नेकी घर के बगल में खुले में कूड़े का पहाड़ खड़ा कर दिया गया है। पूरे शहर का कचरा यहीं डंप किया जा रहा है, फिर यहीं से लोड होकर बाहर ले जाया जाता है। नतीजा — चारों ओर घुटन भरी जहरीली दुर्गंध, मक्खियों-कीड़ों का ऐसा हमला कि सांस लेना भी दूभर हो गया है।स्थानीय निवासी दिन-रात इस बदबू की मार झेल रहे हैं। घरों में बैठना मुश्किल, बच्चों को स्कूल भेजना सजा बन गया है। मुख्य मार्ग पर गुजरने वाले आम नागरिक, स्कूली बच्चे और महिलाएँ लगातार इस जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर हैं। गंदगी, प्रदूषण और कीड़े-मकोड़े ने पूरे इलाके को बीमारियों का अड्डा बना दिया है।यह खबर प्रकाशित होने के बाद और स्थानीय लोगों द्वारा लिखित शिकायती पत्र देने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं। कूड़ा डंपिंग का स्थान आज तक नहीं हटाया गया। प्रशासन की इस घोर लापरवाही ने नागरिकों को बेहद त्रस्त कर दिया है। स्वच्छ भारत अभियान का ढिंढोरा पीटने वाले अधिकारी अपने ही शहर में फैले इस कूड़े के पहाड़ को देखकर शर्मिंदा भी नहीं हो रहे।यह अस्थायी कबाड़खाना न सिर्फ बदबू फैला रहा है, बल्कि इलाके की गरिमा, लोगों के स्वास्थ्य और बच्चों के भविष्य को भी निगल रहा है। सांस की बीमारियाँ, आँखों में जलन, उल्टी और अन्य संक्रमण अब आम हो गए हैं।
अगर प्रशासन अब भी आँखें मूँदे बैठा रहा तो यह लापरवाही पूरे अकबरपुर शहर के लिए बड़ी स्वास्थ्य आपदा बन जाएगी। समय रहते जिम्मेदारी निभाएँ, वरना जनता अब चुप नहीं रहेगी। क्या नगर पालिका अकबरपुर जागेगी या नागरिकों को सड़कों पर उतरना पड़ेगा?















