खड़े हनुमान ‘टस से मस नहीं ,7 दिन से प्रशासन के प्रयास नाकाम

सागर।वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज रिपोर्टर सुशील द्विवेदी 8225072664 * सिंहस्थ -2028 की तैयारियों और सड़क चौड़ीकरण के लिए उज्जैन के ऐतिहासिक खड़े हनुमान मंदिर को शिफ्ट करने की प्रशासनिक कवायद लगातार सात दिनों से जारी है, लेकिन प्रशासन अब तक प्रतिमा को उसके स्थान से हटा नहीं सका है। करीब 8 फीट ऊंची हनुमान प्रतिमा को हटाने के तमाम प्रयास असफल रहने के बाद अब इसे लेकर भक्तों और हिंदूवादी संगठनों में आस्था का माहौल और गहरा गया है।
कंठाल चौराहा से छत्रीचौक मार्ग चौड़ीकरण के दायरे में आ रहे खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को शिफ्ट करने के लिए नगर निगम अमले ने गुरुवार रात करीब 11 बजे कार्रवाई शुरू की थी। प्रतिमा को किसी प्रकार की क्षति न पहुंचे, इसके लिए उसे पॉलीथिन से पैक किया गया, लेकिन बाद में पैकिंग खोलनी पड़ी।
पुरातत्व विभाग की टीम भी स्थल का निरीक्षण और जांच कर चुकी है, लेकिन प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से हटाने का समाधान अब तक नहीं निकल सका है। प्रशासन की कार्रवाई के दौरान मंदिर की दीवारें, गुंबद और शिखर हिंदूवादी संगठनों एवं पुजारियों की सहमति से हटाए जा चुके हैं।
मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र भी साफ कर दिया गया है, लेकिन खड़े हनुमान की प्रतिमा आज भी अपने मूल स्थान पर विराजमान है। प्रतिमा को हटाने में हो रही देरी से अब भक्तों की आस्था और मजबूत हो गई है।
मंदिर परिसर में लगातार श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। भजन-कीर्तन चल रहे हैं और बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
कई भक्तों का कहना है कि जब इतने प्रयासों के बावजूद प्रतिमा नहीं हट पा रही है तो इसे उसी स्थान पर रहने दिया जाना चाहिए। करीब 150 वर्ष से अधिक पुराने इस खड़े हनुमान मंदिर से उज्जैनवासियों की गहरी धार्मिक आस्था जुड़ी हुई है।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार सिंधिया स्टेट के समय से स्थापित इस प्रतिमा के प्रति श्रद्धालुओं की विशेष आस्था है। बीमारी और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को लेकर भी बड़ी संख्या में लोग यहां झाड़ा लगवाने पहुंचते हैं।
बताया गया है कि जमीन से दिखाई देने वाली प्रतिमा करीब 8 फीट ऊंची है, जबकि प्रतिमा का 4 से 5 फीट हिस्सा जमीन के भीतर शिला के रूप में मौजूद है। इसे सुरक्षित निकालने के लिए अब प्रतिमा के आसपास फिर से खुदाई की जाएगी।
महाकाल की सवारी के चलते कुछ समय के लिए शिफ्टिंग का कार्य रोक दिया गया था। अब सवारी निकलने के बाद प्रशासन एक बार फिर प्रतिमा को सुरक्षित स्थानांतरित करने की कवायद शुरू करेगा।
वहीं, सात दिनों से जारी प्रयासों के बाद भी प्रतिमा के न हटने को लेकर हिंदूवादी संगठनों और श्रद्धालुओं ने प्रशासनिक कार्रवाई की लेटलतीफी पर नाराजगी जताई है।
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