केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी बोले

सिद्धार्थनगर जिले के निर्धारित कार्यक्रम के तहत केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी गौतम बुद्ध की क्रीड़ास्थली कपिलवस्तु पहुंचे। यहां उन्होंने सीएसआर फंड से निर्मित विपश्यना केंद्र और लाइट एंड साउंड पार्क का उद्घाटन किया। उद्घाटन के बाद केंद्रीय मंत्री ने आयोजित जनसभा को भी संबोधित किया। इस अवसर पर स्थानीय सांसद जगदंबिका पाल, कपिलवस्तु विधायक श्यामधनी राही सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री ने केंद्र सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार देश के चहुंमुखी विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि कपिलवस्तु में बनाए गए विपश्यना केंद्र से देश-विदेश से आने वाले बौद्ध श्रद्धालुओं और अनुयायियों को काफी लाभ मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उनके मंत्रालय की ओर से सीएसआर के तहत आगे भी कई विकास कार्य कराए जाएंगे। यह उनका वादा है।
बाद में मीडिया से बातचीत करते हुए हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि कल संसद में उनके मंत्रालय से जुड़ा एक बेहद महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी फैसला लिया गया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के एक्सप्लोरेशन एवं प्रोडक्शन को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 84 हजार करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है। उन्होंने बताया कि अगले चार वर्षों में यह राशि डेटा कलेक्शन, डीप ड्रिलिंग और आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर खर्च की जाएगी।
उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन इसके बावजूद देश बड़े पैमाने पर कच्चे तेल और प्राकृतिक
गैस का आयात कर रहा है। वर्तमान में भारत का क्रूड ऑयल आयात बिल लगभग 150 बिलियन डॉलर है। इस नई योजना के माध्यम से हर वर्ष लगभग एक लाख करोड़ रुपये की बचत होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि जहां-जहां कच्चे तेल और गैस की संभावनाएं हैं, वहां खोज और उत्पादन का कार्य तेज किया जाएगा।
गयाना का उदाहरण देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उस देश ने 45 कुओं की खुदाई की, लेकिन सफलता नहीं मिली। 46वें कुएं में सफलता मिलने के बाद आज गयाना दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में शामिल हो गया है। उन्होंने कहा कि भारत ने देश और विदेश में जहां भी तेल और गैस के लिए खुदाई की है, वहां हर तीन में से दो स्थानों पर सफलता मिली है। इन सभी पहलुओं को देखते हुए यह एक बेहद क्रांतिकारी निर्णय है, जो भारत को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
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