
सागर।वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज रिपोर्टर सुशील द्विवेदी 8225072664 * नई दिल्ली मे संपन्न सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति की बैठक में सागर संसदीय क्षेत्र की सांसद डॉ. लता वानखेड़े ने हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार, उसके प्रभावी उपयोग तथा एआई (AI) के माध्यम से भारतीय भाषाओं के भविष्य को लेकर अनेक दूरदर्शी और व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत किए। बैठक में उनके सुझावों को सदस्यों द्वारा गंभीरता से सुना गया तथा भविष्य की भाषा नीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण और समयानुकूल बताया गया। बैठक में डॉ. वानखेड़े ने अपने विचार रखते हुए कहा कि 21वीं सदी में किसी भी भाषा का भविष्य केवल साहित्य तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उसकी डिजिटल क्षमता, AI में भागीदारी, प्रशासनिक उपयोग, ज्ञान-विज्ञान में उपलब्धता तथा आम नागरिक के दैनिक जीवन में उसकी उपयोगिता से तय होगा। उन्होंने कहा कि हिंदी को केवल राजभाषा के रूप में नहीं, बल्कि डिजिटल भारत और विकसित भारत 2047 के निर्माण की प्रमुख भाषा के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। बैठक में उन्होंने सुझाव दिया कि भारत सरकार “राष्ट्रीय AI भारतीय भाषा मिशन” प्रारंभ करे, जिसके माध्यम से हिंदी सहित सभी भारतीय भाषाओं के लिए रियल-टाइम अनुवाद, वॉयस ट्रांसलेशन, टेक्स्ट ट्रांसलेशन और डिजिटल भाषा संसाधन विकसित किए जाएँ। उन्होंने कहा कि इससे न केवल सरकारी सेवाएँ अधिक सुलभ होंगी, बल्कि देश में समय-समय पर उत्पन्न होने वाले भाषाई मतभेदों को भी तकनीक के माध्यम से काफी हद तक कम किया जा सकेगा। उन्होंने यह भी प्रस्ताव रखा कि देश के सभी सरकारी कार्यालयों, रेलवे, अस्पतालों, न्यायालयों, पुलिस थानों तथा नागरिक सेवा केंद्रों में AI आधारित बहुभाषी संवाद प्रणाली विकसित की जाए, जिससे नागरिक अपनी मातृभाषा में संवाद कर सकें और अधिकारी अपनी भाषा में उसे सहज रूप से समझ सकें। डॉ. वानखेड़े ने इस बात पर भी विशेष जोर दिया कि भारत सरकार को “भारतीय भाषा एवं ए आई आयोग (Indian Languages & AI Commission)” की स्थापना पर गंभीरता से विचार करना चाहिए, जो भारतीय भाषाओं के लिए AI मॉडल विकसित करने, डिजिटल भाषा संसाधनों का निर्माण करने, सरकारी वेबसाइटों के बहुभाषीकरण, भाषा अनुसंधान तथा स्टार्टअप नवाचार को बढ़ावा देने का कार्य करे। बैठक के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण प्रश्न भी उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या भारत सरकार के पास विभिन्न मंत्रालयों, विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों और सरकारी संस्थानों में हिंदी के वास्तविक उपयोग के मंत्रालयवार आंकड़े उपलब्ध हैं। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि विभिन्न राज्यों में हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए अब तक कौन-कौन से कार्यक्रम चलाए गए, उनका क्या प्रभाव रहा और क्या उनके परिणामों का कोई स्वतंत्र मूल्यांकन किया गया ,उन्होंने सुझाव दिया कि “नेशनल हिंदी डैशबोर्ड” बनाया जाए, जिसमें प्रत्येक मंत्रालय और विभाग में हिंदी के उपयोग, डिजिटल सेवाओं, वेबसाइटों, सोशल मीडिया, ई-ऑफिस तथा कार्यालयी कार्यों में हिंदी के प्रयोग के वास्तविक आंकड़े सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हों। उनका मानना था कि डेटा आधारित मूल्यांकन से स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और राजभाषा नीति का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा। डॉ. वानखेड़े ने यह भी कहा कि विज्ञान, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, कानून और नई तकनीकों से जुड़ा उच्च गुणवत्ता वाला हिंदी डिजिटल कंटेंट तैयार करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने AI की सहायता से भारतीय भाषाओं में विशाल ज्ञान-संसाधन तैयार करने, युवाओं के लिए हिंदी आधारित डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म विकसित करने तथा दूरदर्शन, आकाशवाणी और डिजिटल मीडिया को AI आधारित बहुभाषी मंच के रूप में विकसित करने का सुझाव दिया। बैठक में उपस्थित सदस्यों ने डॉ. लता वानखेड़े द्वारा प्रस्तुत विचारों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप, नवोन्मेषी और दूरदर्शी बताते हुए उनकी सराहना की। कई सदस्यों ने माना कि एआई के दौर में भारतीय भाषाओं के विकास के लिए इस प्रकार के सुझाव नीति निर्माण में उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं। अपने संबोधन के अंत में डॉ. वानखेड़े ने कहा कि “भाषा संवाद और राष्ट्रीय एकता का माध्यम होनी चाहिए। हिंदी का विकास तभी सार्थक होगा जब वह सभी भारतीय भाषाओं के सम्मान के साथ तकनीक, ज्ञान, प्रशासन और नवाचार की भाषा बने। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यदि इन सुझावों पर चरणबद्ध तरीके से कार्य किया गया तो आने वाले वर्षों में भारत भारतीय भाषाओं और AI के क्षेत्र में विश्व का अग्रणी देश बन सकता है तथा हिंदी डिजिटल युग की एक सशक्त वैश्विक भाषा के रूप में स्थापित होगी।










