बंडा जहरीली शराब कांड ने उजाड़े कई परिवार,सरकार की सख्त कार्यवाही की आस में आमजन,लगातार चल रही प्रशासनिक सर्जरी,कई अधिकारी सस्पेंड तो कई इधर से उधर

वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज रिपोर्टर सुशील द्विवेदी 8225072664* जिले के बंडा में जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद कई परिवारों के सामने रोजी-रोटी और आर्थिक संकट खड़ा हो गया है इस मामले में भले ही सरकार ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए अधिकारियों के ट्रांसफर कर दिए हो,लेकिन एक सवाल जस का तास खड़ा हुआ है,की जिन परिवारों से एक पिता,एक पति और एक बेटा गया है,क्या अधिकारियों के ट्रांसफर और सरकार की कार्यवाही से उनके घर की खुशियां वापस लौट आएंगी, तो जवाब होगा नहीं,सरकार भले ही दो दर्जन मौतों के आंकड़े सामने रख रही है लेकिन विपक्ष इन आंकड़ों को सही नहीं मान रहा है और सरकार की नियत और जवाब देही पर ही सवाल खड़े कर रहा है,वही अगर नरयावली विधानसभा में इस अवैध कारोबार की बात करे तो विधायक प्रदीप लारिया द्वारा पूर्व में अवैध शराब विक्रय के मामले में पुलिस प्रशासन को कई पत्र लिखें यहां तक की लोगों के साथ पूर्व पुलिस अधीक्षक से भी मिलकर चिंता जाहिर की और अवैध शराब विक्रय रोकने को कहा लेकिन पुलिस प्रशासन ने उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया एक तरफ पुलिस दावा करती है कि इस तरह के मामलों की सूचना पुलिस को दें शिकायतकर्ता का नाम गुप्त रखा जाएगा दूसरी ओर एक सत्ता पक्ष के विधायक की शिकायत को दरकिनार किया गया था इस दोहरे मापदंड के चलते धड़ल्ले से अवैध शराब बिकती रही और आज यह खौफनाक दृश्य देखने को मिला यदि जिस तरह घटना घटित होने के बाद ताबड़तोड़ करवाई नहीं हुई तो भविष्य में इससे भी बड़ी घटना देखने को मिल सकती है,बंडा मामले में अभी जितने भी लोगों का इलाज चल रहा है उन पर भी संशय बना हुआ है जिला प्रशासन की भले ही एक-एक व्यक्ति पर नजर हो लेकिन बंडा क्षेत्र में एक अजीब सा मातम पसरा हुआ है आलम यह है की कही आमजन के अंदर का गुस्सा सरकार पर ना फूट पड़े,इसीलिए सरकार ने जिला प्रशासन की एक बड़ी टीम बंडा क्षेत्र में तैनात कर रखी है जो क्षेत्र की हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए है,इस घटना पर जहां एक तरफ प्रदेश सरकार सख्त कार्यवाही और पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद देने का भरोसा दिला रही है वहीं विपक्ष भी इस मुद्दे को जमकर भुनाने में लगा हुआ है,और लगातार सरकार पर हमलावर है,कार्यवाही के नाम पर लोगों पर एफआईआर की गई कुछेक को हिरासत में लिया गया लेकिन क्या इस जहरीली शराब के प्रमुख जिम्मेदारों पर सरकार या प्रशासन ने कोई कार्यवाही की और क्या इनके रसूखों के चलते प्रशासन जानबूझकर अनजान बना हुआ है,जब इस प्रकार की कोई भी घटना होती है तो कमजोर या छोटे व्यक्ति पर त्वरित कार्यवाही के नाम पर प्रशासन उसके साथ सख्ती से पेश आता है वही धन्ना सेठ और सफेदपोश इन मामलों से आराम से बचकर निकल जाते हैं,यह हम नहीं कहते बल्कि विपक्ष यह आरोप लगा रहा है सरकार के संरक्षण और सरकार से जुड़े लोगों द्वारा ही इस अवैध कारोबार को चलाया जा रहा है तो क्या सरकार इन लोगों पर कोई कार्यवाही करेगी,कार्यवाही होती है या नहीं ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा,लेकिन जिन घरों की उम्मीदे,सपने और घर के चिराग बुझे हैं उन परिवारों को जीवन पर्यंत यह दुख सताता रहेगा,अब देखना होगा की सरकार इस जहर के कारोबार पर क्या सख्त एक्शन लेती है।
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